ISSN 2249-5967

 

सुषमा शर्मा

सम्पादक
डॉ. मृदुल कीर्ति
डॉ. मृदुल कीर्ति
आगरा वि·ा विद्यालय से राजनीति विज्ञान में एम.ए. एवं इलाहाबाद से हिंदी में वि¶ाारद। वेदों पर ¶ाोध कार्य और ¶ांकराचार्य के ब्राहृवाद का काव्यात्मक अनुवाद। सामवेद एवं श्रीमद्भगवदगीता का पद्यात्मक अनुवाद। ई¶ा, केन, कठ, प्र¶न, मुण्डक, मांडूक्य, ऐतरेय, तैत्तरीय और ·ोता·ार उपनिषदों का काव्यात्मक अनुवाद। सम्पूर्ण वैदिक यज्ञ के मन्त्र, स्वस्तिवाचन और ¶ाांति प्रकरणं सहित काव्य हरिगीतिका छंद में रूपांतरित। "पतंजलि योग दर्¶ान का काव्यानुवाद' और "अष्टावक्र गीता' प्रका¶िात। संस्कृत साहित्य अकेडमी उत्तरप्रदे¶ा द्वारा सम्मानित। सम्प्रति - अमेरिका में निवास।

कबीर के मायने

जिन शब्दों के पीछे शा·ात सत्य हैं शक्ति और प्रभाव उन्हीं में होता है। वे ही शा·ाती पाकर त्रिकालजयी होते हैं और समय का वह काल खण्ड स्वयं इनके ही नाम हो जाता है।
तैसे ध्यान धरहु जि

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