ISSN 2249-5967

 

सुषमा शर्मा

सम्पादक
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समकालीन कविता की संवेदनहीनता
जब समकालीन कविता के रूप-स्वरूप व कलेवर की बात आती है तो चारों तरफ संवेदनहीनता दिखाई देती है और बाजारवाद गर्म दिखाई देता है। मनुष्य के लिए उपस्थित इस संकटकाल में कविता जन आंदोलनों से प्रभावित होकर लोकतंत्रात्मकता की ओर झुकी हुई दिखाई देती है।...
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