ISSN 2249-5967

 

सुषमा शर्मा

सम्पादक
क्यूँ मुझे बार-बार दिखता है उसकी आँखों में प्यार दिखता है
CATEGORY : ग़ज़ल 01-Mar-2017 12:01 AM 967
क्यूँ मुझे बार-बार दिखता है  उसकी आँखों में प्यार दिखता है

एक

क्यूँ मुझे बार-बार दिखता है
उसकी आँखों में प्यार दिखता है

उसको पाने की चाह में देखो
हर कोई बेक़रार दिखता है

क्या छुपाता है मेरी नज़रों से
अब मुझे आर-पार दिखता है

रेत बहती है इन हवाओं में
हर तरफ़ थार-थार दिखता है

ज़िन्दगी के हरेक पन्ने पर
मुझको गीता का सार दिखता है

जिसको कहते हैं देवता सारे
वो मुझे दागदार दिखता है

अब सुनीता को रोज ख्वाबों में
मुरलीवाला ही यार दिखता है।

दो

बात तेरी भी मान लेते हैं
फिर से चलने की ठान लेते हैं

सीख लेते हैं हम तजरुबों से
वो किताबों से ज्ञान लेते हैं

करना इजिहार है मुहब्बत का
उसके दिल की तो जान लेते हैं

मोल मेहनत का जब नहीं मिलता
तब ही कर्जा किसान लेते हैं

रोज होती रहें मुलाकातें
उस गली में मकान लेते हैं।

QUICKENQUIRY
Related & Similar Links
Copyright © 2016 - All Rights Reserved - Garbhanal - Version 10.00 Yellow Loop SysNano Infotech Structured Data Test ^