ISSN 2249-5967

 

सुषमा शर्मा

सम्पादक
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भारत मेरे सपनों का देश
11 फरवरी, 1947 को भारत के मुम्बई महानगर में जन्मी डॉ. कुलसुम बशर मजूमदार वहीं पली-बढ़ी और वहीं उन्होंने शिक्षा ग्रहण की है। विवाह के बाद वे बांग्लादेश आ गईं, लेकिन आज भी भारत में बीते दिनों को वे अपना स्वर्णिमकाल मानती हैं। ढाका विश्वविद्यालय से उर...
क्वान्ग्तोंग विश्वविद्यालय में हिंदी विद्यार्थी सुश्री कौ ईन से आत्माराम शर्मा की बातचीत
हिंदी की शुरुआत कैसे हुई?बचपन से ही दूसरी भाषा सीखने में मेरी बड़ी रुचि है, किंतु चीन की अधिकांश स्कूली शिक्षा में केवल अंग्रेज़ी पढ़ाई जाती है। चीन में हिंदी भाषा को जानने वाले कम हैं और हिंदी बोलने वाले तो और ज़्यादा कम। चीनी लोग यूरोप तथा अमे...
बर्लिन में भारतीय राजदूत श्री गुरजीत सिंह से शिक्षाविद् डॉ. राम प्रसाद भट्ट की बातचीत
बर्लिन में भारत के राजदूत श्री गुरजीत सिंह 1980 से भारतीय विदेश विभाग में कार्यरत हैं। आपने मेयो कॉलेज अजमेर, ज़ेवियर कॉलेज, कोलकत्ता और जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, दिल्ली से शिक्षा प्राप्त की। जेएनयू से इंटरनेशनल स्टडीज़ में एम.ए. करने के साथ ही ...
भारतवंशियों के दंश और पीड़ा को समझना होगा
भारतवंशी संस्कृति की अध्येता साहित्यकार प्रो. डॉ. पुष्पिता अवस्थी से आत्माराम शर्मा की बातचीतहिंदी यूनिवर्स फाउंडेशन, नीदरलैंड की अध्यक्ष एवं प्रख्यात साहित्यकार प्रो. डॉ. पुष्पिता अवस्थी का जन्म कानपुर में हुआ। राजघाट, वाराणसी के प्रत...
प्रख्यात साहित्यकार डॉ. सुधाकर अदीब से राजू मिश्र की बातचीत
किताब बचेगी तो ही भाषा बचेगी सुधाकर अदीब की पैदाइश उसी अयोध्या में है जहां मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम का जन्म हुआ। सरकारी चाकरी के बीच साहित्य सृजन बड़ी बात होती है, लेकिन उन्होंने समय निकालकर अपने लेखक को जिलाए रखा। बातचीत में सौम्य और मिलनस...
उर्दू साहित्यकार डॉ. वजाहत हुसैन रिजवी से प्रख्यात पत्रकार राजू मिश्र की बातचीत
जहां लफ्जों के मोती, एहसास की डोर में गुंथ जाते हैं तो शायरी का रूप धर लेते हैं और जब बोलों की शक्ल-सूरत अख्तियार करते हैं तो वो कहानी बन जाती है। शब्दों को किसी माला की मोतियों की मानिन्द सजाने-संवारने का हुनर सबके पास नहीं होता। डॉ. वजाहत हुसैन ...
बाबाओं के कुम्भ में एक जिज्ञासु
सब कुछ अविस्मरणीय... अकल्पनीय... सपना सच होने जैसा। धर्मप्राण जनता-जनार्दन के अंत:करण में हिलोरे मारती आस्था और व्यवस्था के बीच अव्यवस्था का आनंद। संगम स्नान के तदंतर हर चेहरे पर खिली अजब सी मुस्कान मानो बताती है कि अमृतपान हो गया है। ठाठ बाबाजी ल...
निवेशक मित्र और विकास में सहभागी हैं
प्रश्न - मध्यप्रदेश में प्रवासी भारतीयों की पूंजी निवेश की आपकी महत्वाकांक्षी योजना में सिंगापुर यात्रा की उपलब्धि के बारे में क्या कहेंगे।उत्तर - देखिये मैं सिंगापुर सरकार के नियंत्रण पर गया था। मध्यप्रदेश ने सिंचाई, कृषि, महिला सशक्तिकरण स...
मॉल-संस्कृति को देखने भारत नहीं आऊँगी
डॉ योको तावादा जयपुर साहित्य सम्मेलन में भाग  लेने ले लिए भारत आर्इं। वे उस सम्मलेन में भाग लेने वाला पहली जापानी साहित्यकार हैं। आपका जन्म जापान के तोक्यो में हुआ और वे 1982 से जर्मनी में रहती हैं। डॉ. तावादा जापानी और जर्मन दोनों भाषाओं में...
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