ISSN 2249-5967

 

सुषमा शर्मा

सम्पादक
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अपनी बात दार्जिलिंग

कवि दार्जिलिंग के होटल ठहरा था। सुबह सोकर उठा खिड़की खोली, तो भौंचक रह गया। हिमाच्छादित कंचनजंगा पर सुनहली धूप की पृष्ठभूमि में रंग-बिरंगे फूलों का मेला। निहारता ही रह गया कवि। फिर उसका मन मान से भर

नव वर्ष का अभिनन्दन

न्यता है कि रोमन देवता जेनस के दो चेहरे हैं। एक से वह आगे और दूसरे से पीछे देखता है। साल के पहले महीने का नाम जनवरी इसी रोमन देवता के सम्मान में रखा गया। एक से वह बीते हुए वर्ष को देखता है और दूसरे

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