ISSN 2249-5967

 

सुषमा शर्मा

सम्पादक
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क़ज़ाख़ और भारतीय संस्कृति में रंगों के मायने

कजाख और भारतीय संस्कृतियों में रंगों के नामों के अर्थपूर्ण क्षेत्रों की तुलना की जाती है। किसी भी देश के जनजीवन की संस्कृति में चाहे वह फिर क़ज़ाख़ हो या भारत रंगों का विशेष महत्व होता है। वास्तव में,

अतीत की छाया में भविष्य

कामताप्रसाद गुरू के अनुसार, भाषा वह साधन है, जिसके द्वारा मनुष्य अपने विचार दूसरों पर भली भांति प्रकट कर सकता है। दूसरी ओर भाषा एक भी प्रणाली है, लिहाजा किसी भी विदेशी भाषा को सिखाने के लिये भाषा क

गलियों में गालियाँ काशी का अस्सी उपन्यास में बोलचाल की भाषा

वैसे तो वाराणसी को अक्सर "होली सिटी" कहते हैं। पर वहाँ रहनेवालों की बोली को लेकर वाराणसी बिलकुल "होली" (यानी पवित्र) नहीं लगती। कम से कम मुझे यह अनुभव हुआ काशीनाथ सिंह का लोकप्रिय "काशी का अस्सी" उ

हिंदी से चीनी संस्कृति की आत्मा छूना बी.आर. दीपक की चीनी कविता पर कुछ विचार

प्राचीन काल से ही चीन और भारत दोनों कविता के देश हैं। कविता मानवीय संस्कृति की आत्मा भी कही जा सकती है। कुछ लोग कहते हैं कि कविता का कभी भी अनुवाद नहीं किया जा सकता। यह बात असत्य तो नहीं है, बल्कि

मैं भी देशभक्त हूँ

माँ हमें जन्म देती है और धरती माँ की गोद में पल कर हम बड़े होते हैं। जिस देश में हमने जन्म लिया, वह हमारी मातृभूमि हमें प्राणों से भी अधिक प्रिय है। हर प्राणी अपनी जन्मभूमि से जुड़ा होता है। वह उससे

मेरे देश की मिट्टी

अब तो सभी जानते हैं कि कज़ाकिस्तान एक युवा और स्वतंत्र राज्य है। जिसकी अर्थव्यवस्था सफलतापूर्वक लगातार विकसित हो रही है। हमारा देश कैस्पियन सागर से चीन तक फैला हुआ है। मेरे लिए कज़ाकिस्तान सिर्फ जमीन

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