ISSN 2249-5967

 

सुषमा शर्मा

सम्पादक
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उत्तर भारत की लोक कथाओं के संदर्भ

लोक कथाएं हमारी संस्कृति, परम्पराओं और नित्य की जीवन शैली में इस प्रकार रची बसी हैं कि उनसे अपनी धरती की सोंधी मिट्टी की सुगंध, मधुर बयार की ताजगी, कलकल करती नदियों की शीतलता और गुनगनी धूप की गर्मा ...

08-Jul-2017 08:00 PM 1100
पंजाब की लोककथाओं का संसार

लोक साहित्य जनमानस की सहज और स्वाभाविक अभिव्यक्ति है। यह प्राचीन समय से मौखिक रूप में प्रचलित है। परन्तु आज कुछ लोकसाहित्य को लिपिबद्ध किया गया है। लोक साहित्य सदैव भाव प्रधान रहा है, इसमें मानव हृ ...

08-Jul-2017 07:56 PM 1499
बुन्देली साहित्य में लोक कथाएं

प्रत्यक्षदर्शी लोकानां सर्वदर्शी भवेन्नरः - महर्षि व्यास ने सत्य ही लिखा है कि लोक जीवन का प्रत्यक्ष ज्ञान ही जीवन को उसके मंगल कलश रूपी अन्तः वाह्य को जानने का एक आधार है। लोक जीवन मानव जीवन को सम ...

08-Jul-2017 07:51 PM 1584
रस प्रधान भारत और चीनी स्वाद

पश्चिमी लोगों के ख्याल में स्वाद या रस का मतलब केवल शारीरिक जरूरत मिलने के लिए है, सौंदर्यबोध से संबंध नहीं रखा जाएगा। प्लेटो ने कहा था कि अगर हम कहते हैं कि स्वाद और सुगंध न केवल प्रसन्नता है बल्क ...

01-Sep-2016 12:00 AM 3447
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