ISSN 2249-5967

 

सुषमा शर्मा

सम्पादक
भारत-चीन व्यापार की सुदृढ़ होती डोर
CATEGORY : विशेष 01-Jan-2016 12:00 AM 1397
भारत-चीन व्यापार की सुदृढ़ होती डोर

वर्तमान में चीन भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक मित्र है और भारत चीन का दसवां सबसे बड़ा व्यापारिक मित्र हैं। भारत-चीन व्यापारिक सम्बन्धों का इतिहास इन दोनों देशों के बीच के सांस्कृतिक संबंधों जितना ही पुराना है। प्राचीन काल का मशहूर रेशम मार्ग यह व्यापारिक मार्ग ही था। रेशम का एक अन्य नाम चीनांशुक भी है जिसका अर्थ है चीन का वस्त्र। आज वस्त्र ही नहीं हमारे दैनिक जीवन की बहुतेरी वस्तुएं चीन हमें निर्यात कर रहा है। भारत और चीन में आधिकारिक तौर पर 1978 में व्यापार शुरू हुआ। 1984 में दोनों पक्षों ने सबसे तरजीही राष्ट्र (एमएफएन) समझौते पर हस्ताक्षर किए और एक-दूसरे को सबसे तरजीही देश माना। 2014 में भारत-चीन के बीच का कुल व्यापार 64 करोड़ अमेरिकन डॉलर था जो 2015 में 100 अरब डॉलर तक पहुँचने का अनुमान है। भारत-चीन के बीच तेजी से बढ़ता द्विपक्षीय व्यापार चीन-भारत मैत्री का सबसे मजबूत स्तंभ होने जा रहा है। यह न केवल दोनों देशों के बीच आपसी राजनीतिक-सांस्कृतिक व्यापारिक सम्बन्ध वि?ाास को एक नयी दिशा देगा, बल्कि एशिया और वि?ा के अर्थव्यस्था में अपना महत्वपूर्ण योगदान देगा। वर्तमान में चीन वि?ा की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यस्था बन गया है और ऐसा अनुमानित है कि अगले कुछ वर्षों में अमेरिका को पछाड़ कर वि?ा की सबसे बड़ी अर्थव्यस्था वाला देश बन जाएगा। भारत भी वि?ा अर्थव्यवस्था में अपना विशेष स्थान बनाए हुए है। इन सब परिस्थितियों के बीच भारत-चीन की व्यापारिक मित्रता ज्यादा महत्वपूर्ण हो गई है। वर्तमान में चीन आने वाले भारतीय व्यापारियों की संख्या बढ़ती जा रही है। वैसे तो पूरा चीन ही भारतीय व्यापारियों का पसंदीदा स्थान बन गया है, लेकिन दक्षिणी चीन के कुआन्ग्चौ शहर (ड़ठ्ठदद्यदृद) में आने वाले भारतीय व्यापारियों की संख्या सबसे ज्यादा है। कुआन्ग्चौ शहर कई कारणों से भारतीयों व्यापारियों के बीच अपना महत्वपूर्ण स्थान बनाये हुए है। वर्तमान में कुआन्ग्चौ में 2000-5000 भारतीय परिवार रहते हैं जबकि पूर्व में ये संख्या 200-300 थी। कुछ ही वर्षों में यह दस गुनी बढ़ी हुई संख्या बताती है कि कुआन्ग्चौ भारतीय व्यापारियों के बीच कितना लोकप्रिय हो रहा है। कुआनग्चौ में दस से ज्यादा भारतीय रेस्टोरेंट हैं जिसमें "शर्माजी' शुद्ध शाकाहारी रेस्टोरेंट भारतीय व्यापारियों के बीच ज्यादा प्रसिद्ध है। कुआन्ग्चौ में भारतीय व्यापारियों की बढ़ती आवाजाही देखकर भारत के यूको बैंक और बैंक ऑफ बड़ौदा ने हाल ही में अपनी शाखाएं खोली हैं। इस शहर का मौसम भी उत्तर भारत के मौसम जैसा रहता है, ना ज्यादा गर्म न ज्यादा ठण्ड। इसके उलट उत्तरी चीन ठण्ड के मौसम में सफ़ेद बर्फ से ढंक जाता है। पारा शून्य से 40 डिग्री तक नीचे चला जाता है जो कि भारतीय व्यापारियों के लिए असहय रहता है। इस प्रकार कुआन्ग्चौ मौसम की दृष्टि से भी भारतीय व्यापारियों का पसंदीदा जगह बना हुआ है। इस शहर में अंग्रेजी बोलने वालों की संख्या भी काफी है, जिससे भारतीय व्यापारियों को व्यापार करने में सुविधा होती है। वर्तमान में कुआन्ग्चौ से प्रतिवर्ष 4 मिलियन डॉलर्स से ज्यादा का व्यापार होता है। विद्युत् उपकरण, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, गणेश और सरस्वती जैसे हिन्दू देवी-देवताओं की मूर्तियाँ आदि जैसे बहुत सारी वस्तुएं समुद्री रास्तों से भारत भेजी जाती हैं। ह्वावेई मोबइल जो चीन और भारत दोनों जगह समान रूप से लोकप्रिय है, प्रतिवर्ष अधिकाधिक संख्या में कुआन्ग्चौ से ही भारत भेजा जाता है। यह सुखद संयोग है कि मोदी सरकार के आने बाद से चीन में भारतीय कंपनियों की संख्या उसी अनुपात में बढ़ रही है जिस अनुपात में भारत में चीनी कंपनियों की। आज यह स्थिति है कि हम चीन में रहते हुए इस बात पर गर्व कर सकते हैं कि अब शायद ही कोई ऐसा बड़ा शहर बचा हो जहाँ भारतीय कंपनी न हो ।

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