ISSN 2249-5967

 

सुषमा शर्मा

सम्पादक
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हिन्दी सम्पर्क की भाषा है और रहेगी

भारत से जुड़ा कोई भी व्यक्ति ऐसा नहीं है जो हिंदी से अनभिज्ञ हो। और मैं सिर्फ़ उन शब्दों की बात नहीं कर रहा जो विश्व प्रसिद्ध हैं, जैसे मसाला, पण्डित या गुरू। मैं बात कर रहा हूँ, "दिल माँगे मोर" और "

निर्णायक मोड़ पर सभ्यता

भारत की सभ्यता के "हिमालय" पर आक्रमण करने वाली कोई बाहरी या विदेशी ताकत नहीं, बल्कि यह भारत की अपनी बात है, अंदरूनी बात है और यह अंदरूनी बात बड़ी सशक्त और ताकतवर है। यह इसकी विशेषता भी है और यह उसकी

कुहासे में है धर्म

भारत के सामाजिक जीवन में प्राचीन काल से ही धर्म का विशेष स्थान रहा है। यह कहना अतिशयोक्ति न होगा कि धर्म सामाजिक जीवन का नियामक रहा है। भारतीय संविधान सभी धर्मावलम्बियों को समान मूलभूत अधिकार देता

आधुनिक समय में धर्म और पाखंड

प्रारंभ में आदमी जंगल में रहता। शिकार करता और अपना पेट भरता। ये जंगल का कानून था। समय सबको बदलता है। इस व्यवस्था में बदलाव शुरू हुआ। पहले महिला-पुरूष अकेले थे। इसके बच्चे हुए। इनकी संख्या बढ़ी। धीरे

आचरण और दिखावे का द्वंद्व

भारत के एक क्रांतिकारी साहित्यकार ने कहा था : "सभी धर्म असत्य हैं, मिथ्या हैं, आदिम दिनों के कुसंस्कार हैं; विश्व-मानवता के इतने बड़े शत्रु और कोई नहीं।" तो अवश्य इसका कारण था। कड़वे शब्द होने के बाव

चीनी सिने परंपरा

सिनेमा उन्नीसवीं सदी का एक महत्वपूर्ण चमत्कार है जिसने पूरे विश्व में एक नयी सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक क्रांति लायी। सिनेमा समाज का एक ऐसा दर्पण है जो हमें भूत और वर्तमान का सजीव चित्र तो दिखात

नीदरलैंड के फिल्म महोत्सव और यूरोप

भारत में वालीवुड और विश्व में हॉलीवुड का चकाचौंधी हल्ला है, जिसमें क्राइम, अंडरवल्र्ड के कारनामों और वारदातों के जोखिमों का जोश और शोर, जंग और जश्न का रुतबा दिखायी देता है, जिसमें मनुष्यता के घुटन

सिंगापुर की फ़िल्मी दुनिया

सिंगापुर में ये बात बहुत प्रियकर है कि यदि फ़िल्म अच्छी हो और सही तरह
से मार्केट की गई हो तो मलय, चीनी लोग भी हिंदी फ़िल्में देखने आते हैं।
उदाहरण के लिए दंगल देखने वालों में बहुत-सी संख्या

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