ISSN 2249-5967

 

सुषमा शर्मा

सम्पादक
चीन के गाँव
02-Jun-2017 02:46 AM 2941     

चीन में उस तरह की समस्या सबसे बड़ी है जो गाँव के बारे में है, यह स्थिति बहुत लंबे समय से पहले शुरू हुई। कुछ लोग शायद पूछना चाहते हैं कि ऐसा क्यों? सच में, भारत के समान, चीन में अधिकतर ज़मीन कृषि के लायक है। इस तरह के भौगोलिक वातावरण के कारण चीन में कृषि पूरे देश की  अर्थव्यवस्था का आधार है। बोने के काम के लिए आदमियों की ज़रूरत है, इसलिए इतिहास में ऐसा युग था जब लगभग सब निवासी किसान थे। हालांकि इस स्थिति में बहुत परिवर्तन हुए, लेकिन किसानों की संख्या आज भी अधिक है। चीनी सरकार कृषि, गाँव, किसान की स्थिति का पूरा ब्यौरा नज़र में रखती है।
हर बार नये साल के शुरू होते ही चीनी सरकार कृषि और गाँव के बारे में नये क़ानूनी फ़रमान जारी करती है। भिन्न सालों के क़ानूनों में अंतर बड़ा है। जैसे 2016 की नीति में ऐसा लिखा जाता है कि सरकार सामाजिक पूँजीपति को गाँव में सिंचाई व्यवस्था बनाने के लिए प्रोत्साहन देती है, जिनेटिकली माडीफाइड तकनीक को फैलाती है और खाने की सुरक्षा पर ध्यान रखती है। इस के अलावा, गाँवों के पर्यटन के विकास में ज़्यादा पैसे देने की ज़रूरत है, ताकि ज़्यादा से ज़्यादा पर्यटकों को लुभाया जा सकता है। फिर जब 2017 आया तो कुछ नये विषय हमारी नज़र में आये। जैसे किसानों को कृषि का पेशेवर ज्ञान सिखाया जायेगा ताकि वे किसानी के कामकाज में ज़्यादा कुशल बनेंगे और कृषि भी वैज्ञानिक व व्यवस्थित बनेगी। ये हैं सालाना सरकारी नीतियाँ जिनमें हम देख सकते हैं कि चीन सचमुच गाँव, किसान और कृषि को महत्वपूर्ण समझता है।
यह स्पष्ट है कि आधुनिकता के कारण चीन के गाँव बहुत बदल गये हैं- तकनीक, वृत्ति, लोगों का जीवन आदि। प्रौद्योगिकी की दृष्टि से, जुताई के आजौर ज़्यादा अच्छे बन रहे हैं। सब से पहले लोग हल का प्रयोग करते थे, जिनके लिए गाय का बड़ा महत्व था। उस समय कृषि बहुत आसानी से खराब मौसम से प्रभावित थी। फिर उन्नत तकनीक और बोने की नयी व्यवस्था का आविष्कार हुआ। इस के कारण चीन में फ़सल की संख्या बढ़ गयी। आज चीन दूसरे देशों को अनाज का निर्यात कर सकता है।
18वीं सदी में संसार में औद्योगिक क्रांति शुरू हुई, जिससे प्रभावित होकर चीन की कृषि में किसान मशीन का प्रयोग करने लगे। लेकिन यह बहुत बाद में हुआ। पहले चीन के गाँव में सामंतवादी सामाजिक व्यवस्था थी। वर्तमान शासन व्यवस्था ने सामंती के अवशेषों को ख़त्म करके गाँव में नयी व्यवस्था और आधुनिक खेतीबारी की तकनीक को फैलाया। आज चीन में लगभग हर जगह के किसान खेती में बड़े यंत्रों का युक्तिसंगत प्रयोग करते हैं। ऐसी स्थिति मशीन निर्माण उद्योग के साथ घनष्ठि संबंध कायम रखती है। आज चीन गेहूँ, अनाज आदि फ़सल की पैदावार में दुनिया भर में पहले नंबर पर है।
लेकिन हम सब जानते हैं कि कृषि में सिर्फ़ उत्पादनों की मात्रा पर ध्यान रखना ग़लत है। सन् 1949 में नया चीन स्थापित हुआ। इसके बाद एक अंधकार का युग आया। जब देश के शासक गाँव के हाल को भूल से समझते थे। उन्होंने तय किया कि चीन के सब किसानों को ज़्यादा मेहनत से खेती का काम करने देंगे, ताकि पैदावार चरमबिन्दु पर पहुँचेगी। उन्हें विश्वास था कि इस प्रकार चीन बहुत जल्दी पश्चिमी विकसित देशों से आगे होगा।
मगर शासन के इस झूठे विचार से कृषि और गाँव को बड़ा नुक़सान पहुँचा। सब से पहले अनाज का उत्पादन बढ़ गया, लेकिन बिना कोई विश्राम खेती कम उपजाऊ बन गयी। इस का परिणाम था कई सालों के बाद पैदावार अचानक घटने लगी, फिर पूरे देश में बोने के लायक किसी एक काबिलेकाश्त भूमि भी नहीं मिली। भयानक अकाल से अनगिनत लोग मर गये, चीन की अर्थव्यवस्था भी ख़राब हो गयी। अंत में शासन ने अपनी ग़लती की पहचान की, उन्होंने इसे सुधारने के लिए पहले की नीति को खत्म किया और आर्थिक फ़ार्मूला में फेरबदल किया। देश की कृषि और गाँव की स्थिति धीरे धीरे ठीक हो गयी।
यह बात चीन के इतिहास में मोड़ साबित हुई। इस के बाद लोग समझने लगे कि कृषि की नीति बनाने से पहले ज़रूर सत्य की पहचान करना चाहिये। और खेती के काम का महत्वपूर्ण कथन है, जो राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था से संबंधित है। यदि इस में कोई समस्या हुई, तो पूरा देश इससे प्रभावित होगा। इस के अलावा, एक देश के लिए जनता का सुखमय जीवन सब से महत्वपूर्ण है, जिस के बिना पूरे देश का विकास असंभव होगा।
गाँव के रीति-रिवाजों पर भी आधुनिकता के कारण बदलाव आया। पुराने चीन में सामंतवादी व्यवस्था के मारे सती प्रथा, जाति प्रथा आदि हर जगह पर मिलती थी। इन में से लैंगिक भेदभाव शायद सब से स्पष्ट था, क्योंकि गाँव में ऐसा माना जाता था कि लड़के खेती के लिए उचित थे, पर लड़कियाँ थोड़ी शक्ति के मारे कोई काम नहीं कर सकतीं। इसलिए बहुत लंबे समय में लोग लड़कियों और महिलाओं को अनादर करते थे। पुरुषों ने पत्नी के लिए कई परिवारिक नैतिक मानदंड को बनाया, जैसे महिला को हर बात पर पति की बात सुननी चाहिये या उसे अपने बेटे के ख़िलाफ़ नहीं होना चाहिये। कुछ गाँवों में ऐसा होता था कि जब किसी परिवार में एक लड़की पैदा हुई, तो उसके माता-पिता उसे तुरंत उसे मार डालते थे। यह सचमुच भयानक बात थी। आधुनिक समय में गाँव में पुराने रीति-रिवाज बहुत कम हो गये, फिर भी लैंगिक भेदभाव की वृत्ति कुछ ग्रामवासियों के मन में होती है। हाँ, यह ऐसी समस्या है जिस के संभालने में हज़ारों साल लगते है, इसीलिए अतीत में पूर्वजों ने बड़ी कोशिश की और भविष्य में हम भी इसे ख़त्म करने का साहस करेंगे।
आजकल चीन के गाँव में महतो सब से उच्च स्थान पर होते हैं। उन पर  बहुत ज़िम्मेदारियां होती हैं। वे चीनी शासन की नीतियों को गाँव में फैलाते हैं। गांववालों को देश के क़ानून पढ़ाना भी उनका कार्य है। दूसरा, वे पूरे गाँव के शैक्षिक कामों का प्रबंध भी करते है। न सिर्फ बच्चों के लिए प्राथमिक विद्यालय और माध्यमिक पाठशाला बनवाते हैं, बल्कि बालिग़ होने तक शिक्षा पर ध्यान रखते हैं। इस के अलावा, महतो को ग्रामवासियों को कृषि के ज्ञान को सिखाने की भी जिम्मेदारी रहती है। वे अपने गाँव की अर्थव्यवस्था, खेती का काम, सांस्कृतिक कार्यक्रम का प्रबंध करते हैं। जब किसी परिवार में सदस्यों के बीच झगड़ा होता है तो गाँव का मुखिया इसे संभालने के लिए ज़िम्मेदारी हैं। तो यह स्पष्ट है कि गाँव में लगभग सब काम महतो के नेतृत्व के नीचे चलते हैं। यह स्थिति देखकर कुछ लोग शायद पूछना चाहते हैं कि यदि महतो कोई ग़लती करे तो कैसे संभालेगा? या यदि वे अपने लाभ के लिए ग्रामवासियों का शोषण करते हैं तो कौन उनकी आलोचना करेंगे?
ये समस्याएँ बहुत व्यावहारिक हैं और अतीत में बहुत गाँवों में होती थीं। फिर सरकार ने इस स्थिति को देखकर एक नीति बनायी, जिसमें लिखा कि जो लोग महतो को अधीक्षक मानते हैं, वे जन-साधारण हैं। जब लोग मुखिया की किसी ग़लती को देखते हैं, वे सीधे सरकार को बता सकते हैं। सरकार द्वारा महतो को चेतावनी दी जाती है और ज़रूरत पड़ने पर बदलाव किया जाता है।
चीन के गाँवों में महतो पर बहुत ज़िम्मेदार होती है। गाँव के विकास में उनका अहम योगदान होता है। आजकल ज़्यादा से ज़्यादा विश्वविद्यालय के विद्यार्थी स्नातक होने के बाद गाँव में आकर महतो का काम करते हैं। यह सचमुच अच्छी स्थिति है। न सिर्फ़ वे वैज्ञानिक उपाय से गाँव का प्रबंध करते हैं, बल्कि पेशेवर ज्ञान का प्रयोग करके कृषि और खेती के काम के लिए नयी तकनीक अपनाने को प्रेरित करते हैं।
गांवों का एक दूसरा पहलू यह है कि अनगिनत ग्रामवासी भी नौकरी के लिए शहर जाते हैं। उन के शहर जाने के अनेक कारण हैं, जैसे ज़्यादा पैसे मिलने के लिए, ज़्यादा आधुनिक सुख-सुविधा पूर्ण जीवन जीने के लिए आदि। कुछ लोग गाँव से बाहर जाकर शहर में बस गये, ताकि उनके बच्चे शहर में पढ़ सकें और अपना भविष्य बदल सकें।
चीन में ऐसी सरकारी नीति है कि बच्चे जहाँ रहते हैं, उन्हें वहाँ के प्राथमिक स्कूल जाना पड़ता है। मतलब जो बच्चे गाँव में रहते हैं, वे शहर के प्राथमिक स्कूल नहीं जा सकते। इसलिए बहुत से ग्रामवासी बच्चों के भविष्य के लिए शहर में गये।

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