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अरुण कुमार त्रिपाठी
अरुण कुमार त्रिपाठी
इंडियन एक्सप्रेस, जनसत्ता और हिंदुस्तान अखबार में ढाई दशक तक विभिन्न पदों पर रहने के बाद कल्पतरु एक्सप्रेस का संपादन, आज समाज में भी विकास संपादक के तौर पर कार्य किया। सामयिक वार्ता, युवा संवाद, वैकल्पिक आर्थक सर्वेक्षण के संपादक मंडल के सदस्य। अनेक राजनीतिकों पर मोनाग्राफ लिखे। कट्टरता के दौर में- शीर्षक से लेखों का संग्रह चर्चित। समाजवाद लोहिया और धर्मनिरपेक्षता- एक विमर्शकारी पुस्तक। वर्तिका के कुछ अंकों का संपादन। सिंगुर नंदीग्राम से निकले सवाल, परमाणु करार के खतरे, खाद्य संकट की चुनौती, माओवादी या आदिवासी, अन्ना आंदोलन और भ्रष्टाचार जैसे शीर्षकों से पुस्तकों का संपादन।

हिंदी पत्रकारिता का वैचारिक संकट
पत्रकार शिरोमणि बाबूराव विष्णु पराड़कर ने लगभग एक शताब्दी साल पहले हिंदी संपादक सम्मेलन में कहा था, "पत्र निकालकर सफलतापूर्वक चलाना बड़े-बड़े धनिकों तथा सुसंगठित कंपनियों के लिए संभव होगा। पत्र सर्वांग सुंदर होंगे, आकार बड़े होंगे, छपाई अच्छी होगी, मन
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