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सुदर्शन प्रियदर्शिनी
सुदर्शन प्रियदर्शिनी
लाहौर, पाकिस्तान में जन्म। पंजाब विश्वविद्यालय से एम.ए., पी.एच.डी. कुछ समय तक सरकारी कॉलेज लुधियाना में प्राध्यापिका रहीं। 1982 में अमरीका आईं और अब ओहायो में रहती हैं। वर्षों तक क़द्धठ्ठढ़द्धठ्ठदड़ड्ढ पत्रिका का प्रकाशन किया। अमेरिका में हिंदी के प्रचार-प्रसार के लिए श्रेष्ठ नाटकों, हिंदी फिल्मों के नामी कलाकारों और गायकों के दर्जनों प्रदर्शन करवाये। प्रकाशित कृतियाँ : कहानी संग्रह- रेत की दीवार, कनिका, सूरज नहीं उगेगा तथा काँच के टुकड़े। कविता संग्रह- शिखण्डी युग।

अवैध नगरी
अचानक उसकी दृष्टि स्थिर हो गई। जिस ट्यूब को वह देख रहा था, उसमें उसकी चेतना मूर्त होकर पत्थर हो गई थी। कहीं कुछ दरक गया था। संशयों और अविश्वास के बीच उस की अंगुलियां ठिठक गई थी और मानसिकता कुंद हो गई थी। ऐसे कैसे हो सकता है!क्या सच में
पुत्र के नाम
मेरी मौत एक दिनकागज का टुकड़ाबन करतुम तक पहुंचेगी... तुम शून्य में ताक करएक बारगीबस रंगहीन होगेऔर पल भर मेंकागज का टुकड़ामरोड़ कररद्दी कीटोकरी में फेंक दोगे... 
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