ISSN 2249-5967

 

सुषमा शर्मा

सम्पादक
तिआन केपिंग
तिआन केपिंग
बीजिंग विश्वविद्यालय से हिन्दी में एम.ए.। चीन सरकार की फ़ेलोशिप पर हिंदी में प्रवीणता के लिए केंद्रीय हिंदी संस्थान, आगरा में अध्ययन किया। दिल्ली में विश्व हिंदी दिवस पर हिंदी में भाषण दिया। अखिल भारतीय हिंदी वाद-विवाद प्रतियोगिता में भाषा पुरस्कार मिला। गुजरात की मुख्यमंत्री की चीन यात्रा के दौरान उनकी निजी हिंदी अनुवादक रहीं। सम्प्रति - गुआंग्डोंग विदेशी अध्ययन विश्वविद्यालय, गुआंगज़ौ, चीन के हिंदी विभाग में लेक्चरर हैं।

हिंदी से चीनी संस्कृति की आत्मा छूना बी.आर. दीपक की चीनी कविता पर कुछ विचार
प्राचीन काल से ही चीन और भारत दोनों कविता के देश हैं। कविता मानवीय संस्कृति की आत्मा भी कही जा सकती है। कुछ लोग कहते हैं कि कविता का कभी भी अनुवाद नहीं किया जा सकता। यह बात असत्य तो नहीं है, बल्कि इसका मतलब यह नहीं है कि कविता के अनुवाद करने का का
रस प्रधान भारत और चीनी स्वाद
पश्चिमी लोगों के ख्याल में स्वाद या रस का मतलब केवल शारीरिक जरूरत मिलने के लिए है, सौंदर्यबोध से संबंध नहीं रखा जाएगा। प्लेटो ने कहा था कि अगर हम कहते हैं कि स्वाद और सुगंध न केवल प्रसन्नता है बल्कि सुन्दर भी है, तो लोग हम पर हंसी उड़ाएंगे। इस बात
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