ISSN 2249-5967

 

सुषमा शर्मा

सम्पादक
आवरण Next
राजभाषा का मुखौटा कब तक?

भारतीय संविधान के निर्माण की प्रक्रिया में 14 सितम्बर 1949 को देवनागरी लिपि में लिखी जानेवाली हिन्दी को संघ (केंद्र सरकार) की राजभाषा का दर्जा प्रदान किया गया। संविधान लागू होते ही हिन्दी को राजभाष

भारत की राज भाषा का संदर्भ

स्वतंत्रता के बाद प्रश्न उठा कि हमारे देश की एक राजभाषा क्या हो? स्वाभाविक है कि बहुभाषी देश के लिये किसी एक ऐसी भाषा का चयन करना था जो सर्वसम्मति से स्वीकार हो, ग्राह्य हो और राजकाज करना संभव हो।

बोलचाल बनाम कार्यालयीन हिंदी

भाषा और मनुष्य का आपसी संबंध कुछ इस प्रकार है कि एक के बिना दूसरे की कल्पना नहीं की जा सकती है। भाषा ही हमारे चिंतन, भाव-बोध, संप्रेषण संवाद का महत्वपूर्ण साधन है। हम न केवल भाषा के सहारे सोचते हैं

राजभाषा की असली तस्वीर

राजभाषा की असली तस्वीर राष्ट्रभाषा के भ्रम में छिपी है। जाहिर है यहाँ भारत में राजभाषा हिंदी की बात हो रही है जहां राष्ट्रभाषा अपने परंपरागत रूप में हिंदी के स्वरूप में सदियों से विद्यमान है। राष्ट

हिंदी राग : अलगाव का या एकात्मता का?

इस देवभूमि भारत की करीब 50 भाषाएँ हैं, जिनकी प्रत्येक की बोलने वालों की लोकसंख्या 10 लाख से कहीं अधिक है और करीब 7000 बोली भाषाएँ, जिनमें से प्रत्येक को बोलनेवाले कम से कम पाँच सौ लोग हैं, ये सारी

हिंदीप्रेमी क्या करे?

हिंदी की देश में राजभाषा या राष्ट्रभाषा के रूप में जो भी स्थिति है, उसके लिए भले ही राजनीति जिम्मेदार हो, पर मातृभाषा के रूप में हिंदी प्रदेशों में उसकी जैसी स्थिति है, उसके लिए हमें अपनी सांस्कृति

भारत के छोटे-बड़े राजदूत विदेशी हिंदी छात्र और राजभाषा हिंदी

विदेश में हिंदी की स्थिति कैसी है? और इधर उत्तरी यूरोप की हिंदी के हाल को देखकर कौन-सी खासियतें हैं? विदेश में हिंदी के मामले में वार्ताओं की कोई कमी नहीं है। मेरे अंदर में आवाज़ें एक जैसी नहीं, अलग

पत्रकारिता में इतिहास बोध और राजेन्द्र माथुर

अतीत की बुनियाद पर हमेशा भविष्य की इमारत खड़ी होती है। जब तक इतिहास की ईंटें मज़बूत रहती हैं, हर सभ्यता फलती-फूलती और जवान होती है। लेकिन जैसे ही ईंटें खिसकने लगतीं हैं, इमारत कमज़ोर होती जाती है। शिल

हिंदी पत्रकारिता का वैचारिक संकट

पत्रकार शिरोमणि बाबूराव विष्णु पराड़कर ने लगभग एक शताब्दी साल पहले हिंदी संपादक सम्मेलन में कहा था, "पत्र निकालकर सफलतापूर्वक चलाना बड़े-बड़े धनिकों तथा सुसंगठित कंपनियों के लिए संभव होगा। पत्र सर्वां

हिंदी की नामी पत्रिकाएँ

जब मैंने सुचित्रा-माधुरी का समारंभ किया तो मेरे सामने एक स्पष्ट नज़रिया था। मैं एक ऐसे संस्थान के लिए पत्रिका का आरंभ करने वाला था, जो पहले से ही अंगरेजी की लोकप्रिय पत्रिका फ़िल्मफ़ेअर का प्रकाशन कर

दूर-देशों के भारतवंंशी गिरमिटिया

यह मानव का नैसर्गिक स्वभाव है कि वह जोखिम भरे कामों को आगे बढ़कर उत्साहपूर्वक करता है। जब मानव को समुद्री मार्गों से यात्रा करना सुरक्षित लगने लगा, तब इंग्लैंड, पुर्तगाल, स्पेन और फ्रांस के विस्तारव

फ़ीजी के भारतवंशी

प्रथम प्रवासी भारतीय श्रमिक के फीजी में अपना पग रखते ही हिंदी का प्रवेश यहाँ हो गया था। क्योंकि अधिकांश श्रमिक भारतवर्ष के हिंदी भाषी प्रदेशों से यहाँ आए थे अतः यहाँ उन्हीं की ही भाषा स्थापित हुई औ

QUICKENQUIRY
Related & Similar Links
Copyright © 2016 - All Rights Reserved - Garbhanal - Version 12.00 Yellow Loop SysNano Infotech Structured Data Test ^