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डॉ. जगदीश्वर चतुर्वेदी
डॉ. जगदीश्वर चतुर्वेदी

मथुरा में जन्म। संपूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय, वाराणसी से प्रथमा से आचार्य (सिद्धान्त ज्योतिष) तक उपाधि प्राप्त की। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, नई दिल्ली से एम.ए, एम.फिल तथा पीएचडी करने के बाद हिन्दी विभाग, कलकत्ता विश्वविद्यालय में लेक्चरर नियुक्त। 30 से अधिक पुस्तकें प्रकाशित। साहित्यालोचना और मीडिया का विशेष अध्ययन।


गांधी का पुनर्पाठ
पहला सवाल यह उठता है कि गांधीजी को "सत्याग्रह" की जरूरत क्यों पड़ी? दूसरा सवाल यह कि क्या मौजूदा दौर में "सत्याग्रह" प्रासंगिक है? क्या सत्याग्रह का मौजूदा दौर में मानवाधिकारों की रक्षा और विस्तार के संघर्ष के साथ कोई संबंध है। गांधीजी के "सत्याग्र
प्रमोशन और साहित्य का संकट
सेमीनारों में वक्ताओं के भाषण साधारण पाठक की चेतना से भी निचले स्तर के होते हैं और सेमीनार के बाद सभी लोग एक-दूसरे की पीठ ठोंकते हैं, गैर शिक्षक श्रोता फ्रस्टेट होते हैं, वे मन ही मन धिक्कारते हैं और कहते हैं कि वे सुनने क्यों आए
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