ISSN 2249-5967

 

सुषमा शर्मा

सम्पादक
डॉ. दानूता स्ताशिक
डॉ. दानूता स्ताशिक

पोलैंड की राजधानी वारसा में जन्म। 1984 में वारसा विश्वविद्यालय से भारत-विद्या (हिन्दी) में एम.ए., 1990 में साहित्य-शास्त्र में पी.एच-डी. और 2002 में habilitation की उपाधियाँ प्राप्त कीं। 2003 से प्राच्य-विद्या विभाग के दक्षिण-एशिया की अध्यक्षा। हिन्दी साहित्य में प्रवासी भारतीयों के जीवन पर शोध-कार्य, इससे संबंधित अँग्रेज़ी में Out of India, Image of the West in Hindi Literature(1994) तथा राम-साहित्य पर The Infinite Story. The Past and Present of the Ramayanas in Hindi (2009) किताब प्रकाशित। प्रख्यात कवियों अज्ञेय, कुँवर नारायण, अशोक वाजपेयी तथा मंगलेश डबराल की कविताओं का पोलिश में अनुवाद। सम्प्रति - वारसा विश्वविद्यालय के दक्षिण एशिया विभाग में हिन्दी भाषा और साहित्य की प्रोफ़ेसर।


तुलसीदास के पूर्व हिंदी साहित्य में रामायण परम्परा का उद्भव
कुछ लेखक इस बात पर ज़ोर देते हैं कि सबसे प्राचीन रामकथा हिंदी साहित्य जितनी ही प्राचीन है। इस बात के पक्ष में वे चंद या चंदबरदाई द्वारा रचित "पृथ्वीराज रासो" का हवाला देते हैं। राम-चरित की यह कथा काव्य
गवाही और जिजीविषा का कवि
हिंदी जगत में कुँवर नारायण का परिचय कराने की आवश्यकता नहीं। वे तो हिंदी कविता के एक महत्त्वपूर्ण हस्ताक्षर हैं, उनको दुनिया की अनेक भाषाओं में अनूदित किया गया है, भारत और विदेशों में उत्कृष्ट पुरस्कार
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