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डॉ. हंसा दीप
डॉ. हंसा दीप

हिन्दी साहित्य में पीएच.डी.। यॉर्क विश्वविद्यालय टोरंटो में हिन्दी कोर्स डायरेक्टर एवं भारतीय विश्वविद्यालयों में सहायक प्राध्यापक रहीं हैं। उपन्यास "बंद मुट्ठी" व कहानी संग्रह "चश्मे अपने-अपनेे" प्रकाशित। कई कहानियाँ प्रमुख पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित। कैनेडियन विश्वविद्यालयों में हिन्दी छात्रों के लिए अंग्रेज़ी-हिन्दी में पाठ्य-पुस्तकों के कई संस्करण प्रकाशित।


सैद्धांतिकता के पीछे एक व्यावहारिक पहलू  पाठ्यक्रम-पाठन-पठन
विज्ञान में जिस तरह थ्योरी को समझाने के लिये प्रेक्टिकल कक्षाओं की अनिवार्यता तार्किक है वैसे ही शिक्षण संस्थानों से जुड़ी कई सैद्धांतिक संहिताएँ अपने व्यावहारिक पहलुओं के साथ एक नये रूप में उजागर होती हैं। भारत में विक्रम विश्वविद्यालय से शिक्षा प
मुझसे कह कर तो जाते
जीवन में ऐसे क्षण कभी-कभी ही आते हैं जब ऐसी तृप्ति महसूस होती है, बड़ी तृप्ति। छोटी-छोटी तृप्तियों की तो गिनती करना भी संभव नहीं हो पाता जो रोज़ ही महसूस होती हैं। जैसे बढ़िया चाय पीने के बाद के हाव-भाव हों या फिर गुलाबजामुन के मुँह में जाने के बाद श
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