ISSN 2249-5967

 

सुषमा शर्मा

सम्पादक
ध्यान की बहुआयामी छटाए
01-Mar-2016 12:00 AM 3036     

ध्यान, योग, आध्यात्मिकता, इन सबके बारे में सुनना, देखना, पढ़ना, लगभग हर दूसरे तीसरे दिन हो जाता है, पर इसका व्यक्तिगत अनुभव करने का अभी तक मौका नहीं मिला था। लेकिन हाल ही में मेरे छोटे भाई-भाभी, जो वाशिंगटन डीसी में रहते हैं, ने अपनी सालभर की बेटी के साथ सहज योग का दो दिन का शिविर अटेंड किया तो मुझे इसके बारे में विस्तार से जानने का अवसर मिला।
इस शिविर का हिस्सा बनने के दौरान उन्होंने जिस तरह स्वयं में सकारात्मक ऊर्जा महसूस की, उनके लिये वह अलग ही तरह का अनुभव था। सरल शब्दों का प्रयोग करते हुए कहा जाये तो वे इस अनुभव से रोमांचित थे और सालभर के अपने बच्चे में भी उन्हें योग के जरिये एकाग्रता प्रतिबिम्बित होती प्रतीत हुई।
प्रश्न उठना लाजिमी है कि जब छोटा-सा बच्चा योग शिविर का हिस्सा हो सकता है तो हम लोग रोजाना कुछ वक्त योग जैसी सनातन भारतीय परम्परा को अंगीकार करने के लिये क्यों नहीं निकाल सकते। आधुनिक जीवन शैली में अलग-अलग तरह की नयी चीज़ों ने अपने लिये जगह बनाकर हमारा जीवन जटिल बना दिया है। इसकी वजह से लोगों का बरताव सहजता से दूर होता जा रहा है। सभी तरक्की की दौड़ में अनेक लक्ष्यों को एक साथ पाने की कोशिश में अलग-अलग दिशाओं में दौड़ रहे हैं। जिसका परिणाम शारीरिक और मानसिक व्याधियों के तौर पर लोगों के समक्ष उपस्थित हो रहा है।
ऐसे समय में जब हमारे जीवन में इलेक्ट्रॉनिक्स की भारी भीड़ जुटती चली जा रही है, शारीरिक एवं मानसिक व्यायाम की अत्यंत आवश्यकता है। योग और ध्यान की भारतीय पद्धति इस आवश्यकता को पूरा करने में समक्ष हैं। ध्यान की इसी सोच आगे बढ़ाने के मकसद से शिकागो के नेपरविल्ले (ग़्ठ्ठद्रड्ढद्धध्त्थ्थ्ड्ढ) क्षेत्र में चल रहे हार्टफुलनेस संस्थान में जाकर देखने को मिला। यह संस्थान सहज़ मार्ग स्प्रिचुअलटी फाउंडेशन का ही एक हिस्सा है जो की ध्यान से व्यावहारिक समझ, तनाव प्रबंधन, आत्म विकास और आभार की शक्ति को सिखाता है। सहज़ मार्ग (प्राकृतिक पथ), राजयोग (योग ऑफ़ माइंड) का एक रूप है जो की ह्मदय केन्द्रित ध्यान प्रणाली है। सहज़ मार्ग में प्रमुख हैं-  ध्यान, सफाई (क्लीनिंग) और प्रार्थना। और दूसरे शब्दों में सहज मार्ग है प्राकृतिक पथ या सरल तरीका, आध्यात्म में व्यावहारिक प्रशिक्षण की एक प्रणाली।
यह ध्यान पद्धति हजारों बरसों पहले भारत में पैदा हुई और अपनी सार्वभौमिक, धार्मिक या सांस्कृतिक पूर्वाग्रह से परे अब भी निरंतरता के साथ विद्यमान है। ध्यान एक निर्देशित तौर पर स्वयं प्रयास के माध्यम से लोगों को पूरी क्षमता विकसित करने के लिए एक साधन प्रदान करता है जिसका कोई भी व्यक्ति अभ्यास कर सकता है। ध्यान हमारी उतार-चढ़ाव से भरी  रोजमर्रा की जिंदगी को संतुलित करता और इसका निरंतर अभ्यास हमें हमारे भीतर खुद के साथ एक गहरे और स्थायी संबंध महसूस करने के लिए अनुमति देता है और बदले में हमारे जीवन के लिए एक स्थायी दिशा और अर्थ देता है।
हार्टफुलनेस ऑर्गनाईजेशन का यही आधार है। इसमें अनेकों प्रवासी भारतीय स्वयंसेवी के तौर पर काम करते हुए अपनी कम्युनिटी के अलावा दूसरों की भी सेवा कर रहे हैं। इस संस्था में बिना किसी शुल्क के कोई भी व्यक्ति योग और ध्यान का अभ्यास कर सकता है। आर्गेनाईजेशन अनेक तरह के वर्कशॉप, सेमिनार और तरह-तरह के कार्यक्रम आयोजित करता है। हाल ही में संस्थान ने नेचुरल लिविंग की एक सीरिज शुरू की है, जिसमें दिन की सक्रिय और ऊर्जा से भरी शुरूआत कैसे की जाये, इसे सिखाया जाता है। खान-पान के बरताव और तनाव प्रबंधन तथा आभार की शक्ति को भी यहां विस्तार से बताया जाता है।
सेंटर के आर्गेनाइजर संचालक राघवेंद्र से बात करने के बाद तो इन गतिविधियों में शामिल होने की हमारी इच्छा और बलवती हो गई है। राघवेंद्र ने बताया कि भावनात्मक और आध्यात्मिक समझ मानव विकास और सफलता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, जिसको ध्यान में रखकर ही पहला सत्र तैयार किया गया है। जिसमें बहुत से भारतीय शामिल हुए हैं। इसके अलावा दूसरे देशों के लोगों ने भी भागीदारी की है। दूसरी सीरीज मिंडफुल फ़ूड थी, जो कि इस बात पर आधारित थी कि कैसे खाना हमारे सूक्ष्म शरीर को प्रभावित करता है। इस तरह के वर्कशॉप के साथ आर्गेनाईजेशन के नियमित तौर पर साप्ताहिक मासिक प्रोग्राम भी चलते हैं जिसमें बड़ी संख्या में लोग हिस्सा ले रहे हैं और लाभ भी प्राप्त कर रहे हैं।

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