ISSN 2249-5967

 

सुषमा शर्मा

सम्पादक
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प्रकृति, ईश्वर और मनुष्य
प्रकृति, ईश्वर और मनुष्य

प्रकृति ने विधाता को प्रणाम किया, "पिता, यह किस साज में सजाया मुझे? यह विन्यास, यह परतों में गूँथा संगठन, यह सुर, छन्द, लय और ध्वनि! विविधता तथा वैचित्र्य का मनोहारी सौन्दर्य; पर साथ ही कण-कण पर, ब ...

01-Apr-2016 12:00 AM 619
प्रकृति, ईश्वर और मनुष्य
प्रकृति, ईश्वर और मनुष्य

प्रकृति ने विधाता को प्रणाम किया, "पिता, यह किस साज में सजाया मुझे? यह विन्यास, यह परतों में गूँथा संगठन, यह सुर, छन्द, लय और ध्वनि! विविधता तथा वैचित्र्य का मनोहारी सौन्दर्य; पर साथ ही कण-कण पर, ब ...

01-Apr-2016 12:00 AM 619
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