ISSN 2249-5967

 

सुषमा शर्मा

सम्पादक
चीनी युवाओं में भारत का आकर्षण
CATEGORY : तथ्य 01-May-2016 12:00 AM 1281
चीनी युवाओं में भारत का आकर्षण

सदियों से चीनी जनमानस के मनोमस्तिष्क में भारत वास करता आया है। भारत और चीन पिछले दो हजार से भी ज्यादा वर्षों से एक-दूसरे की सभ्यता-संस्कृति को प्रभावित करते हुए सम्पूर्ण मानव समाज के उत्थान में अपना महत्वपूर्ण योगदान देते आ रहे हैं। पूर्व में असंख्य भारतीय विद्वानों ने चीन की सफल यात्राएँ की हैं। बहुसंख्य चीनी विद्वानों ने भी अपनी ज्ञान पिपासा मिटाने के लिए भारत की दुर्गम यात्राएँ कीं और सकु¶ाल चीन वापस लौटकर चीनी जनता को भारत के बारे में और ज्यादा जानने के लिए प्रोत्साहित किया, फलस्वरूप चीनी विद्वानों के साथ-साथ चीनी व्यापारी भी भारत जाने के मोह से बच नहीं सके जो कि "रे¶ाम मार्ग' के नाम से वि·ा प्रसिद्ध हुआ। कालांतर में इस रे¶ाम मार्ग ने चीन-भारत सम्बन्ध के बीच एक सेतु का काम किया जिससे लगभग 1000 वर्षों तक भारत चीन के मध्य भौतिक एवं आध्यात्मिक आदान-प्रदान निर्बाध रूप से होता रहा। वर्तमान चीन में भी भारत को और ज्यादा से जानने समझने की लालसा बलवती हुई है वि¶ोषकर चीनी युवाओं में भारत और ज्यादा आकर्षण का विषय बना हुआ है। चाहे भारत का सिनेमा हो या योग या पर्यटन स्थल या भारत की उभरती अर्थव्यवस्था। प्राचीन काल में चीनी लोग भारत को "¶ाी थिएन' संज्ञा से संबोधित करते थे, जिसका अर्थ होता है "प¶िचम का स्वर्ग'। प¶िचम का यह स्वर्ग हमे¶ाा से चीनी विद्वानों, साधारण जन तथा युवाओं के मध्य आकर्षण का केंद्र रहा है।
चीन का युवा वर्ग भारत के सम्बन्ध में दो अतियों में झूल रहा है एक की नज़र में अभी भी भारत स्वर्ग-सा सुन्दर है तो दूसरे के नज़र में नरक। स्वर्ग ऐसा जहाँ हिंसा का स्थान नहीं, कोई योगी है तो कोई महायोगी, किसी में बुद्ध है, कोई प्रबुद्ध है तो कोई स्वयं बुद्ध। दूसरा नरक ऐसा जहाँ पुरुष बलात्कारी हैं तो स्त्रियाँ बलात्कृता। सर्वत्र गरीबी है। भुखमरी है। हर ¶ाहर झुग्गी-झोपड़ियों से अटा पड़ा है। भ्रष्टाचार एवं कामचोरी चरम पर है। स्त्रियों की स्थिति तो बहुत ही दयनीय है। इनके अनुसार भारत मलिनों का दे¶ा है। भारत के प्रति इन लोगों की यह सोच ऐसी क्यों हैं? इसकी गहराई में जाता हूँ तो पाता हूँ कि ये हमारे भारतीय मीडिया का उत्पाद (उत्पात) है जिसे सारी दुनिया बड़े चाव से निगल रही है।
इसके बावजूद चीन में युवाओं का एक बड़ा वर्ग है जो यह मानता है कि चीन और भारत ही दो ऐसे दे¶ा है जिनकी हजारों वर्ष पुरानी अपनी सांस्कृतिक विरासत अब भी विद्यमान है। इस वर्ग को कभी भारत का अध्यात्म लुभाता है तो कभी योग के आसन। कभी भारत का रोमांचकारी सिनेमा इन्हें थिरकने पर मजबूर करता है तो कभी का भारत का मनमोहक स्थापत्य इनका मन मोह लेता है। कभी भारत की सुमधुर भाषा-बोली इनकी कानों में गूंजती है तो कभी भारत की प्रकृति इन्हें अपनी सुरम्य वादियों में विचारने की उत्कंठा पैदा करती है। भारतीय व्यंजनों ने तो जैसे चीनी युवाओं के स्वाद ही चुरा लिए हों। भारत का हर युवा इनको आईटी का वि¶ोषज्ञ नज़र आता है। कुल मिलाकर भारत इनके रातों की नींद चुरा लेता है। हाल के कुछ वर्षों में बहुत सारी चीनी युवतियों ने भारतीयों को अपने सपनों का राजकुमार बनाकर भारत से कभी न टूटने वाला सम्बन्ध बना लिया है, जिन्हें भारत से अपने पति की तरह ही बहुत लगाव है, कुछ चीनी युगलों को भारतीय संस्कारों से इतना प्रेम है कि वे लाखों रुपये खर्च करके प¶िचम के स्वर्ग (भारत) में जाकर सात जन्मों तक न टूटने वाले वैदिक रीति की विवाह संस्कार को अंगीकार कर रहे हैं।
वर्तमान समय में चीनी युवाओं में भारत के प्रति आकर्षण बढ़ाने में हिंदी भाषा का बहुत योगदान है। पूर्व में चीन के गिने-चुने वि·ाविद्यालयों में ही हिंदी ¶िाक्षण पाठ्यक्रम था परन्तु वर्तमान में 10 से ज्यादा वि·ाविद्यालयों में हिंदी भाषा एवं साहित्य की पढ़ाई हो रही है और लगभग इतने ही चीनी वि·ाविद्यालयों में भारत की सभ्यता संस्कृति एवं अर्थव्यस्था पर ¶ाोध केंद्र स्थापित हुए हैं जो चीनी युवाओं को भारत के बारे में ज्यादा से ज्यादा सटीक जानकारी उपलब्ध कराने के साथ-साथ उन्हें रोजगार भी उपलब्ध करा रहे हैं। आज चीन में हिंदी, संस्कृत, बांग्ला, तमिल, गुजराती आदि भाषा एवं साहित्य पर ज्यादा से ज्यादा काम हो रहा है। यहाँ के विद्यार्थी संस्कृत के महाकवि कालिदास के अभिज्ञान¶ााकुन्तलम् से लेकर तुलसीदास, रहीम, कबीर के दोहों को चीनी भाषा रूपी ¶ारबत में घोल के पी चुके है।
चीनी युवाओं को भारत की सबसे ज्यादा आकर्षित करने वाली चीज़ है- योग। वर्तमान में चीन में लगभग 600 से ज्यादा ¶ाहर हैं, लगभग हर ¶ाहर में योग केंद्र है, जहाँ 3 करोड़ से ज्यादा चीनी लोग एक स्वस्थ ¶ारीर और सुन्दर मन की ¶ाुभेच्छा के साथ योग के विभिन्न आसनों का अभ्यास करते हैं जिनमें नवयुवतियों की संख्या सबसे ज्यादा है।  चीन के योग केन्द्रों की संख्या में प्रत्येक वर्ष 30 प्र.¶ा. दर से वृद्धि हो रही है।  
भारत की अर्थव्यवस्था पूर्व में भी चीनी व्यापारियों को आकर्षित करती रही है और वर्तमान में भी चीनी व्यापारी भारत की उभरती हुई नयी अर्थव्यवस्था में अपनी सफल भागीदारी निभा रहे हैं। चीन की प्रसिद्ध मोबाइल कंपनियां ¶याओ मी, लिनिवो, लेटीवी, ओप्पो आदि भारत के बाज़ार में अपना महत्वपूर्ण स्थान बना चुकी है। इन कंपनियों के माध्यम से चीनी युवावर्ग भारत को अपना कार्यस्थल बनाने में नहीं हिचक रहा है। अभी बहुत सारे चीनी युवा भारत के दिल्ली, पटना, बंगलुरु, कलकत्ता, मुम्बई आदि ¶ाहरों में काम कर रहे हैं, जिनमें चीनी लड़कियां भी ¶ाामिल हैं।
भारतीय सिनेमा तो चीनी युवाओं को अपना दीवाना ही बना चुका है। यदि आपको चीन की सड़कों पे कोई हाल ही में प्रदर्¶िात फिल्म आ¶िाकी-2 का गाना गुनगुनाते हुए मिल जाए तो आ¶चर्य नहीं। 2015 की प्रसिद्ध फिल्म "बाहुबली' तो चीन के युवावर्ग के दिलों में अपना स्थान बना ही चुकी है। अब यह फिल्म चीनी भाषा में डब होकर सिनेमाघरों में प्रदर्¶िात होने वाली है। हिंदी धारावाहिक भी वि¶ोषकर चीनी युवतियों में काफी लोकप्रिय हो चुका है, चाहे वो महाभारत हो या फिर देवों के देव महादेव।
आधुनिक चीनी युवावर्ग में हमारा योग, आयुर्वेद, फिल्में और धारावाहिक आकर्षण का केंद्र बन चुके हैं। यही स्थिति रही तो निकट भविष्य में चीन इनका सबसे बड़ा आयातक होगा और भारत सबसे बड़ा निर्यातक।

NEWSFLASH

हिंदी के प्रचार-प्रसार का स्वयंसेवी मिशन। "गर्भनाल" का वितरण निःशुल्क किया जाता है। अनेक मददगारों की तरह आप भी इसे सहयोग करे।

QUICKENQUIRY
Related & Similar Links
Copyright © 2016 - All Rights Reserved - Garbhanal | Yellow Loop | SysNano Infotech | Structured Data Test ^