ISSN 2249-5967

 

सुषमा शर्मा

सम्पादक
अतीत की छाया में भविष्य
01-Sep-2017 04:02 PM 1916     

कामताप्रसाद गुरू के अनुसार, भाषा वह साधन है, जिसके द्वारा मनुष्य अपने विचार दूसरों पर भली भांति प्रकट कर सकता है। दूसरी ओर भाषा एक भी प्रणाली है, लिहाजा किसी भी विदेशी भाषा को सिखाने के लिये भाषा की प्रकृति समझना पड़ती है। भाषा की प्रकृति नदी की भांति प्रवाहमान होती है। उसकी धारा निरन्तर बहती रहती है और उसमें परिवर्तन होते रहते हैं। भाषा की परिवर्तनशीलता को लक्ष्य करके विद्वानों ने यह मत निर्धारित किया है कि कोई भी प्रचलित भाषा सामान्य रूप से एक हजार वर्ष से अधिक समय तक एक समान नहीं रहती है।
मनुष्य के अलावा जानवर भी भाषा का प्रयोग करते हैं। उनकी अपनी भाषा है, मगर वे बोलते नहीं। सिर्फ भिनभिन आवाज निकलकर एक-दूसरों को समझते हैं। केवल मनुष्य ही भाषा द्वारा विचार प्रकट करता है। व्यक्त भाषा द्वारा ही विचारों को ठीक तरह वयक्त किया जा सकता है। अव्यक्त भाषा अथवा सांकेतिक भाषा अथवा बोलियों से बात को भली प्रकार व्यक्त करना और समझना अत्यन्त कठिन होता है। सांकेतिक भाषा द्वारा समाज का काम नहीं चल सकता है। शिष्ट समाज का काम व्यक्त अथवा पूर्ण भाषा द्वारा ही चलता है। भाषा की उन्नत या अवनत अवस्था समाज व राष्ट्र की उन्नति-अवनति का प्रतिबिम्ब होती है। जैसे कज़ाकसतान की राज्य भाषा कज़ाक़ है तो भारत की हिंदी।
भाषा को लें। हिन्दी भारत गणराज्य की आधिकारिक राजभाषा है। हिंदी भाषा प्रसार की दृष्टि से दुनिया में चौथे स्थान पर है। हिंदी न केवल भारत की राजभाषा है, बल्कि वह भारतीय सभ्यता तथा संस्कृति का एक अभिन्न अंग है। हिन्दी भाषा का आरम्भ 7वीं शाती के आसपास माना जाता है। यह लगभग 40 प्रतिशत भारतीय जनसंख्या द्वारा प्रथम भाषा के रूप में बोली जाती है। भारत जैसे बहुभाषी तथा संस्कृति विविधताओं से परिपूर्ण देश में हिंदी एक संपर्क भाषा का भी काम करती है।
कज़ाकस्तान स्वतंत्रता प्राप्त करने के बाद दुनिया के मंच पर अन्य देशों के साथ राजनीतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक संबंधों की एक संख्या में चौतरफा विकास करने लगा। भारत उन पहले देशों में से एक है जिसने कज़ाकस्तान के साथ संचार पुल की स्थापना की है। इतिहास को देखें, तो दोनों देशों के बीच मुख्य राजनीतिक और आर्थिक संबंधों को पाटने के लिये "सिल्क रोड" से ही शुरू हुआ है। क्योंकि यह संचार कुंजी आजादी से पहले आधुनिक इतिहास को लागू करने से सबूत है। 2002 में राज्य के प्रमुख नूरसुल्तान नजरबायेव ने भारत की आधिकारिक यात्रा की। इसी समय दो स्वतंत्र राज्यों, कज़ाकस्तान और भारत की मैत्री पुल के बारे में उन्होंने कहा- सख्त वादा, एक उद्देश्य, मजबूत दोस्ती कज़ाकस्तान और भारत के एक उज्जवल भविष्य देखता हूँ। यह सच है कि हम आजकल कज़ाकस्तान और भारत के बीच मजबूत मित्रता के बहुमुखी संबंधों के विकास के बढ़ना देख सकते हैं। हाँ, इसी साल हम कई महत्वपूर्ण तारीखों को मनाते हैं। ये हैं : कज़ाकस्तान की स्वतंत्रता के 25 साल, भारत की स्वतंत्रता के 70 साल, कज़ाकस्तान और भारत के बीच राजनयिक संबंधों के 25 साल और अल-फराबी विश्वविद्यालय के भारतीय विभाग के 25वीं वर्षगांठ है। इसलिये इसी साल हमें, यानी भारतीय विभाग के लिए विशेष वर्ष है।
25 साल पहले दोनों देशों के सहयोग मजबूत करने के लिए भारतीय भाषा, संस्कृति, इतिहास, साहित्य जैसे भारतीय अध्ययन से गहरा ज्ञान पाते हुए विशेषज्ञों की जरूरत थी। इस लक्ष्य से 1992 में, अल-फराबी कजाख राष्ट्रीय विश्वविद्यालय, ओरिएंटल अध्ययन संकाय में पीएचडी सेनिमगुल दोसोवा के नेतृत्व से भारतीय (उर्दू) विभाग खोला गया था। बाद 1998 में, राष्ट्रीय विश्वविद्यालय के इसी विभाग में हिंदी शिक्षक जाउरे इसकाकोवा हिंदी भाषा जानने वाले पहले विशेषज्ञों को तैयार करने लगी।
आजकल कज़ाकस्तान में भारतीय (हिंदी, उर्दू) भाषाएँ जानने वाले लगभग 200 स्नातक हैं। उनमें से, बैचलर, मास्टर और पीएचडी, विज्ञान के उम्मीदवार भी हैं। राष्ट्रीय विश्वविद्यालय में पढ़ते पहले हिन्दी छात्रों के पास वैज्ञानिक डिग्री भी है। उदाहरण के लिए दामेतकेन ताउबलदिएवा, केनजेबेक गाबदुललिन, बोता बोकुलेवा, एलेना रुदेनको  आदि। भारतीय विशेषज्ञ न केवल देश में, बल्कि विदेश के भी अग्रणी विश्वविद्यालयों में अपने ज्ञान का परीक्षण करते रहते हैं। भारतीय विभाग के छात्र और अध्यापिकाएं भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद, अंतर्राष्ट्रीय तकनीकी आर्थिक सहयोग, के अंतर्राष्ट्रीय कार्यक्रम द्वारा भारत में दिल्ली विश्वविद्यालय, जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय, दिल्ली और आगरा में स्थित हिन्दी केंद्रीय संस्थानों से अंतर्राष्ट्रीय संबंधों के रूप में शैक्षिक आदान-प्रदान किया जाता है।
आज देश में अल-फराबी कजाख राष्ट्रीय विश्वविद्यालय, सहित, पूर्वी संकाय में भारतीय विभाग के शिक्षक दोनों देशों के दोस्ती को जारी रखने के लिए सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं। वर्तमान में, ओरिएंटल अध्ययन संकाय, भारतीय अनुभाग में आठ योग्य विशेषज्ञ काम करते हैं। उनमें से पांच पीएचडी तथा तीन कला के मास्टर्स हैं। भारतीय विशेषज्ञों की कड़ी मेहनत के परिणाम के रूप में भारतीय अध्ययन के क्षेत्र में "हिंदू धर्म", "भारतीय धर्म का इतिहास", "भारतीय भाषाशास्त्र का परिचय", "भारतीय साहित्य : एक प्राचीनता और मध्य युग", "हिंदी शिक्षण के तरीके", "हिंदी समानार्थी" जैसे मोनोग्राफ और पाठ्यपुस्तकों, "हिन्दी-कज़ाख, कज़ाख-हिन्दी" शब्दकोश, तथा कज़ाख़-हिन्दी, हिन्दी-कज़ाख़ वार्तालाप-पुस्तिका प्रकाशित की गई हैं।
दुनिया की भाषाओं के बीच संचार की अपनी व्यवस्था यानी पुल होने चाहिए। विभिन्न भाषाओं के बीच इस तरह के सबसे मौलिक साधन वार्तालाप-पुस्तिका है।
आजकल बाज़ार का ज़माना है। अतः आर्थिक विकास करना, अंतर्राष्ट्रीय आर्थिक और वित्तीय संबंधों का विकास करना सभी देशों का कर्तव्य है। इसी लक्ष्य के तहत कज़ाखस्तान में होने वाले अंतर्राष्ट्रीय प्रदर्शनी "एक्सपो" के संबंध में कज़ाख़-हिन्दी, हिन्दी-कज़ाख़ वार्तालाप-पुस्तिका तैयार की गई। इस वार्तालाप-पुस्तिका में कज़ाखस्तान आने वाले या विदेश यात्रा करने वाले लोगों को दैनिक वार्तालाप के रूप में इस्तेमाल करते राष्ट्रीय मुद्रा, नेशनल बैंक की बैंकिंग प्रणाली, राष्ट्रीय बैंक पर विविध सामग्री संजोयी गई है। आम लोगों के दैनिक जीवन की गतिविधियों के रूप, मुद्रा विनिमय, खाता और निक्षेप खोलना, भुगतान कार्ड खोलना, मनी ट्रांसफर, ऋण प्रसंस्करण और अन्य सभी विषयों के सवालों और जवाबों के रूप में प्रस्तुत किया गया है।
कजाखस्तान के भारतीय स्नातक आजकल भारतीय दूतावास में, भारतीय कंपनियों, राष्ट्रीय सुरक्षा समिति, कजाखस्तान गणराज्य के आंतरिक मामलों के मंत्रालय, विश्वविद्यालयों, तेंगरी (पंजाब) बैंक जैसी जगहों में काम करते है और "भारत-कज़ाखस्तान निधि" के कर्मचारियों के साथ विभिन्न स्तरों पर बैठकों के पारित होने में भाग लेते हैं और विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों को मिलकर मनाते हैं।
आज भारतीय विभाग आधुनिक तकनीक के साथ सुसज्जित है। भारतीय विभाग में हिंदी और उर्दू भाषाओं की कक्षाएं, मल्टीमीडिया कक्षा, विदेशी प्रोफेसरों की कक्षा तथा भारतीय अध्ययन और महात्मा गांधी केंद्र हैं। उसके अलावा 2015 साल से राष्ट्रीय विश्वविद्यालय (भारतीय अध्ययन विभाग के अधीन) में भारत गणराज्य द्वारा वित्त पोषित "शांति" योग केंद्र काम करता है।
विगत मार्च 2015 में अल-फराबी कजाख राष्ट्रीय विश्वविद्यालय के एक प्रतिनिधिमंडल ने सहयोग को मजबूत करने के लिए और दो विश्वविद्यालयों के बीच अनुभव के आदान-प्रदान के उद्देश्य से भारत के प्रमुख विश्वविद्यालयों में से एक दिल्ली विश्वविद्यालय और भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान की सरकारी यात्रा की। यह दोनों देशों के बीच एक अंतरराष्ट्रीय सहयोग का प्रतीक है। पिछले वर्ष सहयोग ज्ञापन के आधार पर अल-फराबी कजाख राष्ट्रीय विश्वविद्यालय के सैन्य विभाग में भारत गणराज्य के राष्ट्रीय कैडेट कोर के प्रतिनिधिमंडल का दौरा हुआ। यह भी दोनों देशों के बीच सहयोग का एक और सबूत है।

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