ISSN 2249-5967

 

सुषमा शर्मा

सम्पादक
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यारों का यार, बड़ा दिलदार
वे दिल्ली में उसी कॉलोनी में रहते थे, जहाँ मैं रहती थी। उन्होंने बहुत चाहा कि मैं भी उनकी भीड़ का हिस्सा बनूँ, शायद इसलिए कि उनके इर्द-गिर्द जो भी लोग थे, वे उन्हें कम लगते थे। उनके चौखटे में हर कोई फ़िट हो सकता था। लेकिन तब तक मैं ...
अमीर आग़ा कज़लबाश उर्दू का बेहतरीन शायर
मेरी एक फास्ट फ्रेंड हुआ करती थी। गज़ब की सुन्दरी थी। वह रेडियो में नौकरी करती थी। जब मुझे रेडियो में कॉन्ट्रैक्ट पर काम मिला था, तभी इस सखी को भी कॉन्ट्रैक्ट पर काम मिला था। फिर यह वहाँ स्थायी हो गई और मैं उसी मंत्रालय के अन्य विभाग में स्थायी नौक...
एक भड़भड़े लेखक की भड़भड़ी दास्तान
समय : जुलाई, 1986। स्थान : प्रेस क्लब ऑफ बॉम्बे। देवेश ठाकुर से शाम पाँच बजे मिलने का तय हुआ था। डॉ. दशरथ सिंह भी आने वाले थे। मैं जब प्रेस क्लब पहुंची तो शाम के सात बज रहे थे, लेकिन पूरा यकीन था कि दोनों लेखक बंधुओं से मुलाक़ात अवश्य हो जाएगी। साह...
कमलेश्वर की गंगा और लोगों के स्नान
कमलेश्वर जी ने जब "गंगा" पत्रिका के सम्पादन का भार सम्भाला तो उन्होंने पत्रिका में लोगों की जम के धुलाई की तथा उसे नाम दिया, "गंगा स्नान"। उन्होंने जुलाई, "86 में "मित्र प्रकाशन" के मालिक को गंगा स्नान कराया था, जिस पुण्य के प्रसाद स्वरूप "मित्र प...
गगन गिल छोटी उम्र की बड़ी लड़की
ऐसे दोस्तों पर कौन ना मर जाए खुदा। सच है, मैं यादों की गलियों से गुज़र रही हूँ। मेरी एक मित्र है, बड़ी गहरी और अनोखी मित्र। कवियित्री, चिन्तक, दार्शनिक। उसके और मेरे बीच उम्र का अच्छा-खासा फ़ासला है। वह मेरे और मेरे पुत्र के बीच में है यानि जितने साल...
उर्दू ज़ुबान का हिन्दी लेखक
शानी, जिनका असली नाम गुलशेर खां शानी था, उन कुछ चुनिंदा मुस्लिम लेखकों में से एक थे, जिन्होंने उर्दू की बजाय हिन्दी भाषा को अपने लेखन का माध्यम बनाया। वे अपने समकालीन साहित्यकारों में आदर के साथ जाने जाते थे। वे कई वर्ष मध्यप्रदेश साहित्य परिषद, भ...
रजनी पणिकर महिलाओं की मसीहा
सुप्रसिद्ध लेखिका रजनी पणिकर जी रेडियो में उच्च पदाधिकारी थीं। उन्होंने मुझ छोटी-सी को बड़े अवसर दिए।सबसे पहले मैंने उन्हें एक इंटरव्यू बोर्ड में देखा था। तब मैं उन्हें पहचानती नहीं थी। आकाशवाणी, दिल्ली के परिवार नियोजन विभाग में स्क्रिप्ट रा...
मनोहर श्याम जोशी कहानियों के नेपथ्य की कहानियाँ
लिखना (लेखन) वह जो सिर्फ पढ़ा न जाए, देखा- सुना भी जाए - वाह, मनोहर श्याम जोशी जी ने कितनी सुन्दर बात कही है। उनके इस विचार की व्याख्या मैंने ऐसे की कि लिखो तो बस जैसे चित्र खींच कर रख दो, जो पढ़ने वाले की आँखों के सामने चलचित्र की भाँति घूम जाए, शब...
रमेश बक्षी उसे लेखक होने ने मारा (इस लेख में रमेश बक्षी के लेखन का लेखा-जोखा नहीं है, बल्कि यह एक व्यक्तिगत दस्तावेज़ है।)
28-29 मार्च, "92 को केंद्रीय हिन्दी निदेशालय द्वारा "साहित्यिक पत्रकारिता : अस्तित्व का संकट" विषय पर आयोजित गोष्ठियों में एकदम सूख कर काँटा हुए रमेश बक्षी को देखते ही लगा था कि उनके कदम महाप्रयाण पथ पर बढ़ चुके हैं और उनका शरीर धीरे-धीरे घट कर शून...
मुखौटों की संस्कृति
कई बार सोचती हूँ, लेखकों का व्यक्तिगत जीवन साफ़-सुथरा क्यों नहीं होता? मान लिया, व्यक्तिगत जीवन में हुए संयोग-दुर्योग उनकी जीवन शैली में असंतुलन ला देते हैं लेकिन विचारों में तो आदर्श हो, चरित्र में तो उच्चता हो। मैं भी लेखक हूँ, मेरा जीवन भी काफ़ी ...
ड्रिंक-कथा उर्फ सुरूर नॉन एंडिंग
प ढ़ा-लिखा व्यक्ति यदि शराब पीता हो तो उसे लोग "बेवड़ा" या "दारूकुट्टा" नहीं कहते हैं। उसके लिये कहा जाता है कि फलां व्यक्ति थोड़ी-बहुत शराब पी लेता है। दुबेजी के साथ भी यही था। सुबह उठने से रात बिस्तर या फिर फर्श या ओटले पर कहीं भी लुढ़कन...
मौके मिल ही जाते हैं
समय कब पंख लगाकर उड़ जाता है, पता भी नहीं चलता। धीरे-धीरे कब एक चुलबुली लड़की से प्रौढ़ा की ओर कदम बढ़ चले अहसास ही नहीं हुआ। आज अतीत में झाँकने पर कितनी बातें परत-दर-परत खुलती चली जाती हैं। एक भोली-सी उन्नीस साल की लड़की, जिसकी किसी बात में गहराई नहीं...
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