ISSN 2249-5967

 

सुषमा शर्मा

सम्पादक
डॉ. सरोज अग्रवाल
डॉ. सरोज अग्रवाल
एम.ए., पी.एच.डी. हिन्दी, पी.जी. डिप्लोमा (भाषा विज्ञान), अवका¶ा प्राप्त अध्यक्षा, हिन्दी एवं भाषा विज्ञान विभाग, उच्च ¶िाक्षा एवं ¶ाोध संस्थान चेन्नई, केन्द्र के कोयला एवं एनर्जी मन्त्रालय में हिन्दी सलाहकार के रूप में सदस्या (1985-93)। अमेरिका से प्रका¶िात अन्तर्राष्ट्रीय पत्रिका "वि·ाा' में सह-सम्पादक।

पाठकीय टिप्पणी
ताराशंकर बंद्योपाध्याय बंगाल के एक सुप्रसिद्ध लेखक हैं। कुछ दिन पूर्व इनका साहित्य पढ़ने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। साहित्य अच्छा है, गहन दृष्टि है। ग्रामीण जीवन का अत्यंत बारीकी से चित्रण भी किया है। विशेषकर अति निम्न वर्ग का। स्वाभाविक है बंगला संस्
समय के आईने में भारतवंशी
सुदूर समय में भारत एक संस्कृति प्रधान देश रहा है। कभी वह अपने मूल्यों एवं आदर्शों के कारण विश्व गुरु भी रहा है। लेकिन आज दुनियाभर में अमेरिकी संस्कृति का बोलबाला है। अमेरिका आर्थिक एवं ज्ञान विज्ञान की दृष्टि से काफी आगे बढ़ चुका है। सम्पूर्ण विश्व
अनुकरणीय पहल
भारतीय मूल के अप्रवासी डॉ. आलोक एवं डॉ. संगीता अग्रवाल अचानक जब हैदराबाद में अपने स्कूल के समय की शिक्षिका कुमारी सुमना जी से मिले और उनके सामाजिक कार्य और उनके त्याग का पता चला, तो त्यागमयी प्रवृत्ति होने के कारण तुरंत उनके साथ सहयोग करने का निर्
माया महा ठगनी
    बीर सन्त भक्त कवि हैं। उनकी दृष्टि से समाज की    कौन-सी ऐसी समस्या थी जो अछूती रह गई हो।    उनकी रचनाएँ अब भी राह दिखाती हैं। प्र¶न है कि क्या आज के भौतिकवादी जीवन में जहाँ वस्तुवाद
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