ISSN 2249-5967

 

सुषमा शर्मा

सम्पादक
ऐ जिंदगी तू मेरी धुन गा के तो देख
01-Jan-2017 01:38 AM 3605     

ऐ जिंदगी

ऐ जिंदगी गर्दिश का तारा न बन
बेशक धूप और छाया न बन
बनना है तो बन जा मेरी हिम्मत
यूं काँटों का ताज न बन।

मेरे रूठे अल्फाज की कहानी न बन
मेरी झूठी मुस्कान का सच न बन
बनना है बन जा मेरी खुद्दारी
इतनी बेमानी कभी न बन।

मेरी अधूरी ख्वाहिशों का मझधार न बन
मेरे टूटे सपनों की लम्बी रात न बन
बनना है तो बन जा मेरी ख़ुशी
मेरी दुआओं की नुमाइश न बन।

मेरी दबी सांसों की गुनहगार न बन
मेरी चाहतों का श्मशान न बन
बनना है तो बन मेरा आसमान
टूटे हए परिंदों की उड़ान न बन।

मुरझे हुए लम्हों की याद न बन
मेरे बहते आंसू की पीर न बन
बनना है तो बन जा मेरी कलम
कोरे कागज की केवल स्याही न बन।

तू मेरी धुन गा के तो देख

तू मेरी धुन गा के तो देख
मंज़िल खुद पर खुद तेरे पास आएगी
तू मंज़िल बनाकर तो देख
तू मेरी धुन गा के तो देख

मत डगमगाना ठोकरों से, टेढ़ी-मेढ़ी राहों से
सचाई की राह चल कर तो देख
तू मेरी धुन गा के तो देख

मत घबराना तूफानों से, ऊँची गहरी लहरों से
तेरी नौका पार लग जाएगी
तू मेरी धुन गा के तो देख

मत हारना कड़कती धुप से, पाँवों में पड़े छालों से
तेरी हार भी जीत बन जायेगी
तू मेरी धुन गा के तो देख

शिखिर ऊँचे है, तो क्या बात है
हिम्मत की चोटी बना कर तो देख
तू मेरी धुन गा के तो देख

भूल जायेगा तू शोरहत का मोल
फकीरी में भी मज़ा आएगा
तू मेरी धुन गा के तो देख

मत मुरझाना तन्हाइयों में, काले घने अंधेरों में
दुनिया तेरे ही गुण गायेगी
तू मेरी धुन गा के तो देख।

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