ISSN 2249-5967

 

सुषमा शर्मा

सम्पादक
डॉ. प्रेम जनमेजय
डॉ. प्रेम जनमेजय
18 मार्च , 1949 को इलाहाबाद में जन्म। दिल्ली विश्वविद्यालय से एम.ए., डी.लिट्., पीएच.डी.। आधुनिक व्यंग्य की तीसरी पीढ़ी के सशक्त हस्ताक्षर। हिंदी की लगभग सभी शीर्ष पत्र-पत्रिकाओं में लगभग तीन सौ रचनाएँ प्रकाशित। अनेक रचनाओं का अंग्रेज़ी, पंजाबी, गुजराती तथा मराठी में अनुवाद। प्रमुख व्यंग्य संकलन : राजधानी में गँवार, बेशर्ममेव जयते, पुलिस! पुलिस!, मैं नही माखन खायो, आत्मा महाठगिनी, शर्म मुझको मगर क्यों आती! पुरस्कार : अवंतिका सहस्त्राब्दी सम्मान, हरिशंकर परसाई स्मृति पुरस्कार, हिंदी अकादमी साहित्यकार सम्मान, अंतर्राष्ट्रीय बाल साहित्य दिवस पर "इंडो रशियन लिट्रेरी क्लब" सम्मान।
73 साक्षर अपार्टमेंटस, ए-3 पश्चिम विहार, नई दिल्ली, New Delhi, INDIA
अस्मिता के संघर्षशील सिपाही
01-Nov-2016 12:00 AM 2137 अस्मिता के संघर्षशील सिपाही

सन् 1498 में 31 जुलाई की दोपहर समुद्र में अपनी यात्रा के दौरान किसी जमीन की तलाश में हताश कोलंबस को जब उसके एक नाविक ने जहाज की छत से देखकर बताया कि पश्चिम की ओर तीन पहाड़ियां दिखाई दे रही हैं तो को

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