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सिनेमा-स्मृति Next
मणि कौल का सिनेमा और हिंदी
मणि कौल की अधिकतर फिल्में हिंदी की साहित्यिक कृतियों पर ही केंद्रित/आधारित हैं। "सतह से उठता आदमी" (मुक्तिबोध) "उसकी रोटी" (मोहन राकेश) और "नौकर की कमीज" (विनोद कुमार शुक्ल) का ध्यान इस सिलसिले में सहज ही हो आता है। फिर "दुविधा" (विजयदान देथा) भी ...
हिंदुस्तानी सिनेमा की बदलती भाषा
हिंदुस्तानी सिनेमा के सफर को देखें तो हमें इसमें अवसर और रंगा-रंगी की बेशुमार झलकियाँ मिलती हैं। जब 1913 में पहली बार दादा साहब ने बिना आवाज के फिल्म "राजा हरिश्चंद्र" बनाई थी तो उन्हें उस वक्त यह गुमान भी न होगा कि अगले सौ सालों में हिंदुस्तानी स...
प्रतीक्षा है बच्चों के सिनेमा की
नौसाल का एक भाई अपनी सात साल की बहन की चप्पल बाजार में खो देता है, जब वह उसे मरम्मत करवाकर लौट रहा होता है। ढूँढने की अनथक कोशिश कर अंततः उदास, सहमा भाई घर लौटता है। उसे अहसास है कि वह टूट चुकी चप्पल उसकी बहन के लिए कितनी जरूरी थी, क्योंकि उसके पि...
सामाजिक सरोकारों से हटता सिनेमा
हमारे जीवन में फिल्मों का अहम स्थान है। मुझे लगता है कि मेरा बचपन सिनेमा नाम की चिड़िया को चौदह साल की आयु में ठीक-ठाक तरीके से जान पाया होगा। इससे पहले बचपन में कभी-कभार सरकारी योजनाओं के प्रचार-प्रसार के लिए गाँवों में भारत सरकार का फिल्म प्रभाग ...
भारतीय सिनेमा के एक सौ चार वर्ष
भारतीय सिनेमा की बात की शुरूआत इस सूचना से करना चाहूंगा कि लंदन फिल्म संस्कृति के केंद्र, ब्रिटिश फिल्म इंस्टिट्यूट (बीएफआई) सॉउथबैंक में, इस वर्ष भारत की हिंदी फिल्मों पर विशेष कार्यक्रम आयोजित किये जा रहे हैं। इस अवसर पर साउथ एशियन सिनेमा फ़ाउन्ड...
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