ISSN 2249-5967

 

सुषमा शर्मा

सम्पादक
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गगन गिल छोटी उम्र की बड़ी लड़की

ऐसे दोस्तों पर कौन ना मर जाए खुदा। सच है, मैं यादों की गलियों से गुज़र रही हूँ। मेरी एक मित्र है, बड़ी गहरी और अनोखी मित्र। कवियित्री, चिन्तक, दार्शनिक। उसके और मेरे बीच उम्र का अच्छा-खासा फ़ासला है।

उर्दू ज़ुबान का हिन्दी लेखक

शानी, जिनका असली नाम गुलशेर खां शानी था, उन कुछ चुनिंदा मुस्लिम लेखकों में से एक थे, जिन्होंने उर्दू की बजाय हिन्दी भाषा को अपने लेखन का माध्यम बनाया। वे अपने समकालीन साहित्यकारों में आदर के साथ जा

रजनी पणिकर महिलाओं की मसीहा

सुप्रसिद्ध लेखिका रजनी पणिकर जी रेडियो में उच्च पदाधिकारी थीं। उन्होंने मुझ छोटी-सी को बड़े अवसर दिए।
सबसे पहले मैंने उन्हें एक इंटरव्यू बोर्ड में देखा था। तब मैं उन्हें पहचानती नहीं थी। आकाशवा

मनोहर श्याम जोशी कहानियों के नेपथ्य की कहानियाँ

लिखना (लेखन) वह जो सिर्फ पढ़ा न जाए, देखा- सुना भी जाए - वाह, मनोहर श्याम जोशी जी ने कितनी सुन्दर बात कही है। उनके इस विचार की व्याख्या मैंने ऐसे की कि लिखो तो बस जैसे चित्र खींच कर रख दो, जो पढ़ने व

रमेश बक्षी उसे लेखक होने ने मारा (इस लेख में रमेश बक्षी के लेखन का लेखा-जोखा नहीं है, बल्कि यह एक व्यक्तिगत दस्तावेज़ है।)

28-29 मार्च, "92 को केंद्रीय हिन्दी निदेशालय द्वारा "साहित्यिक पत्रकारिता : अस्तित्व का संकट" विषय पर आयोजित गोष्ठियों में एकदम सूख कर काँटा हुए रमेश बक्षी को देखते ही लगा था कि उनके कदम महाप्रयाण

मुखौटों की संस्कृति

कई बार सोचती हूँ, लेखकों का व्यक्तिगत जीवन साफ़-सुथरा क्यों नहीं होता? मान लिया, व्यक्तिगत जीवन में हुए संयोग-दुर्योग उनकी जीवन शैली में असंतुलन ला देते हैं लेकिन विचारों में तो आदर्श हो, चरित्र में

ड्रिंक-कथा उर्फ सुरूर नॉन एंडिंग

प ढ़ा-लिखा व्यक्ति यदि शराब पीता हो तो उसे लोग
"बेवड़ा" या "दारूकुट्टा" नहीं कहते हैं। उसके लिये कहा
जाता है कि फलां व्यक्ति थोड़ी-बहुत शराब पी लेता है। दुबेजी के साथ भी यही था। सुबह उठने

मौके मिल ही जाते हैं

समय कब पंख लगाकर उड़ जाता है, पता भी नहीं चलता। धीरे-धीरे कब एक चुलबुली लड़की से प्रौढ़ा की ओर कदम बढ़ चले अहसास ही नहीं हुआ। आज अतीत में झाँकने पर कितनी बातें परत-दर-परत खुलती चली जाती हैं। एक भोली-सी

रोजनदारी की बातें

मई 6, 2000
आज जीवन का एक नया अध्याय शुरू होने जा रहा है। दोनों छोटे बच्चों के साथ हम मिशीगन आ गये हैं। इनको यहाँ एक कम्पनी में काम मिल गया है और मैं अपनी नौकरी छोड़ कर, सब के उज्ज्वल भविष्य का

जबकि जीवन इसकी इजाज़त नहीं देता था

2008 के दिनों में रहते हुए कुछ शब्द: कुछ नोट्स

- एक -
कई बार कोई तुम्हारी सहायता नहीं कर पाता। न स्मृति, न भविष्य की कल्पना और न ही खिड़की से दिखता दृश्य। न बारिश और न ही तारों भरी रात

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