ISSN 2249-5967

 

सुषमा शर्मा

सम्पादक
चिन्तन Next
मैं केहि कहौं बिपति अति भारी
मैं केहि कहौं बिपति अति भारी

ईश्वर का धाम शरीर ही है, जो सबको मिलता है। जिसमें रूप, रस, गन्ध, स्पर्श और शब्द होकर वह सकल संसार में व्यापा है। शरीरों में हृदय ही उसका भवन है। प्रभु के घर में काम, क्रोध और लोभ घुस आये हैं। महाकव ...

01-May-2018 06:19 PM 144
अव्दैत का विस्तार और संसार
अव्दैत का विस्तार और संसार

कभी विकल होकर कहने का मन होता है कि अव्दैत की धारणा कुछ विरले ज्ञानियों की जिद है और संसार को देखकर लगता है कि वह व्दैत में ही जीने की जिद बांधे हुए है।
कोई उत्प्रेरक जरूर है जिसके कारण इतना ब ...

01-Apr-2018 03:27 AM 246
प्रकृति, ईश्वर और मनुष्य
प्रकृति, ईश्वर और मनुष्य

प्रकृति ने विधाता को प्रणाम किया, "पिता, यह किस साज में सजाया मुझे? यह विन्यास, यह परतों में गूँथा संगठन, यह सुर, छन्द, लय और ध्वनि! विविधता तथा वैचित्र्य का मनोहारी सौन्दर्य; पर साथ ही कण-कण पर, ब ...

01-Apr-2016 12:00 AM 1108
प्रकृति, ईश्वर और मनुष्य
प्रकृति, ईश्वर और मनुष्य

प्रकृति ने विधाता को प्रणाम किया, "पिता, यह किस साज में सजाया मुझे? यह विन्यास, यह परतों में गूँथा संगठन, यह सुर, छन्द, लय और ध्वनि! विविधता तथा वैचित्र्य का मनोहारी सौन्दर्य; पर साथ ही कण-कण पर, ब ...

01-Apr-2016 12:00 AM 1108
QUICKENQUIRY
Related & Similar Links
Copyright © 2016 - All Rights Reserved - Garbhanal - Version 10.00 Yellow Loop SysNano Infotech Structured Data Test ^