ISSN 2249-5967

 

सुषमा शर्मा

सम्पादक
उमेश अग्निहोत्री
उमेश अग्निहोत्री
साठ के दशक में आकाशवाणी दिल्ली में उद्घोषक बनने के बाद किसी न किसी रूप में प्रसारण की दुनिया से जुड़े रहे। दूरदर्शन में चित्रहार कार्यक्रम की शुरुआत की और रेडियो और टेलीविज़न पर कॉमेंटेटर रहे। कहानियां और लेख प्रमुख साहित्यिक पत्रिकाओं मे भी प्रकाशित। कहानी संग्रह "गॉड-गिवन फ़ैमिली" मेधा बुक्स से प्रकाशित। दो टेली-नाटक "मूक-बधिर" और "विक्रेता", दो मंच-नाटक "सुबह होती है, शाम होती है" और "धर्मयुद्ध" प्रकाशित। अमेरिका में अपनी नाटक मंडली "प्रवासी कला मंच" के लिये लगभग 20 नाटकों का मंचन और निर्देशन किया। 1996 से वॉशिंग्टन क्षेत्र के "इमेज इन एशियन" टेलीविज़न प्रोग्राम के लिये "अमेरिका में भारतीयों के सांस्कृतिक अनुभव" पाक्षिक प्रकरण पेश करते हैं। सम्प्रति - रंगकर्म में संलग्न।

अभिशप्त
उन दिनों मैं आकाशवाणी में प्रोड्यूसर था और झुग्गी-झोंपड़ी कॉलनियों में रहनेवाले लोगों के जीवन पर एक कार्यक्रम तैयार कर रहा था। मैंने ट्रांसपोर्ट सैक्शन के इंचार्ज दक्षणी को एक दिन पहले ही कार का इंतजाम करने के लिये कह दिया था। मैंने सोच रखा था कि द
दूसरी शादी
मॉम क्या आप दूसरी शादी करोगी? दूसरी शादी के बारे में पूछने के बहाने सिद्धार्थ दरअसल कई बातें नंदिता को कह रहा था। जैसे कि, ...भले ही पापा दुनिया से चले गये हैं, इसका मतलब यह नहीं है कि जिंदगी खत्म हो गयी है। ...आप भले ही पचपन की हो, अब भी मुश्किल
सच्चे मित्र हैं पुस्तकालय
विदेश पहुंचने के पश्चात अक्सर प्रवासियों को अपने देश की याद सताती है। मुझे भी अमेरिका पहुंचने के बाद भारत की बहुत याद आती थी, लेकिन एक चीज़ जिसने उदास होने से बचाये रखा वे थे अमेरिका के पुस्तकालय। वहां पहुंचकर मैंने नोट किया कि अगर शहर में स्कूल, ग
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