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डॉ. ओम विकास
डॉ. ओम विकास

1 अगस्त 1947 को उत्तरप्रदेश के एटा जनपद के ब्राहृपुरी गांव में जन्म. आईआईटी कानपुर से बीटेक, एमटेक एवं पी-एच.डी. की डिग्रियाँ हासिल कीं. टीसीएस में सिस्टम्स इंजीनियर रहे. फिर भारत सरकार के तत्कालीन इलैक्टॉनिक्स विभाग, राष्ट्रीय सूचना केन्द्र और इंफोर्मेशन टैक्नोलॉजी विभाग में विविध पदों पर रहते हुए 1990 में ""च्र्क़्क्ष्ख्र् : भारतीय भाषाओं के लिए तकनीकी विकास'' मिशन कार्यक्रम शुरू किया. विश्व भारतऋद्यड्डत्थ् त्रैमासिक पत्रिका के संस्थापक संपादक रहे. ॠएज्-क्ष्क्ष्क्ष्च्र्ग् ग्वालियर के निदेशक एवं जापान में भारतीय दूतावास में विज्ञान सलाहकार भी रहे हैं. अनेकों पुरस्कार मिले जिनमें प्रमुख हैं : उत्तरप्रदेश विज्ञान भूषण, इंदिरा गांधी राजभाषा, विज्ञान शिरोमणि, वास्विक औद्योगिक शोध पुरस्कार तथा वि·ा हिंदी सम्मान. संप्रति : एन.आई.टी. कुरुक्षेत्र में मेंटर प्रोफेसर-एमेरिटस हैं।


शोध समझ में आए तो नवाचार बढ़ जाए
स्वतंत्र भारत में चर्चा होती आ रही है कि जन-जन में वैज्ञानिक दृष्टिकोण और आविष्कारोन्मुखी प्रवृत्ति का संवर्धन हो। विज्ञान और तकनीकी के कई संस्थान खुले। लक्ष्य था कि उद्योग जगत को सुयोग्य जन शक्ति मिले जिससे नवाचारमय उत्पादन हो, लाभ हो, अर्थिक प्र
तकनीकी और भाषा
भाषा की विशद् व्याख्या न कर भारतीय भाषाओं और मुख्यत: हिन्दी के संदर्भ में अपनी बात रखूँगा। भाषा की समझ के लिए लिपि, शब्द और व्याकरण को समझना आवश्यक है। लिपि भेद कई हैं - रैखिक, जटिल, बाएं से दाएं, दाएं से बाएं, ऊपर से नीचे, वर्णात्मक, चित्रात्मक,
चुनौतियों को चीरता भारत विनिर्माण केन्द्र
कृषि, औद्योगिक, सूचना और ज्ञान क्रांतियों ने विश्व के कई देशों की अर्थव्यवस्था और सामाजिक जीवन को बेहतर बनाया। स्वतंत्र देश सजग थे, शिक्षा को बढ़ावा दिया और नवाचार को प्रोत्साहन। औद्योगिक क्रांति ने देशों को विकसित, विकासशील और अविकसित देशों में बा
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