ISSN 2249-5967

 

सुषमा शर्मा

सम्पादक
छत का टपका और चोर
08-Jul-2017 07:46 PM 2104     

बहुत समय पहले की बात है। जापान के कुमामोतो प्रदेश में एक बूढ़ा और बुढ़िया अपने छोटे-से पुराने घर में रहते थे। यह घर बहुत पुराना हो गया था और बरसात के दिनों में तो घर में रहना भी मुश्किल हो जाता था। इस बूढ़े व्यक्ति के पास एक बढ़िया नस्ल का घोड़ा था जिस पर बैठकर कभी-कभी वह गाँव के बाजार में जाता था और घर का सब सामान खरीदकर ले आता था।
इस घोड़े पर एक चोर की नजर थी। वह इसे चुरा, कहीं बेचकर बहुत-सा पैसा कमाना चाहता था, लेकिन उसे इसको चुराने का अवसर नहीं मिल पाता था। गाँव के सभी लोग इस बूढ़े व्यक्ति के घोड़े को पहचानते थे इसलिये चोर को लगता था कि यदि उसने उसे दिन में चुराया तो उसे ले जाते समय सब लोग पहचान लेंगे और वह पकड़ा जा सकता है। इसलिये उसने रात में घोड़ा चुराने का विचार किया, क्योंकि तब गाँव के सब लोग घरों के अंदर होंगे। ऐसा सोच एक दिन शाम होते ही वह चुपचाप घोड़े के अस्तबल की छत पर जाकर छिप गया। मौके की बात थी कि उस समय घोड़ा अस्तबल में नहीं था। वह घास चरने बाहर गया हुआ था इस कारण से उसके पास इंतजार करने के अलावा कोई और चारा न था। वह अस्तबल की छत के बीच में लगी लकड़ी की शहतीर पर चिपककर लेट गया। वह काफी देर तक इंतजार करता रहा लेकिन घोड़ा लौटकर नहीं आया। बाहर मौसम भी ठीक नहीं था। बादल गरज रहे थे और हो सकता था कि जोर की बरसात भी हो जाये। शहतीर पर चिपके-चिपके उसे वहाँ नींद आ गई।
उधर पास के जंगल में ही एक भेड़िया अपनी गुफा में रहता था। बरसात के मौसम के कारण उसे भी भोजन के लाले पड़ गये थे। अत: उसने सोचा कि पास में रहने वाले बूढ़े-बुढ़िया को मारकर बढ़िया भोजन किया जाये। ऐसा सोचकर वह भी उनके घर की ओर चल दिया। उसने देखा कि घर के पीछे का दरवाजा खुला है। असलियत में, यह दरवाजा घोड़े के आने के लिये खुला रखा गया था। भेड़िया बड़े आराम से घर के अंदर आ गया और उस कमरे के दरवाजे के पास जाकर खड़ा हो गया जिसमें बूढ़ा और बुढ़िया रहते थे। वह अभी सोच ही रहा था कि उन पर आक्रमण किया जाये कि तभी उसने सुना की बूढ़ा, बुढ़िया से पूछ रहा था ""इस दुनिया में सबसे खतरनाक और डरावनी चीज क्या है?"" यह सुनते ही भेड़िया वहीं खड़ा का खड़ा रह गया। उसके मन में आया कि यह मजेदार बातचीत सुननी चाहिये।
बुढ़िया ने कहा- ""मैं समझती हूँ कि दुनिया में सबसे डरावनी और खतरनाक चीज तो जंगल का भेड़िया है।""
यह सुनकर भेड़िया घमण्ड से फूलकर कुप्पा हो गया। उसने सोचा- ""काश! जंगल के और जानवरों ने भी यह बात सुनी होती तो कितना मजा आता।""
तभी बाहर बादल गरजने लगे और लगने लगा कि जोर की बारिश होगी। उसकी आवाज सुनकर बूढ़ा कुछ बेचैन हो गया। तब बुढ़िया ने उससे पूछा- ""अब आप भी बताएँ कि दुनिया की सबसे डरावनी और खतरनाक चीज क्या है?""
भेड़िए ने सोचा कि - बूढ़ा भी यही कहेगा कि सबसे डरावनी और खतरनाक चीज तो भेड़िया ही है।
पर उसकी आशा के विपरीत बूढ़ा बोला- ""मेरे लिये तो इस पुराने घर की छत से आने वाला पानी का टपका ही सबसे डरावनी और खतरनाक चीज है।""
भेड़िया यह सुनकर एक झण को सन्न रह गया। यह क्या? मैं तो सोचता था कि मैं सबसे बलवान हूँ। इसलिये सब मुझते डरते हैं। लेकिन यह "छत का टपका" तो मुझसे भी खतरनाक जानवर निकला।
तभी जोर की बारिश होने लगी और बूढ़ा एकदम जोर से चिल्लाने लगा- ""अरे! जल्दी उठो। अब तो टपका आने वाला है।"" यह कहकर वह छत की ओर देखने लगा तथा कमरे में उधर-उधर पड़ी चीजों को उठाने लगा।
भेड़िए की सिट्टी-पिट्टी गुम हो गई। वह समझ ही नहीं पा रहा था कि क्या करे। उसे यह भी डर लगने लगा कि यदि "छत का टपका" आ गया तो कहीं उसे ही न मार डाले।
उधर, ऊपर लेटे हुये चोर की नींद भी बारिश के शोर के कारण खुल गई। उसने सोचा कि अब तक तो घोड़ा आ गया होगा। उसने नीचे की ओर देखा जहाँ भेड़िया खड़ा था। अंधेरे में उसे लगा जैसे नीचे घोड़ा ही खड़ा है। उसने आव देखा न ताव, एकदम ऐसे छलांग लगाई कि वह ठीक भेड़िए की पीठ पर आकर गिरा।
भेड़िया इस अचानक आई स्थिति के लिये तैयार न था। उसने सोचा-हो न हो यह वही खतरनाक "छत का टपका" ही है जिसकी बात वह बूढ़ा कर रहा था। वह डर के कारण एकदम मुड़कर भागने लगा। चोर ने भी उसकी पीठ पर चिपककर उसके बालों को जोर के पकड़ लिया था। चोर भी डरने लगा था। यह कैसा घोड़ा है जो बस अपने-आप दौड़ा जा रहा है, रुकने का नाम ही नहीं ले रहा है। उसने उसे और कसकर पकड़ लिया। इतना कसकर कि भेड़िए को लगा- अब यह "छत का टपका" तो उसे इसी तरह भींचकर, दबाकर मार डालेगा। वह और जोर से भागने लगा। उसे अब सामने अपनी गुफा दिखाई देने लगी। उसकी जान में जान आई। वह अपनी पूरी ताकत लगाकर दौड़ने लगा और सीधे गुफा में घुस गया। गुफा का मुँह छोटा था इसीलिये गुफा के मुँह में भेड़िए के घुसते ही चोर उससे टकराकर बाहर गिर गया और बेहोश हो गया। उधर भेड़िया गुफा के अंदर पहुँचकर बड़ी देर तक हाँफता रहा। उसके मुँह से आवाज ही नहीं निकल रही थी। उसके अन्य साथी जानवर उसके आसपास आकर इकट्ठे हो गये, पर वे सारी बात समझ नहीं पा रहे थे। जब भेड़िए की सांस सामान्य गति पर लौटी तो उसने बताया कि आज वह कैसी भयानक स्थिति से बचकर आया है। उस पर आज "छत का टपका" नाम के भयानक जानवर ने आक्रमण कर दिया था। बड़ी मुश्किल से उसके प्राण बचे हैं।
जल्दी ही यह बात सारे जंगल में फैल गई जिसे सुनकर सारे जानवर हक्के-बक्के रह गये क्योंकि उन्होंने आज तक ऐसे किसी जानवर का नाम भी नहीं सुना था। बन्दर, जो अपने को बहुत चतुर समझता था, सामने आकर बोला- ""लगता है आपको कोई भ्रम हो गया है क्योंकि ऐसा कोई जानवर होता ही नहीं है। मैं तो लोगों की छतों पर रोज ही जाता हूँ। पर मैंने आज तक छत पर रहने वाले किसी जानवर को देखा ही नहीं है।
उसकी बात सुनकर भेड़िए को गुस्सा आ गया- ""तो क्या मैं झूठ बोल रहा हूँ? सच तो यह है कि जिस पर पड़ती है वही जानता है। यदि ऐसी ही बात है बाहर जाकर देखो। क्या पता "छत का टपका" तुम्हें इंतजार करता मिले क्योंकि वह मेरी पीठ पर चढ़कर यहाँ तक आया था।""
बंदर की जान सांसत में आ गई। उसे भी मन ही मन डर लग रहा था बाहर जाने में। क्या पता भेड़िए की बात सच हो। तभी उसने सोचा- पहले बाहर पता कर लेना चाहिये कि कोई है या नहीं। ऐसा सोचकर उसने अपनी पूंछ धीरे-धीरे बाहर निकालनी शुरू की। उन दिनों बंदर की पूंछ काफी मोटी और लम्बी होती थी। जब वह पूंछ बाहर की ओर आई तो चोर के मुँह पर आकर लगी। उसकी सरसराहट से उसकी बेहोशी टूट गई और वह एकदम चौकन्ना हो गया। जब उसने उस पूंछ को देखा तो घोड़े की पूंछ समझकर जोर से खींचने लगा। जैसे ही बंदर को लगा कि कोई पूंछ को बाहर से खींच रहा है तो वह एकदम घबरा गया और डर के मारे चीख-चीख पूंछ को पूरी ताकत से अंदर की ओर खींचने लगा। इस रस्साकशी में बंदर की पूंछ बीच में से पतली होकर टूट गई। पूंछ के टूटते ही दोनों जोर से अपनी-अपनी ओर गिर गये। चोर एक पेड़ से जा टकराया और वहीं मर गया।
दूसरी ओर गुफा के अंदर बंदर सामने से चट्टान में टकराया। चट्टान से टकराने के कारण उसका मुँह एकदम लाल हो गया और उसके चेहरे के बाल भी घिसकर उड़ गये। उसकी पूंछ भी टूटकर छोटी हो गई थी। कहा जाता है कि तभी से बंदर का मुँह लाल, बिना बालों और पूंछ छोटी होती है।

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