ISSN 2249-5967

 

सुषमा शर्मा

सम्पादक
अमेरिकन-ऑस्ट्रेलियन संस्कृति के बिम्ब
CATEGORY : विमर्श 01-Feb-2017 12:32 AM 769
अमेरिकन-ऑस्ट्रेलियन संस्कृति के बिम्ब

छब्बीस वर्ष पूर्व मैं भारत छोड़कर ऑस्ट्रेलिया आया था, यहाँ बस जाने के लिये। अपनी जड़ों से अलग होने के कारण यह स्वाभाविक था कि किसी भी प्रवासी की तरह यहाँ की भाषा, रहन-सहन खान-पान और संस्कृति को सीखते-सीखते स्वयं में बदलाहट हो जाय। दार्शनिक ढंग से यह भी सोचता हूँ कि सभी बदलाहट से बची हुई चीज याने "मैं कौन हूँ?" इस गूढ़ रहस्य को उजागर होने में मेरी तीन बार की गई अमेरिका की यात्राएँ मददगार साबित हुईं।
पहली बार 12 वर्ष पहले अमेरिका पहुँचकर बहुत कुछ देखा। मसलन-  न्यूयार्क, वाशिंगटन डीसी, नाइग्रा-प्रपात, डिज़नीलेंड, लास वेगास, ग्रांड केन्यन, बहामस क्रूज़ आदि। सब कुछ देखकर भी मुझमें क्या बदला? यहाँ बस जाता तो भी मुझमें क्या बदल जाता? कुछ भी नहीं।
फिर भी गहराई से देखें तो दोनों देशों की संस्कृति में काफ़ी फ़र्क मिलेगा जैसे अमेरिकावासी सामन्यतया "पोलिटिकली करेक्ट" होंगे। यहाँ लोग मिलने पर "यौर ग्रेट कंट्री" कहकर प्रशंसा करना नहीं भूलते। (यह उनकी आदत है आप कहीं गलती से इसे व्यंग्य मत समझ बैठिए।) मुझे तो आश्चर्य तब हुआ जब एक जगह अमरीकी अधिकारी ऑस्ट्रेलिया के इतिहास पर तथ्य लिखते समय अपराधियों का बसाया जाना गुल कर गये कि ऑस्ट्रेलियावासियों को कहीं बुरा न लगे जो कि स्वयं पोलिटिकली करेक्ट होने की परवाह बिल्कुल नहीं करते। इसका एक अच्छा उदाहरण है - यहाँ के एक सांस्कृतिक उत्सव का नाम खोजने के लिये आदिवासियों की सलाह ली गई और नाम तय किया गया - "मुम्बा"। कोई भी शिष्टाचार-युक्त समाज आदिवासी भाषा में इसका क्या अर्थ होता है इसकी चर्चा करना अपनी तौहीन समझेगा यदि शब्दार्थ कूल्हे से संबन्धित हो। हँसी आती है जबकि अमेरिका में "ब्लैक कॉफ़ी" के लिये दूसरा शब्द ढूंढा गया है और इसके विपरीत ऑस्ट्रेलिया के आदिवासियों ने अपने वर्ग के लिये "ब्लैक" शब्द का उपयोग करने की खुली छूट दी है।
एक बात यहाँ ध्यान रखने योग्य है कि किसी भी देश के लोगों की विशेषतायें ढूंढते समय यह ख़्याल रखना होगा कि कोई भी विशेषता किसी देश के सभी लोगों में नहीं होती। पूरे देश के नागरिकों को एक प्रकोष्ठ में खड़ा कर देना नाइंसाफी होगी बल्कि किसी भी देश या समाज के विशिष्ट गुण का अर्थ केवल इतना होता है कि वह अन्य देशों की तुलना में अधिकतर लोगों में पाया जाता है और कहीं न कहीं यह विशेषता उस देश के इतिहास से जुड़ी हुई है।
अमेरिका का इतिहास कुछ ऐसा है कि यहाँ मूलरूप से नागरिकों ने राष्ट्र की शक्ति के आगे जब-जब अपने को असहाय पाया तो अपने-अपने गुट बनाने शुरू किये, जबकि ऑस्ट्रेलिया गुट बनाने की प्रवृत्ति से आज़ाद रहा क्योंकि 1788 से लगभग 80 वर्ष तक यहाँ अपराधियों को बसाया गया अत: शुरू में केवल दो वर्ग थे- अपराधियों की संतानें तथा अपराध-मुक्त लोगों की संतानें। इन दोनों वर्गों की विभिन्न मानसिकता के रहते यहाँ गुट और दलबन्दी बनाने की प्रवृत्ति का अभाव रहा। उस युग में ऑस्ट्रेलिया में अपराधियों को पीटा जाना एक सामान्य बात थी अत: चर्च ने इन्हें मूलरूप से पापी मान कर सज़ा का हकदार माना जबकि अमेरिका में किसी वर्ग को साथ में लिये बिना सत्ता की सीढ़ी चढ़ना संभव नहीं रहा अत: वह ऑस्ट्रेलिया की तरह संस्था-विरोधी कभी नहीं रहा। ऑस्ट्रेलिया में तो अंगरेजों के जमाने से राष्ट्रीयता को भी अच्छा नहीं माना गया और इस पर गर्व करने के भाव को हतोत्साहित किया गया।
ऑस्ट्रेलिया में नये-नये आये मेरे मित्र ने एक बार शिकायत की थी कि वहाँ राष्ट्रीय-झंडे के साथ अभद्र व्यवहार करना क्यों बुरा नहीं माना जाता? समुद्रतट के बीच पर पहनने के टॉवेल या अन्य वस्त्र पर राष्ट्रीय ध्वज देख कर क्यों किसी को हैरानी नहीं होती? उसने कहा कि जो अपने झंडे का अपमान करके हँसते हैं वे दूसरे देश के झंडे के साथ कैसा बर्ताव करेंगे? पर हाँ ऑस्ट्रेलिया में झन्डा मानो केवल सुवेनियर की वस्तु रहा है राष्ट्र की प्रतिष्ठा और सम्मान का चिह्न नहीं।
इसके विपरीत अमेरिकावासी देशभक्ति का भाव व्यक्त करना अपना गौरव समझते हैं; गौरव इस बात पर भी कि नाज़ी जर्मनी को रोकने से लेकर विज्ञान के क्षेत्र में या फिर नोबेल पुरस्कार जीतने में उनका देश अग्रणी रहा है किन्तु भारत की तरह वहाँ की हर छोटी-छोटी उपसंस्कृति अपने आप को मुख्यधारा में मान कर चलती है तो संघर्ष होना स्वाभाविक भी है।
उपलब्धियों के लिये स्वयं को गौरवान्वित महसूस करने का एक नतीज़ा यह है कि अमेरिकावासी अपने वैभव और महत्वाकांक्षाओं का प्रदर्शन करना बुरा नहीं समझते जबकि ऑस्ट्रेलिया में एक मुहावरा है कि "बड़ा हेट पहनने वाला हमेशा मामूली दो टके का सेठ होता है।" यहाँ पर अन्डरडॉग (जो प्रतिस्पर्धा में प्रथम न हो, बल्कि परदे के पीछे हो) का पक्ष लिया जाता है तो स्पष्ट है कि "ईश्वर मेरी ओर है" जैसी भारी भरकम मान्यता ले कर चलने वाला उपहास का पात्र होगा। नम्र, जमीन से जुड़ा हुआ और अपनी सफलता पर संकोचभाव रखने वाला अधिक लोकप्रिय होगा।
अमेरिकावासी ऑस्ट्रेलिया के मुकाबले में स्वयं को निर्णायक समझ लेने में झिझक नहीं रखते। वे अपनी अच्छी छवि बनाने का हर संभव प्रयास करते हैं। इसके लिये कोई हथकंडा अपनाना यहाँ बुरा नहीं समझा जाता जैसे कि किसी सार्वजनिक संस्था को दान देकर या बताते हुये दान देकर प्रतिष्ठा अर्जित करना। राजनैतिक शक्ति के कारण यहाँ बहुत सुनने में आता है कि अमेरिका ईश्वर का विशिष्ट वरदान है जबकि ऑस्ट्रेलिया के साथ ऐसी कोई बात नहीं। अमेरिका में बड़े नेता बनने और समर्थन देकर पीछे चलने की प्रवृत्ति अधिक है जबकि ऑस्ट्रेलिया में भेड़-चाल से हटने वाला निन्दित कभी नहीं किया जाता जैसे कि पॉलिन हेन्सन जैसी रेसिस्ट व हर मामले में अनभिज्ञ नेता का कुछ समय के लिये जो उत्थान हुआ उसमें यह प्रवृत्ति भी शामिल थी पर इसका एक अच्छा उदाहरण 1950 के जनमत संग्रह में दिखाई दिया जब साम्यवादी दलों पर प्रतिबन्ध लगाने के प्रश्न पर विरोध प्रकट हुआ। इसलिये नही कि जनता साम्यवाद से किसी भी प्रकार की सहानुभूति रखती थी पर वह किसी भी लोकप्रिय बहाव में बह जाना उचित नही समझती थी। ऑस्ट्रेलिया मुक्त-यौन व तलाक जैसे विषय पर अमेरिका से कम परम्परावादी, कम शुद्धतावादी है। इतना होते हुये भी आँकड़ों पर दृष्टि डालें तो मुक्त समाज की विकृतियां यहाँ अमेरिका से कम देखने को मिलती हैं। थोपी हुई विचारधारा से वृत्तियों का दमन न हो तो व्यवहार साफ़ सुथरा होगा शायद यही कारण है कि ऑस्ट्रेलियावासी बीयर पीने के बाद ज्यादा प्रसन्न-चित्त व भद्र व्यवहार करते हुय़े नज़र आते हैं। 

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