ISSN 2249-5967

 

सुषमा शर्मा

सम्पादक
वर्जीनिया इज़ फ़ॉर लवर्स
01-Jan-2017 12:38 AM 4675     

हिंदुस्तान की सर ज़मीन से विवाहोपरांत जब पैर उखड़े तो सीधे अमेरिका की धरती पर आकर पड़े। यहाँ की चौड़ी-चौड़ी, साफ़-सुथरी सड़कें, उन पर क़तारों में चलती बड़ी-बड़ी गाड़ियाँ, गगनचुंबी इमारतें और इन सबसे कुछ ही दूर घने, लम्बे, सीधे खड़े पेड़ों से भरे ख़ूबसूरत जंगल, हिरनों के झुंड एवं शुद्ध शांत वातावरण ने न सिर्फ़ मेरे पैरों को थामा अपितु प्रकृति प्रेमी मेरे मन को भी पूर्णत: वशीभूत कर लिया।
अमेरिका के कुल पचास राज्यों में से एक, इस दक्षिण पूर्वी राज्य में जहाँ पहली बार मेरे क़दम इस देश की धरती से जुड़े, उसका नाम था वर्जीनिया।  यह चेसपीक की खाड़ी से एप्लाचेन की पहाड़ियों तक तक़रीबन बयालीस हजार स्क्वायर मील में फैला हुआ राज्य है। यहाँ की राजधानी का नाम रिचमंड है तथा जनसंख्या 2014 के आँकड़ों के अनुसार क़रीब 83 लाख आँकी गई है।
वर्जीनिया के उत्तर पूर्वी प्रांतों में भारतीय मूल के प्रवासियों की जनसंख्या भी बड़े अंकों में नज़र आती है। इनके आसपास कुछ नए विकसित हो रहे क्षेत्रों में यह संख्या और भी अधिक दिखाई देती है। वर्जीनिया में आकर बसने वाले ज़्यादातर प्रवासी भारतीय पिछले दो दशकों के दौरान कम्प्यूटर एवं टेक्नोलॉजी से सम्बन्धित कार्यों के सिलसिले में यहाँ आए और पर्याप्त रोज़गार, बेहतर कार्यप्रणाली एवं सुख सुविधाओं को मद्देनज़र रखते हुए, देश की राजधानी से जुड़े इस राज्य में ही रच-बस गए।
इस राज्य को समय-समय पर देशवासियों द्वारा कई उपनाम भी दिए गए जिनमें से एक बहुप्रचलित उपनाम है "ओल्ड डोमिनियन"। इस उपनाम के पीछे छुपी कहानी यहाँ के इतिहास के पन्ने पलटने से मिलती है। जिसके अनुसार वर्जीनिया, अमेरिका का वह पहला राज्य है जिसके जेम्सटाउन नामक छोटे से प्रांत में पहली बार 1607 ई. में लंदन कम्पनी का क़ानून लागू किया गया था। इस उपनाम की लोकप्रियता 1861 से 1865 तक चली अमेरिकन सिविल वार के पश्चात और भी अधिक बढ़ गई तथा बीसवीं शताब्दी के अंत तक यह उपनाम इस राज्य के लिए सामान्य रूप से बहुतायत में प्रयोग होने लगा। एक दूसरा उपनाम जो वर्जीनिया की धरती के लिए प्रचलित है वह है "राष्ट्रपतियों की माता" (थ्र्दृद्यण्ड्ढद्ध दृढ द्रद्धड्ढद्मत्ड्डड्ढदद्यद्म). इस उपनाम की वजह यह है कि अमेरिका के जनतंत्र में पदासीन कुल राष्ट्रपतियों में से सर्वाधिक राष्ट्रपति इसी राज्य की देन हैं जिनकी संख्या आठ है तथा अन्य राज्यों की तुलना में सबसे अधिक है। यहाँ पैदा हुए इन आठ राष्ट्रपतियों के नाम हैं- जॉर्ज वाशिंगटन, थामस जैफरसन, जेम्स मैडिसन, जेम्स मोनरो, विलियम हैरिसन, जॉन टायलर, जैकरी टायलर एवं वुड्रो विल्सन।
उपर्युक्त उपनामों के अतिरिक्त और भी कई उपनाम जैसे "राज्यों की माता", "राजनेताओं की माता" इत्यादि भी इस राज्य के लिए इसके इतिहास से ही सम्बंधित जानकारी प्रदान करते हैं। यहाँ का इतिहास पढ़ने के पश्चात कोई आश्चर्य नहीं होता कि वर्जीनिया के इतिहास को ही कुछ लोग अमेरिका का इतिहास भी बताते हैं। इन सब नामों, उपनामों के अलावा एक स्लोगन या कहिए नारा जो कि पिछले कुछ दशकों से वर्जीनिया के लिए प्रचलन में दिखाई पड़ता है वह है "वर्जीनिया इज़ फ़ॉर लवर्स"।
"प्रेमियों के लिए वर्जीनिया!" नारा मेरे दिमाग़ की नसों में रक्त प्रवाह को बढ़ाने वाला तो था ही साथ-साथ जिज्ञासा बढ़ाने वाला भी था। इधर-उधर से किताबें बटोरने एवं कुछ दो-चार वेबसाइट नज़र से निकालने के बाद ज्ञात हुआ कि इस नारे की शुरूआत 1968 ई. में इस राज्य के पर्यटन एवं देशाटन विकास को ध्यान में रखते हुए की गई थी जो कि इस नारे की वजह से काफ़ी हद तक कारगर भी साबित हुई। वो इसलिए कि यह राज्य जहाँ घने जंगलों, कन्दराओं, पर्वतों, गुफ़ाओं तथा सुन्दर समुद्र तटों को समेटे हुए प्रकृति प्रेमियों को एक उत्तम स्थान की छवि देता है, वहीं इतिहास एवं आधुनिकता के प्रेमी जीवों की उत्सुकता के लिए भी बराबर रोमांच बनाए रहता है।
साल की चारों ऋतुएँ इस राज्य की धरती पर बख़ूबी अपना प्रभाव छोड़ती हैं। शीतकाल में तापमान शून्य से नीचे चले जाने के कारण यहाँ की क्रिसमस सामान्यतः बर्फ़ से ढंकी, श्वेत चादर-सी ओढ़े हुए बहुत ही स्वप्निल सी प्रतीत होती है। एक तो बर्फ़ और ऊपर से आसपास फैले पर्वत एवं पर्वत मालाएँ! भला फिर किस बात की कमी हो सकती है?
स्कीइंग और ट्यूबिंग के लिए इससे अच्छा माहौल और कहाँ मिल सकता है? जगह-जगह बने ख़ूबसूरत बनावट एवं सुविधाओं से सम्पन्न स्की रिसोर्ट और वहाँ होने वाली भिन्न-भिन्न गतिविधियों की चहल-पहल इस मौसम में देखते ही बनती है।
बसन्त आने के साथ आता है तरह तरह के उत्सवों एवं समारोहों का मौसम। प्रत्येक शनिवार, रविवार कहीं ना कहीं कोई ना कोई उत्सव यहाँ के स्थानीय निवासियों एवं आगंतुकों के उत्साह का केन्द्र अवश्य बना रहता है। विभिन्न प्रकार के फूलों की प्रदर्शनियाँ, संगीत सभाएँ, वाइन टेस्टिंग और ऐसे ही बहुत से अलग अलग प्रकार के उत्सवों से भरी यह ऋतु नई कोपलों और कलियों के साथ सुंदर जीव-जंतुओं की चहलक़दमी एवं गुंजन भी लेकर आती है।
ग्रीष्म ऋतु के तो कहने ही क्या? घने जंगल, ऊँचे सीधे खड़े पहाड़, सुनहरी रेत से ढंके समुद्र तट, अनेकों एतिहासिक स्थल, संग्रहालय, एवं जलक्रीड़ा उद्यानों से भरा यह प्रदेश सभी के मनोरंजन के लिए कुछ ना कुछ अवश्य प्रस्तुत करता है।
गर्मियों की छुट्टियाँ ख़त्म होने के साथ साथ शुरू होता है पतझड़ का मौसम। सुनने-बोलने में पतझड़ कुछ उदास और निर्जीव सी अनुभूति देता है मगर सही मानिए तो पतझड़ इस राज्य में उतनी ही ख़ूबसूरती बिखेरता है जितनी की अन्य सभी ऋतुएँ। इस ऋतु के दौरान यहाँ की उपजाऊ धरती से पैदा हुए घने वन वृक्षों के रंगीन पत्तों की इन्द्रधनुषी छँटा अनायास ही आगंतुकों का मन मोह लेती है। शैननडोहा की घाटी इस ऋतु में अपने पुरज़ोर सौंदर्य का प्रदर्शन करती नज़र आती है। हरे, पीले, लाल, बैंगनी, नारंगी, भूरे और ना जाने कितने ही रंगों का जमजमा इस घाटी की सुंदरता में चार चाँद लगा देता है और एक ही वर्ष यहाँ रहने के पश्चात यह लगने लगता है कि वाक़ई में वर्जीनिया इज़ फ़ॉर लवर्स।

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