ISSN 2249-5967

 

सुषमा शर्मा

सम्पादक
बहुत हुई
01-May-2016 12:00 AM 1959     

अँधेरों की वो जद्दोजहद

बहुत हुई अँधेरों की वो जद्दोजहद
चलो आज सितारों की बात करते हैं
चाँद के साथ उन सितारों की छाँव तले
चलो आज चाँदनी में नहा आते हैं
लव्ज़ों की गुम¶ाुदी की और क्या बात करें
चलों वृन्दों के साथ आज चहचहाते हैं
खुद ही की जो मुस्कान खो दी है मैंने
चलो आज किसी और को हँसना सिखाते हैं
गुलों से ¶ाोखियाँ औ तितलियों से रंग लेकर
चलो आज भौंरों सा गुनगुनाते हैं।


उड़ गये वो सभी ख्वाइ¶ाों के परिन्दे

उड़ गये वो सभी ख्वाइ¶ाों के परिन्दे
अब ना तड़पाएगी दिल को कोई भी बात
उस मोड़ पर वो अचानक बिछड़ना तेरा
ले गया उन तमाम तेरे वादों को साथ
साथ बिताये लम्हों की वो सौंधी खु¶ाबू
दफन हो गयीं सब तेरी रुख्सती के साथ
अब ना भिगोएगा कोई यूँ अब्रा मुझे
ना ही जगाएगी कोई याद मुझे तमाम रात।

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