ISSN 2249-5967

 

सुषमा शर्मा

सम्पादक
भारत और पाक़िस्तान के प्रति अणुशस्त्र
01-Apr-2019 09:59 PM 210     

भारत और पाक़िस्तान के प्रति

समझो बन्दे पाक़िस्तान!
समझो बन्दे हिन्दुस्तान!
जागो, देखो, आँखें खोलो
दुहराना न वही दास्तान!

शरीर अलग है तुम दोनों का, अलग रहेगा, यह समझो
मन तो फिर भी एक ही ठहरा, एक रहेगा, यह समझो
फिर झगड़ा करने से क्या पाओगे? ग़ौर करो, गुन लो
जागो, देखो, आँखें खोलो
दुहराना न वही दास्तान!

काहे फँसे साम्राज्यवादियों के शब्दों की जाली में?
क्यों फिसले संस्थानवादियों के सूत्रों की काई में?
कभी नहीं ऊँचा उठने देने की चाल निराली में?
जागो, देखो, आँखें खोलो
दुहराना न वही दास्तान!


अणुशस्त्र

अणुशस्त्रों का नाश करो, भारत वर्ष! पाक़िस्तान!
इक-दूजे विश्वास करो, भारत वर्ष! पाक़िस्तान!

यदि कोई भिड़वाता तुमको, तो क्या तुम भिड़ जाओगे?
कोई उकसाता यदि तुमको, क्या सचमुच तुम उकसोगे?
छोड़ो बालिश बातें, छोड़ो भीतर का मिथ्या उफ़ान!
भारत वर्ष! पाक़िस्तान!

जग कहता है, शासन अपना कभी नहीं कर पाओगे
हुए भले आज़ाद, कभी आबाद नहीं हो पाओगे
सह सकते कैसे हो तुम इतनी हाँसी, इतना अपमान!
भारत वर्ष! पाक़िस्तान!

शस्त्रों से शान्ति नहीं मिलती, युद्धों से नहीं प्रेम
सदियाँ बोले बात पुरानी, सुन लो, सोचो क्षेम
भ्रम से मुक्त बनो, मित्रो! कर लो दिल का आदान-प्रदान
भारत वर्ष! पाक़िस्तान!

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