ISSN 2249-5967

 

सुषमा शर्मा

सम्पादक
डॉ. आरती लोकेश
डॉ. आरती लोकेश

1 जून 1970 को गाजियाबाद जन्म। बीएड, अंग्रेज़ी साहित्य में एम.ए., हिंदी साहित्य में स्वर्ण पदक के साथ स्नातकोत्तर तथा पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। विगत दो दशकों से अध्यापन से जुड़ी हैं। उपन्यास रोशनी का पहरा, कारागार तथा शोध-ग्रंथ रघुवीर सहाय के गद्य में सामाजिक चेतना प्रकाशित। खाड़ी देशों की पत्रिका फ़्राइडेे के अलावा अन्य पत्र-पत्रिकाओं में रचनाएँ प्रकाशित। सोशल मीडिया के विभिन्न मंचों पर भी सक्रिय हैं।


वर्तनी : भ्रम व्याप्ति
कहावत तो बहुत पुरानी है- "अपनी-अपनी ढफली, अपना-अपना राग", जो आज के समय में बड़ी ही सटीक और उपयुक्त है। आज जब सब मनुष्य केवल अपनी-अपनी कहना चाहते हैं, सुनने में किसी की रुचि बची ही नहीं। ऐसे में किसी की
आकार
आज अल्पना बहुत खुश थी। उसकी छोटी-सी बेटी आदिका आज स्कूल से निकल कॉलेज में प्रवेश करने वाली थी। वह छोटी फुदकती चिरैया-सी कब उसकी हथेलियों से निकलकर खुले आसमान में कोमल पंख पसारे उड़ने लगी, उसे पता ही न
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