ISSN 2249-5967

 

सुषमा शर्मा

सम्पादक
ज्ञान का अद्भुत भंडार
CATEGORY : शिकागो की डायरी 01-Mar-2017 08:38 PM 893
ज्ञान का अद्भुत भंडार

पुस्तकालय की आदत बचपन में मम्मी-पापा ने लगायी थी। तब इतनी समझ नहीं थी। छोटी-छोटी किताबें जैसे चम्पक, चकमक पढ़कर और लकड़ी के हाथी, घोड़ा खिलौने खेलकर आ जाया करते थे एकलव्य जैसी शहर की लाइब्रेरी से। पर अब लाइब्रेरी एक लत बन गयी है। एक हफ्ते से ज्यादा दिन होने पर ही एक अजीब सी बैचनी होने लगती है जाने के लिए। पहली बार जब अमेरिका की लाइब्रेरी आयी तो एकदम स्तब्त रह गयी। इतनी भव्य लाइब्रेरी मैंने अभी तक नहीं देखी थी। हालाँकि भारत में भी बहुत अद्भुत और ज्ञान के भंडार से भरे पुस्तकालय हैं।
अमेरिकी समुदाय में लाइब्रेरी एक बहुत बड़ी भूमिका अदा करती है और हो भी क्यों ना, इतना भण्डार है यहाँ ज्ञान का कि देखते ही बनाता है।
अमेरिका में पब्लिक लाइब्रेरी में सभी उम्र के लोगों के लिए किताबों के साथ अनेकों साधन और सुविधायें हैं। समय- समय पर इनको नए साधनों के साथ और भी उन्नयन किया जाता है। क़िताबों का आर्गेनाईजेशन इतना सुंदर है कि किसी को किसी भी तरह की किताब को खोजने में जरा भी वक्त नहीं लगता। किस विषय पर,  किस तरह की, किस लेखक की आपको किताब चाहिए बस आप कुछ ही क्षणों में हाजिर हो जाती है। यहाँ की लाइब्रेरी की सबसे बड़ी विशेषता है एक्सीस टू बुक्स (ॠड़ड़ड्ढद्मद्म द्यदृ डदृदृत्त्) और पढ़ने के लिए शांत वातावरण (द्दद्वत्द्यड्ढ द्मड्ढथ्ढ द्धड्ढठ्ठड्डत्दढ़ द्रथ्ठ्ठड़ड्ढ)। किताबों के अलावा लाइब्रेरी डीवीडी, गेम्स भरा पड़ा रहता है। किसी भी तरह की डीवीडी, म्यूजिक डीवीडी, डॉक्यूमेंट्रीज मूवीज, इलक्ट्रॉनिक गेम्स यहाँ मौजूद हैं। लाइब्रेरी में लगभग हर दिन ही किसी न किसी वर्ग के लिए तरह-तरह के कार्यक्रम या किसी तरह के लेसन होते रहते हैं बस आप अपने पसंद और आवश्यकता के अनुसार इनको देख कर ज्वाइन कर सकते हैं। इन कार्यक्रमों को कई तरह से विभजित किया गया हैं। एजुकेशनल प्रोग्राम, कंप्यूटर और टेक्नोलॉजी प्रोग्राम, किड्स प्रोग्राम, टीन्स प्रोग्राम, एडल्ट प्रोग्राम, सीनियर सिटीजन प्रोग्राम, यहाँ तक कि बेबी और वीमेन प्रोग्राम। एक साल के बच्चे के लिए भी यहाँ एक्टिविटी कार्यक्रम हैं और अस्सी साल के बुजुर्ग के लिए भी। हाल ही में मैंने अपने क्षेत्र की लाइब्रेरी में योगा क्लासेज का सेशन अटेंड किया जो कि बहुत ही प्रेरणादायक था। बच्चों के लिए इस तरह की लाइब्रेरी एक बहुत बड़े मौके के तौर पर होती हैं, जहां वे हर तरह की किताबों, टेक्नोलॉजी, अनुसंधान प्रोजेक्ट्स के लिए अनगिनत सामग्री आसानी से प्राप्त करते हैं।
व्यवसाय करना हों या नौकरी, आपको इसके लिए भी कई सलाहकारी कार्यक्रम साप्ताहिक या मासिक तौर पर चलाये जाते हैं, जिनका लाभ लगभग सभी तरह के लोग लेते हैं। लाइब्रेरी के कर्मचारी इतने मददगार और सहयोग की भावना से भरे होते हैं कि आप बेहिचक उनके सामने कोई भी प्रश्न और जिज्ञासा रख सकते हैं। यहां पर कई तरह के क्लब हैं जैसे टीन्स क्लब, सीनियर सिटीजन क्लब, बुक डिस्कशन क्लब जिनमें क़िताबों पर विचार-विमर्श, नयी गतिविधियों में भाग लेना, नए विषय पर जानकारी हासिल करना शामिल है।
अनुसंधान करने वाले या विशेष विषय में उच्च अध्यन करने वाले लोग अक्सर ही घंटों यहाँ समय बिताते हैं। इन्टरनेट का उपयोग, पिं्रटआउट्स लेना, राइटिंग, टाइपिंग सब कुछ लाइब्रेरी में आसानी से कर सकते हैं।
चार साल के अपने बेटे को कहानी की किताब सुनाते समय मैंने सोचा कि एक ऑडियो-बुक लगा कर सुनाती हूँ, पर थोड़ी देर सुनने के बाद ही उसने पिं्रट-बुक पढ़ने के लिए कहा। टेक्नोलॉजी और इन्टरनेट ने पढ़ने की आदत को बहुत हद तक बदला है पर कितना भी इलक्ट्रॉनिक से भर जाये दुनिया, पिं्रट की दुनिया अलग और चुंबकीय है, जिसकी जगह कोई नहीं ले सकता।
ई-बुक्स पढ़ने वालों की तादाद बढ़ रही है, पर मुद्रित किताबों को पढ़ने वालों की संख्या अब भी उल्लेखनीय है। आँकड़े बताते हैं कि लगभग 70 प्रतिशत पाठक मुद्रित पुस्तकें पढ़ने में रुचि लेते हैं।
लाइब्रेरी के साक्षरता कार्यक्रम बच्चों के लिए बहुत ही अच्छे होते हैं। इन कार्यक्रमों में परंपरागत रीडिंग के साथ टेक्नोलॉजी उन्नयन और नई मीडिया लिट्रैसी के कार्यक्रम भी शामिल हैं। सबसे अच्छी बात है कि यहाँ की माताएँ लाइब्रेरी का बहुत उपयोग करती हैं। पिता से ज्यादा माताएँ अपने बच्चों को नियमित लाइब्रेरी लाती हैं और उनका क़िताबों के प्रति रुझान बढ़ाती हैं।
एक बहुत ही खास और अलग सर्विस देती है यहाँ की लाइब्रेरी जो है, जिसे "बुक मोबाइल सर्विस" (डदृदृत्त् थ्र्दृडत्थ्ड्ढ) कहते हैं। एक बड़ी बस जो किताबों, बड़ी मुद्रित पुस्तकों, सीडी, डीवीडी, पत्रिकाओं और नवीनतम सामग्री से व्यवस्थित रहती है और हर हफ्ते में एक दिन आपके निवास के पास एक निर्धारित स्थान पर एक घंटे के लिए आती है। आप इसमें अपने पसंदीदा सामान चुन सकते हैं और निश्चित समयावधि के बाद उसे वापस जमा करवा सकते हैं। यह सुविधा न केवल उपयोगी है, बल्कि सुखद आश्चर्य से भर देती है।
फिलाडेल्फिया लाइब्रेरी कंपनी, बेंजामिन फ्रैंकलिन और उनके कुछ दोस्तों के एक समूह द्वारा 1731 में स्थापित की गयी जो कि पहला अमेरिकी सदस्यता पुस्तकालय बना। इसमें सदस्यों को किताबें उधार लेने की अनुमति थी। इसलिए पहली बार सही मायने में ये सार्वजनिक पुस्तकालय हुआ।
 सबसे बड़ी पब्लिक लाइब्रेरी "लाइब्रेरी ऑफ़ कांग्रेस वाशिंगटन डीसी है, जिसमें जिसमें 3 करोड़ 45 लाख से ज्यादा खंड हैं और सबसे बड़ी एकेडेमिक लाइब्रेरी हैं हार्वर्ड यूनिवर्सिटी लाइब्रेरी, जहां एक करोड़ 68 लाख से ज्यादा खंड हैं।
सबसे ज्यादा अमेरिका से जाने वालों को, खासकर जिनको थोड़ा भी पढ़ने-लिखने का शौक है, एक बात की सबसे ज्यादा याद आती हैं, वो है यहाँ की पब्लिक लाइब्रेरी। इनमें असीम ज्ञान और सुविधाओं का भण्डार है। जैसे हर सवाल का जवाब यहाँ मौजूद है।

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