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नीदरलैंड के फिल्म महोत्सव और यूरोप
01-May-2017 07:07 PM 3175     

भारत में वालीवुड और विश्व में हॉलीवुड का चकाचौंधी हल्ला है, जिसमें क्राइम, अंडरवल्र्ड के कारनामों और वारदातों के जोखिमों का जोश और शोर, जंग और जश्न का रुतबा दिखायी देता है, जिसमें मनुष्यता के घुटन की पीड़ा का दंश भी हुंकारता हुआ महसूस होता है, लेकिन यूरोप की फिल्मी दुनिया का चरित्र हॉलीवुड और वॉलीवुड से बिल्कुल इतर है, जो अपनी आकर्षक अस्मिता के साथ है, जिसमें यूरोपीय जनजीवन के संघर्ष की पर्ते उघड़ती हुई देखी जा सकती है। जबकि यूरोपीय देशों में फिल्में देखने से अधिक थियेटर में नाटक और म्युजिक कन्सर्ट देखने का चलन है। महीनों पहले इनके टिकट बुक हो चुके होते हैं। दरअसल, यूरोपीय दुनिया में फिल्मों में ठसे और ठूँसे हुए जनजीवन में चरित्र, दांवपेंच और असंवेदनहीनता के रहस्य इतने उधड़ चुके हैं कि लोग थियेटर में जाकर फिल्मों का देखना बिल्कुल, गैरजरूरी समझते हैं।
नीदरलैंड के व्यापारिक शहर रोतेदम में दो महत्वपूर्ण कला-साहित्य की अंतर्राष्ट्रीय संस्थाएं हैं- एक है- पोयट्री रोतेदम इंटरनेशनल और दूसरी है इंटरनेशनल फिल्म फेस्टवेल रोतेदम। दोनों ही संस्थाएं- शहर के चौकोर स्क्वॉयर पर स्थित है। कविता का समारोह यदि जून माह में वैश्विक स्तर पर आयोजित होता है तो वार्षिकोत्सव के रूप में जनवरी के अंतिम सप्ताह में अंतर्राष्ट्रीय पिल्म महोत्सव रोतेदम (इंटरनेशनल फिल्म फेस्टवेल, रोतेदम क्ष्क़क़ङ) का वृहत आयोजन होता है। जो 1972 से आयोजित होता आ रहा है। रूतगर वोल्फसन (ङद्वद्यढ़ड्ढद्ध ज़्दृथ्ढद्मदृद) इसके आयोजक रहे हैं, जिसमें बिप्रो टाइगर (ज्द्रद्धदृ च्र्त्ढ़ड्ढद्ध) नाम से पुरस्कार की शुरुआत हुई, जिसमें चालीस हजार यूरो की पुरस्कार राशि है। विशेष जूरी पुरस्कार के लिए दस हजार यूरो की राशि मनोनीत है, जो कलात्मक फिल्मों को प्रदान की जाती है। 1999 में किस्टोफर नोलान को टाइगर एवार्ड प्रदान किया गया, जो आजकल ब्लॉकबस्टर के लिए सक्रिय है।
नीदरलैंड के इंटरनेशनल रोतेदम फिल्म फेस्टेवल में डच भाषी फिल्मों सहित अन्य फिल्मों की प्रीमियर प्रस्तुति की जाती है, जिसके अंतर्गत कुछ लघु वृत्तचित्र और फीचर फिल्में भी प्रदर्शित की जाती हैं। इसमें लघु, स्वतंत्र और बहुत अधिक न जाने जाने वाले निर्देशकों की फिल्में भी दिखायी जाती है, जहां हॉलीवुड जैसा स्टन्ट और टेरर नहीं होता है। इसके संस्थापक ह्यूबेर्ट बाल्सा (क्तद्वडड्ढद्धद्य एठ्ठथ्द्म) हैं जिनके फंड के अंतर्गत निर्माताओं को फिल्म निर्माण के लिये सहयोग राशि भी प्रदान की जाती है। ह्यूबेर्ट जो फिल्मी दुनिया में हब नाम से विख्यात रहे। ऐसे सृजनधर्मी फिल्म मेकर चाहते थे कि विश्व की छोटी, अनजान और अपहचानी फिल्मों को जनता के बीच लाया जाये क्योंकि उनमें वास्तविक जीवन से जुड़ी सच्ची संवेदनशील कहानियों का अंश धड़कता हुआ महसूस होता है। वे चाहते थे कि व्यक्तिगत और कला फिल्मों को अर्थ की दृष्टि से हॉलीवुड मूवी श्रृंखला में शामिल होने से पहले उनका यूरोपीय दर्शकों के सामने प्रदर्शन हो तो बेहतर रहेगा। धीरे-धीरे इस नजरिए का सम्मान बढ़ता गया और अन्य देश-भाषा की फिल्में भी इस योजना में शामिल होने लगी। 3 जुलाई 1988 को ह्युबेर्ट बॉल्स के आकस्मिक निधन होने से इस योजना को जारी रखने के लिए पुन: सहायता कोष की संरचना की गई, जिसके 1990 में इटली के मार्को मूलर सलाहकार और प्रमुख आयोजक घोषित किये गये।
रोतेदम का यह फिल्मोत्सव यूरोप और नीदरलैंड की आकर्षक घटना हो गया है। धीरे-धीरे करके यह डच देश के विशाल फिल्म फेस्टवेल में तब्दील हो चुका है। सन् 2015 ई. तीन सौ हजार से अधिक दर्शक थे, जिसमें अब तक पांच सौ अधिक यूरोपीय और वैश्विक फिल्मों का प्रदर्शन किया गया है। इसमें दर्शक लोग फिल्म निर्माताओं और कलाकारों से व्यक्तिगत रूप से मिलते हैं तथा बार और लाउन्च में खुलकर संवाद करते हैं।
नीदरलैंड में 2010 में 45वां रोतेदम फिल्म फेस्टवल सम्पन्न हुआ और बहुत चर्चित रहा, जिसमें दुनियाभर के लोग उपस्थित थे। नयी फिल्मों और वीडियो में बंद प्रतिभाओं का यह सफल मंच सिद्ध हुआ। इस संगठन के फिल्म निर्माता और वितरक प्रत्येक वर्ष दुनिया भर में यात्राएं करते हैं, जिसमें नये फिल्म निर्माताओं और कलाकारों तथा लेखकों का चयन कर सके। यह फिल्म उत्सव फिल्म निर्माताओं के कलाघर के वेनिस फिल्म महोत्सव में बहुत प्रसिद्ध है, जिसे जार्ज कोलोनी समायोजित करते हैं। रोतदम पिल्म महोत्सव में कुछ एक घंटे की लघु फिल्में भी शामिल की जाती हैं, जिनका उद्देश्य बहुत स्पष्ट होता है। इन फिल्म उत्सवों में शिरकत करने के बाद यूरोपीय और डच फिल्मों की सांस्कृतिक ताकतों से रूबरू होने का अविस्मरणीय अवसर मिलता है और उनसे प्यार होने लगता है। उनकी प्रस्तुति कथ्य हॉलीवुड फिल्मों के स्टन्ट, क्राइम, अंडरवर्ड की खौफनाक दुनिया से अलग मनुष्यता और संवेदना से भरपूर होती है, जो मानवतोन्मुखी बनाती हैं और दुनिया से जुड़ने का हौंसला जगाती है। फास्ट एण्ड फ्यूरिस, ब्यूटी एण्ड बीस्ट, द बास बेबी, द अदर साइड ऑफ होप, टवेन्टीयथ सेन्चुरी बुमेन, एलोस, गोइंग इन स्टाइल, घोस्ट इन दी सेल, ग्लोरी, ट्रेन टु बुसन, काँग, स्कल आइलैंड और फ्रेंच फिल्म-फोयर डु पायस विशेष चर्चित है।
रोतदम इंटरनेशनल फिल्म फेस्टवेल में चाहक टिकट तो खरीद ही सकता है। साथ ही संगीत और नाटक थियेटरों की तरह ही अपने नाम का एकाउंट खोलकर सदस्यता ले लेता है, जिससे फिल्मों के प्रदर्शन की सारी सूचनाओं के वर्ष भर के कैलेन्डर भी हमेशा के लिए हासिल हो जाता है।
बहुसंस्कृतिशाली नीदरलैंड कला और संस्कृति का अनोखा धनी देश है, जहां संस्कृति की विभिन्नता की सुगंध और सौंदर्य को अनुभव किया जा सकता है, जहां सांस्कृतिक ताज़गी की बयार बहती है। देनहाग, अम्स्टर्ड्म, ब्रामन में कई सिनेमाघर हैं। नार्थ हालैंड में अलकमार और हैरग वार्ड में सिनेमाघर के अलावा ऐन्डहोफेन, उडेन, ब्रेरेडा और ओस्टहाउट में आकर्षक ढंग के सिनेमाहाल है।
लायन, शेर की छवि का प्रतीक धारण किये हुए रोतेदम फिल्म फेस्टवेल समय-समय पर दूसरे देशों से संपर्क करके और कन्ट्रैक्ट बनाकर वहां के थियेटरों में अपनी फिल्मों का प्रदर्शन करता है। 2003 में सूरीनाम के पारामारिबो शहर में अद्भुत प्रस्तुतियों के कारण पूरा शहर आकर्षक सिनेमाघर में बदल गया था। यहां की प्रस्तुति की अनोखी अविस्मरणीय विशिष्टता यह रही थी कि जो फिल्म स्क्रीन पर प्रदर्शित की जाती थी, उसी के समानान्तर किन्हीं संवेदनशील दृश्यों में वास्तविक कलाकार मंच पर अभिनय करते हुए मुद्राओं की अभिव्यक्ति करते थे। जो अपने आप में दर्शकों के लिए यादगार अनुभव रहा। वस्तुत: नीदरलैंड देश की फिल्मी दुनिया में यूरोपीय देशों का फिल्मी चरित्र समाहित है, जो वैश्विक चरित्र का होते हुए भी यूरोपीय अस्मिता का प्रतिनिधि हैं

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