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"विदेशी/द्वितीय भाषा के रूप में हिंदी" लिस्बन (पुर्तगाल) में अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी 7-9 जून - एक मूल्यांकन
लिस्बन में ऐसे सौ तथाकथित हिंदी के विशेषज्ञ मिले थे। मतलब भाषाविज्ञान, वाङमय, साहित्य और हिंदी शिक्षा के विशेषज्ञ। यानी ऐसे लोग जो हिंदी प्रेमी और अक्सर हिंदी के प्रचारक और विश्वभाषा हिंदी के प्रेरक भी समझे जाते हैं। सब हिंदी के अध्यापक, प्राध्याप...
लेखक के निर्माण की प्रक्रिया पर दृष्टि
रावसाहेब कसबे मराठी के बहुत बड़े विचारक-लेखक हैं, उनका समग्र साहित्य हिंदी अनुवाद में संवाद से प्रकाशित हो रहा है। दो पुस्तकें पहले छप चुकी हैं -- आंबेडकर और माक्र्स, मनुष्य और धर्मचिंतन। चार किताबें जनवरी, 2019 में प्रकाशित हो गई हैं। भारत में साम...
पाठकीय टिप्पणी
ताराशंकर बंद्योपाध्याय बंगाल के एक सुप्रसिद्ध लेखक हैं। कुछ दिन पूर्व इनका साहित्य पढ़ने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। साहित्य अच्छा है, गहन दृष्टि है। ग्रामीण जीवन का अत्यंत बारीकी से चित्रण भी किया है। विशेषकर अति निम्न वर्ग का। स्वाभाविक है बंगला संस्...
कथा सम्राट प्रेमचन्द से अल्प असहमति
हिन्दी साहित्य से परिचित भला ऐसा कौन व्यक्ति होगा, जिसके मन में महान कथाकार प्रेमचन्द के प्रति असीम आदर न हो। मेरा भी है परन्तु उनकी कुछेक रचनाएं, कतिपय चरित्र-चित्रण खटकते रहे हैं लम्बे समय से...उनकी प्रसिद्ध कहानी "कफन" को लीजिए। प्रमुख पा...
एक सोच को बदलने की जरूरत
क्या जरूरत है तुम्हें शादी करने की? यों ही जिंदगी की गुजर-बसर हो ही जायेगी और यदि कर ही ली है तो ये विचार कैसे पनपा आपके ह्मदय स्थल पर कि छोड़कर एक-दूसरे को जीवन अच्छा चलेगा। कभी सोचा है कि आपकी जरा-सी नादानी आपके नादान बच्चों को कहां ले जायेगी? आज...
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