ISSN 2249-5967

 

सुषमा शर्मा

सम्पादक
अनुवाद : संजीव त्रिपाठी वाल्मीकि रामायण : आधुनिक विमर्श-22 दूत हनुमान : भाग-1
CATEGORY : व्याख्या 01-Jul-2018 05:29 AM 382
अनुवाद : संजीव त्रिपाठी वाल्मीकि रामायण : आधुनिक विमर्श-22 दूत हनुमान : भाग-1

कवि वाल्मीकि के अनुसार सीता की खोज में गये दूत हनुमान को दो तरह की अनुभूतियाँ हुईं। एक आतंरिक अनुभूति, जो भूख, प्यास, प्यार और दुःख के रूप में हमारे शरीर महसूस करता है और हमारे लिये एक अनुभव पैदा करती है। और दूसरी बाहरी अनुभूति, जो वातावरण, विभिन्न वस्तुओं, मौसम और सामाजिक दृश्यों आदि के रूप में हमारी ज्ञानेन्द्रियों के माध्यम से हमारे ज्ञानार्जन का स्रोत बनता है। ज्ञानेन्द्रियों के द्वारा अर्जित ज्ञान का अपने विवेकानुसार विश्लेषण कर उसे व्यवहारिक जीवन में उपयोग में लाना, हमें इस संसार में जीवनयापन करने में मदद करता है। हमें यह मालूम है कि हमारी ज्ञानेन्द्रियों की क्षमता सीमित है और इसी वजह से कभी-कभी हम अपने पुराने अनुभवों से अर्जित ज्ञान का उपयोग नये कार्य के लिये करा लेते हैं।
आज हमारे पास समाचार भेजने के कई सारे माध्यम हैं। प्रेम का सन्देश किसी विश्वसनीय व्यक्ति, जानवर या पक्षी के द्वारा भेजने की काफी पुरानी परंपरा रही है। उसके बाद अधिकारिक सन्देश भेजने की प्रथा आई, राजा का सार्वजनिक सन्देश हो या फिर राज दरबार का गोपनीय आदेश। दूत की राजदरबार में अहम् भूमिका होती है, वह राज्य की गोपनीयता के प्रति सजग रहता है और राजा का विश्वसनीय सलाहकार होता है। भारतीय राज्य व्यवस्था शास्त्र के अनुसार दूत में कुछ विशेष गुण होने चाहिये। वह तीक्ष्ण बुद्धि वाला, अति धैर्यवान, मृदुभाषी और विवेकशील हो! भावविहीन सन्देश देना अच्छे सन्देश वाहक का गुण माना जाता है।
अगले तरह के सेना के सन्देश वाहक होते हैं। युद्ध में प्रतिद्वंद्वी एक दूसरे को बहकाने और जाल में फसाने के लिये तरह-तरह की योजनायें बनाते हैं। योजनायें तभी सफल होती हैं जब वह दूसरे पक्ष से गुप्त रखी जायें। दोनों ही पक्ष अपने प्रतिद्वंद्वी की आंतरिक कार्यप्रणाली की जानकारी लेने के लिये गुप्तचरों का सहारा लेते हैं। सामान्य शिष्टचार के अनुसार गुप्तचर अपने साथ हथियार नहीं रखते, इसलिये पकड़े जाने पर उन्हें मृत्युदंड नहीं दिया जाता, जब तक कि गुप्तचर ने कोई अनुपयुक्त कार्य न किया हो। आधुनिक गुप्तचर दुश्मन की जेल में यातनाओं से बचने के लिये अपने साथ जहर रखते हैं, जिससे ज़रूरत पड़ने पर आत्महत्या कर सकें। गुप्तचर का प्रमुख उद्देश्य, लक्ष्य का सीमांकन करना और दुश्मन की ताकत का पता लगाना होता है। बिना पकड़े या पहचाने हुये जानकारी लेकर वापिस आना गुप्तचर कार्य की सफलता मानी जाती है।
वाल्मीकि रामायण कहानी में हनुमान का परिचय वानरराज सुग्रीव - जिसे उसके भाई "बालि" उसे राज्य से निष्कासित कर दिया था और वह उसके डर से छुपकर गुफाओं में रह रहा था - के सलाहकार के रूप में होता है। राक्षस "कबंध" के बताये अनुसार राम और लक्ष्मण सीता की खोज में "पम्पा" नाम की झील के पास पहुँच जाते हैं। उन दोनों को धनुष-बाण के साथ देखकर सुग्रीव डर से अत्यंत घबरा जाता है, पर हनुमान सहज रहते हैं। कहानी में हनुमान का प्रथम कार्य उन दोनों से मिलकर और बातचीत कर उनका यहाँ आने का उद्देश्य पता करना था। हनुमान की वाकपटुता से राम बहुत प्रभावित हुये और उन्होंने उनके व्यवहार की तारीफ की। राम अच्छे मित्र बनाना जानते थे!
हालाँकि हनुमान का कार्य केवल उन दोनों के बारे में पता कर सुग्रीव को जाकर बताना था, लेकिन हनुमान दोनों भाइयों को सुग्रीव से मिलाने के लिए दुर्गम पहाड़ी रास्ते पर अपने कंधों पर बैठाकर ले आये। हनुमान ने पहुँचते ही सुग्रीव को दोनों भाइयों के बारे में बता दिया था और उसे उनसे मिलने के लिये यह बताकर राजी कर लिया था कि यह दोनों भाई बालि से राज्य वापिस लेने में मदद कर सकते हैं। सुग्रीव ने राम से मित्रता का हाथ बढ़ाया और दोनों में मैत्री हो गयी। हनुमान, सुग्रीव द्वारा राम को दिये गये वचन के बारे में उसे सचेत करते रहे थे। राम के द्वारा बालि के वध के बाद जब सुग्रीव राज्य करने लगा, तब हनुमान ने सुग्रीव को सलाह दी कि उसे राम को सीता की खोज में मदद देने के वचन को भूलना नहीं चाहिये। इस घटना से यह स्पस्ट होता है कि हनुमान अपने स्वामी के हितों और अंतःकरण की आवाज के प्रति प्रतिबद्ध थे।
सुग्रीव को ऐसा अनुमान था कि सीता दक्षिण दिशा में हो सकती है। वर्ष के शुरूआत में उसने दक्षिण दिशा की तरफ जाते हुआ एक विमान को देखा था। सुग्रीव ने हनुमान को अंगद के साथ दक्षिण दिशा में सीता की खोज के लिये भेजा और उन सब जगहों पर जाने को कहा जहाँ पर सीता के होने की संभावना हो सकती हो। खोज करते समय वो एक गुफा में खो गये और सुग्रीव द्वारा निर्धारित एक माह के समय में वापिस नहीं आ सके। अंगद बहुत ही हतोत्साहित थे और वापिस किष्किन्धा जाने से बहुत भयभीत थे पर हनुमान ने उन्हें समझाया और हौसला बढ़ाया। उन्हें यह मालूम था कि सुग्रीव के सलाहकार होने के नाते उनकी जिम्मेदारी बड़ी है।
वे गिद्धराज जटायु के बड़े भाई "संपाती" से मिले और उसने बताया कि सीता लंका में है जो कि समुद्र के अन्दर 800 मील दूर है। दल में शामिल सभी वानरों ने समुद्र में इतनी लम्बी दूरी की छलांग लगाने में असमर्थता जताई। हनुमान भी इस कार्य के लिये तब तक तैयार नहीं हुये जब तक कि उन्हें इसके लिये मनोनीत नहीं किया गया। हो सकता है कि वह किसी साहसी साथी का इन्तजार कर रहे थे, लेकिन जब कोई भी इस कठिन कार्य के लिये तैयार नहीं हुआ तो हनुमान ने इस लक्ष्य को हासिल करने की जिम्मेदारी अपने हाथों में ली। उन्होंने एक दूत बनकर ऐसे स्थान में सीता का पता लगाने का कार्य हाथ में लिया जिसके बारे में उन्हें कोई जानकारी नहीं थी। उन्होंने सीता को कभी देखा नहीं, केवल इतनी ही आधी-अधूरी जानकारी थी कि वह अच्छे चरित्र वाली एक राजकुमारी है।
हनुमान की लंका की यात्रा और वहाँ पर उनका सीता की खोज कर उनसे मिलने के साहसिक कार्य का वर्णन सुन्दर काण्ड को वाल्मीकि रामायण का अति सुन्दर भाग बनाता है। हनुमान अपने लक्ष्य के प्रति समर्पित थे पर उनकी भी कुछ शारीरिक सीमायें थीं। अपनी शारीरिक थकान दूर करना और रास्ते में आयी हुई बाधाओं को दूर करना कुछ आसान नहीं। वह समुद्र के किनारे-किनारे उथले पानी में तब तक चलते हैं और जब तक समुद्र के अन्दर "मैनाक" नामक पर्वत दिखता है जहाँ कुछ समय रुककर विश्राम किया जा सकता है। विश्राम में ज्यादा समय व्यतीत किये बगैर उन्होंने गहरे समुद्र में छलांग लगा दी जहाँ बड़े समुद्री जीवों से बचना अति कठिन कार्य था। उन्होंने अपने आपको एक "सुरसा" नामक राक्षसी से अपने शरीर को अति लघु बनाकर बचाया तो दूसरे के पेट को फाड़कर बाहर निकले। आम दूत के यह कार्य नहीं होते और न ही इस तरह की बाधायें आम दूत को आती हैं।
अपनी पहचान छुपाने के लिये भेष बदलना या दूसरे के समरूप बनकर कार्य करना सेना के गुप्तचर की आवश्यक योग्यतायें होती हैं। हनुमान सुग्रीव को बालि के घातक प्रकोप से बचाने के लिये एक गुप्तचर सैनिक का कार्य कर रहे थे। भद्रता और उचित अभिव्यक्ति जैसे आवश्यक गुणों के साथ साथ हनुमान ने अपने शरीर को सूक्ष्म या वृहद बनाने की कला भी सीख ली थी। वाल्मीकि ने हनुमान को वानर प्रजाति का चित्रित किया है जो कि मनुष्य और बन्दर की वर्ण-संकर प्रजाति है। उनके पास मनुष्य की बुद्धिमत्ता और बन्दर के शरीर की संरचना है। इस ख़ूबी ने उनको दृश्य को पूरी तरह देखते हुये अपने आप को छुपाने में मदद की, आधुनिक "ड्रोन" की तरह!
अधिकाश गुप्तचर अँधेरे में अपने कार्य को अंजाम देते हैं। हनुमान ने लंका में संध्या के समय में प्रवेश किया। जब उन्होंने नगर की चारदीवारी पर चढ़कर देखा तो नगर की भव्यता और चाक चौबंद सुरक्षा व्यवस्था देख वह दंग रह गये। ऐसे अत्यंत सामरिक दृश्य की जानकारी देना ही गुप्तचर के लिये बहुत अहम् होता है, पर हनुमान अपने साहस से और आगे बढ़ने की हिम्मत रखते थे। रात्रि में उनका सामना एक पहरेदारिनी से होता है, पर वह उसे अपनी ताकत से दबोच हुये आगे बढ़ जाते हैं। इस घटना में हनुमान की किस्मत साथ देती है। पहरेदारिनी को राजा की क्रूरता पसंद नहीं थी, इसलिये अन्य पहरेदारों को मदद के लिये बुलाने की बजाय वह हनुमान को नगर में प्रवेश करने देती है। ऐसा लगता है कि अच्छे कार्य के लिये किस्मत भी साथ देती है।
हनुमान एक संदेशवाहक हैं जो राम की अँगूठी पहचान के रूप में सीता के लिये ले जाते हैं। पर वह, यह अँगूठी कहाँ और किसे दे? सीता कहाँ हैं? वह कैसी दिखती हैं? सामान्यतः संदेशवाहक अपनी यात्रा शुरू करने से पहले इन सब प्रश्नों के जबाब जानना चाहता है, पर हनुमान के पास यह सब जानकारी नहीं थी। उन्हें तो अपने विवेक से ही सीता को ढूँढ़ना है, यह मानकर कि वह लंका द्वीप में है। हनुमान के पास एक गुप्तचर और एक संदेशवाहक, दोनों ही जिम्मेदारियाँ हैं। वह सुग्रीव के गुप्तचर और राम के संदेशवाहक हैं। सन्देश पहुँचाना उनकी अतिरिक्त जिम्मेदारी है।
हनुमान ने रावण के अन्तःपुर में मध्यरात्रि में प्रवेश किया। माँस और मदिरा की तीक्ष्ण गंध से वह परेशान हो गये, पर उन्होंने अपना धैर्य नहीं खोया। बहुत से सोते हुये लोगों के चेहरे उन्होंने नजदीकी से देखे। उन्होंने सही अनुमान लगाया कि इनमें से कोई भी सीता नहीं हो सकती। इसके बाद उन्होंने एक विशालकाय व्यक्ति को कई सारी जवान स्त्रियों के मध्य सोते हुये देखा। उन्होंने अनुमान लगाया कि यह व्यक्ति रावण हो सकता है, पर उन्हें इस बात पर संदेह था कि क्या इनमें से कोई भी स्त्री सीता हो सकती है? उन्होंने अपने आपको सम्हाला कि उनकी यात्रा का एक आदर्श है। और यदि सीता ऐसी दयनीय स्थिति में पड़ गयी, तो उनकी यात्रा का कोई मतलब नहीं रहेगा! अपने उद्देश्य के प्रति निश्चय संदेशवाहक की पहचान होती है।
हनुमान एक गुफानुमा बरामदे में खो गये और ताजी हवा लेने के लिये बाहर चले गये। अगले दिन शाम को उनका क्रियाकलाप पुनः शुरू हो गया। इसके बाद उन्होंने एक सुन्दर झरना देखा जिसके आसपास कई सुन्दर बाग-बगीचे बने हुये थे। संदेशवाहक को ऐसी आशा थी कि अवश्य ही सीता शाम के समय घूमने के लिये झरने के पास आयेगी! सीता एक राजकुमारी है और उसे वन की सुन्दरता बहुत पसंद होगी, इसलिये वह अवश्य आयेगी! मैंने सुना है कि सीता को वन में जानवर बहुत पसंद है, वह वन में जानवरों को देखने शाम को जरूर आयेगी! सीता स्वभाव से ईश्वर प्रेमी है इसलिये संध्या के समय वह अवश्य ही स्नान के लिये आयेगी! आशावादी विचार मन में प्रसन्नता लाते हैं। हनुमान अपने आशावादी विचारों में खोये रहते हैं।
सभी संदेशवाहक सफलता चाहते हैं। कर्मठतापूर्ण प्रयास और आशावादी विचार सफलता लाते हैं। हनुमान को एक स्त्री दिखाई देती है, पर वह यह कैसे निश्चित करें कि यही स्त्री सीता है?

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