ISSN 2249-5967

 

सुषमा शर्मा

सम्पादक
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पत्रकारिता में इतिहास बोध और राजेन्द्र माथुर
पत्रकारिता में इतिहास बोध और राजेन्द्र माथुर

अतीत की बुनियाद पर हमेशा भविष्य की इमारत खड़ी होती है। जब तक इतिहास की ईंटें मज़बूत रहती हैं, हर सभ्यता फलती-फूलती और जवान होती है। लेकिन जैसे ही ईंटें खिसकने लगतीं हैं, इमारत कमज़ोर होती जाती है। शिल ...

01-Apr-2017 11:58 PM 868
हिंदी पत्रकारिता का वैचारिक संकट
हिंदी पत्रकारिता का वैचारिक संकट

पत्रकार शिरोमणि बाबूराव विष्णु पराड़कर ने लगभग एक शताब्दी साल पहले हिंदी संपादक सम्मेलन में कहा था, "पत्र निकालकर सफलतापूर्वक चलाना बड़े-बड़े धनिकों तथा सुसंगठित कंपनियों के लिए संभव होगा। पत्र सर्वां ...

01-Apr-2017 11:48 PM 825
हिंदी की नामी पत्रिकाएँ
हिंदी की नामी पत्रिकाएँ

जब मैंने सुचित्रा-माधुरी का समारंभ किया तो मेरे सामने एक स्पष्ट नज़रिया था। मैं एक ऐसे संस्थान के लिए पत्रिका का आरंभ करने वाला था, जो पहले से ही अंगरेजी की लोकप्रिय पत्रिका फ़िल्मफ़ेअर का प्रकाशन कर ...

01-Apr-2017 12:02 AM 908
दूर-देशों के भारतवंंशी गिरमिटिया
दूर-देशों के भारतवंंशी गिरमिटिया

यह मानव का नैसर्गिक स्वभाव है कि वह जोखिम भरे कामों को आगे बढ़कर उत्साहपूर्वक करता है। जब मानव को समुद्री मार्गों से यात्रा करना सुरक्षित लगने लगा, तब इंग्लैंड, पुर्तगाल, स्पेन और फ्रांस के विस्तारव ...

01-Nov-2016 12:00 AM 2677
फ़ीजी के भारतवंशी
फ़ीजी के भारतवंशी

प्रथम प्रवासी भारतीय श्रमिक के फीजी में अपना पग रखते ही हिंदी का प्रवेश यहाँ हो गया था। क्योंकि अधिकांश श्रमिक भारतवर्ष के हिंदी भाषी प्रदेशों से यहाँ आए थे अतः यहाँ उन्हीं की ही भाषा स्थापित हुई औ ...

01-Nov-2016 12:00 AM 2620
अस्मिता के संघर्षशील सिपाही
अस्मिता के संघर्षशील सिपाही

सन् 1498 में 31 जुलाई की दोपहर समुद्र में अपनी यात्रा के दौरान किसी जमीन की तलाश में हताश कोलंबस को जब उसके एक नाविक ने जहाज की छत से देखकर बताया कि पश्चिम की ओर तीन पहाड़ियां दिखाई दे रही हैं तो को ...

01-Nov-2016 12:00 AM 2559
सूरीनाम की धरती पर धड़कता भारत
सूरीनाम की धरती पर धड़कता भारत

खिचड़ी दाढ़ी, दो सितारा आँखों से फिसलती हुई दबी हँसी से सनी आवाज आई "मैं अंदर आ जाऊँ गुरु जी?" कहते हुए 20 साल का युवक दक्षिण अमेरिका के सूरीनाम देश के पारामारिबो शहर के भारतीय सांस्कृतिक केंद्र के ह ...

01-Nov-2016 12:00 AM 2617
आजादी क्यों?
आजादी क्यों?

अजादी क्यों? सवाल बड़ा अजीब लगेगा क्योंकि प्रश्न तो यह होना चाहिये कि आजादी क्यों नहीं? पर अंग्रेजों ने 19वीं शताब्दी के अंत तक पूरे विश्व में यह बात सब के दिल-दिमाग में भर दी थी कि भारत सहित सभी का ...

01-Aug-2016 12:00 AM 796
आज़ादी के विरोधाभाष
आज़ादी के विरोधाभाष

आज़ादी एक बहुआयामी शब्द है। मूलतः यह राजनैतिक, सामाजिक, आर्थिक, वैचारिक, धार्मिक हो सकती है। किसी भी देश और सभ्यता की दीर्घकालिक उन्नति एवं सम्पन्नता के लिए यह आवश्यक है कि उसका पूर्णतः आज़ाद अस्तित् ...

01-Aug-2016 12:00 AM 782
स्वतंत्रता और अनुशासन
स्वतंत्रता और अनुशासन

संसार के किसी विकसित देश से तुलना की जाये तो एक आम भारतीय कहीं अधिक आज़ाद है। चलती बसों में चढ़ने-उतरने से लेकर कहीं भी कचरा फैलाने, थूकने से लेकर नित्यक्रिया तक के लिये कहीं भी बैठ जाना सामान्य-सी ब ...

01-Aug-2016 12:00 AM 848
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