ISSN 2249-5967

 

सुषमा शर्मा

सम्पादक
डॉ. गंगा प्रसाद शर्मा
डॉ. गंगा प्रसाद शर्मा
1 नवम्बर 1962 के सम¶ोर नगर, बहादुर गंज, सीतापुर, उत्तर प्रदे¶ा में जन्म। विगत दो द¶ाकों से साहित्य सृजन में सक्रिय। "दलित साहित्य का स्वरूप विकास और प्रवृत्तियाँ' पुस्तक प्रका¶िात। ¶िारोमणि सम्मान (साहित्य, कला परिषद जालौन) तथा तुलसी सम्मान (मानस स्थली, सूकरखेत, उत्तर प्रदे¶ा) से सम्मानित। सम्प्रति- आचार्य, हिन्दी विभाग, गुआंगदांग अंतर्राष्ट्रीय वि·ाविद्यालय, ग्वान्ग्जाऊ,चीन।

कुछ खोते और कुछ संजोते चीनी गाँव
चीन के गाँवों को घूमने का सौभाग्य अपने साथ ही पढ़ा रहे अंग्रेज़ी के व्याख्याता के सौजन्य से मिला। ये गुआंगदोंग प्रांत से सटे प्रांत के एक गाँव के निवासी थे। साथ उठते-बैठते ये मित्र मेरे आत्मीय होते चले गए। जैसे ही अवसर मिलता साथ ही घूमने निकल जाते।
गुजिश्ता दौर के ऐतिहासिक चरित्र
साहित्यिक दृष्टि से आज हिंदी बहुत समृद्ध है। नाना विधाओं के साहित्य से हिन्दी का रचना संसार जगर-मगर है। कविता की सरिता तो आठवीं-नवीं सदी में ही बह निकली थी। लेकिन गद्य का झरना उन्नीसवीं सदी में आके फूटा। गद्य की विधाओं में सबसे प्रमुख विधा उपन्यास
जल-संकट से मुक्ति की ओर चीन
हवा के बाद जीवन में अगर सबसे अधिक महत्त्व किसी का है तो वह पानी का ही है। ¶ारीर के पांच तत्त्वों में से पृथ्वी के प¶चात् यही तत्त्व है, जिसे आसानी से देखा-जाना और समझा जा सकता है। जीवन को सुरक्षित रखने के लिए इसको ग्रहण करना ही ज़रूरी नही
अखाड़ों में छलकती कुम्भ कथा
कुम्भ और कलश भारतीय संस्कृति के शुभ प्रतीक हैं। संभव है कि कुम्भ मेलों की शुरुआत इन्हीं शुभंकरों के साथ हुई हो। इसीलिए इन्हें कुम्भ कहा जाने लगा हो। इस मेले लगने के स्थान का निर्धारण राशियों की स्थिति पर निर्भर होता है। कुम्भ मेला भी है और प

गुरु गाँव से गुड़गाँवा तक
जब भी बहिन के यहाँ गया हूँ, पालम विहार मोड़ पर खड़े हो-हो कर उँगलियों के बीच करीने से नोटें दबाए आरटीवी के कंडक्टर "गुड़गाँवा-गुड़गाँवा' चिल्लाते हुए मुझे बहुत आकर्षित करते रहे हैं। ये ठेठ भाषा में बात करते हैं। कोई कितना भी तुर्रम खाँ क्यों न हो इनकी
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