btn_subscribeCC_LG.gif
अगले खम्भे तक का सफ़र
01-Jan-2018 03:36 PM 1531     

याद है
तुम और मैं
पहाड़ी वाले शहर की
लम्बी, घुमावदार सड़क पर
बिना कुछ बोले
हाथ में हाथ डाले
बेमतलब, बेपरवाह
मीलों चला करते थे
खम्भों को गिना करते थे
और मैं जब चलते चलते
थक जाता था
घर वापस लौटना चाहता था
तब तुम आंखें बन्द कर के,
कोट की जेब से
हाथ निकाले बग़ैर
मन ही मन
उँगलियों पर
कुछ गिनने का बहाना करने के बाद
कहती थीं
बस उस अगले खम्भे तक और।

आज बरसों के बाद
मैं अकेला ही
उस सड़क पर निकल आया हूँ
खम्भे मुझे अजीब निगाह से देख रहे हैं
मुझ से तुम्हारा पता पूछ रहे हैं
मैं थक के चूर चूर हो गया हूँ
लेकिन वापस नहीं लौटना है
हिम्मत कर के
अगले खम्भे तक पहुँचना है।

सोचता हूँ
तुम्हें तेज चलने की आदत थी
शायद अगले खम्भे तक पहुँच कर
तुम मेरा इन्तजार कर रही होगी!

QUICKENQUIRY
Related & Similar Links
Copyright © 2016 - All Rights Reserved - Garbhanal - Version 19.09.26 Yellow Loop SysNano Infotech Structured Data Test ^