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डॉ. ममता जैन
डॉ. ममता जैन
एमबीए, पीएचडी। साहित्य सृजन संस्थान, साइप्रस (यूरोप) की संस्थापिका। काव्य संग्रह साइप्रस नहीं लुभाता और सीप के मोती प्रकाशित। विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में रचनाएँ प्रकाशित। अनेक संस्थाओं से सम्मानित। साइप्रस, मिस्र एवं लंदन की सांस्कृतिक सद्भाव यात्राएँ। सम्प्रति - श्री देशना, हिंदी विभाग में सम्पादक।

शूल
मैंने फूलों को भीकाँटों से प्यार करते देखा हैचुपचाप बातें करते देखा हैरात की अमराइयों मेंसोये थे दोनों चुपचापसुबह देखा तो पत्ती-पत्तीबिखरी पड़ी थीमेरी विकलता पर कह रही थीधै
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