ISSN 2249-5967

 

सुषमा शर्मा

सम्पादक
बचपन के दोस्त
01-Jan-2019 02:01 PM 887     

पर्वत की चोटी से जब
बर्फ पिघलने लगती है
भूली भटकी नन्ही चिड़िया
जब दाना चुगने लगती है
तितली मंडराते देख जब
कलियाँ शर्माने लगती हैं
ओस दमकती फूलों पर
जब पंछी गाना गाते हैं
बचपन के दिन सताते हैं
तब दोस्त पुराने याद आते हैं

जब झरने फूट निकलते हैं
स्वर लहरी गूँज सी जाती है
पगडण्डी पर पैर थमाते ही
जब पाँव फिसलने लगते हैं
यादों के तहखाने से जब
साथी हाथ बढ़ाते हैं

फूल से निखरे साथी
सुगंध से बिखरे दोस्त
पहले नशे की मानिंद
साँसों में जा समाते हैं
तब दोस्त पुराने याद आते हैं

उड़ गए कहाँ कौन से देस
इक पल जो बिछुड़ न पाते थे
रोज़ी-रोटी की ख़ातिर क्यों
दोस्त पुराने रूठ गए
सतरंगे फूलों के मौसम में
बनफ्शे की मस्त बहारों में
तितली भँवरे की महफ़िल में
महकती हवा के आँचल में
खो-खो खेलते, रस्सा कूदते
रसभरियों के झाड़ लूटते
सेब आलूचों से झोली भरते
चील देवदार पर झूला झूलते
मासूम से झगड़े खूब हंसाते हैं
तब दोस्त पुराने याद आते हैं

बेलौस मुहब्बत की रुत थी
वह लौट कभी न आएगी
खूब मनाओ जश्न-ए दोस्ती
यह दोस्ती मिल न पाएगी
यादों के महल सजाओगे
रातों को उठ कर गाओगे
मुरली की मस्त सदाओं में
बिसरे दिन शोर मचाते हैं
तब दोस्त पुराने याद आते हैं।

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