ISSN 2249-5967

 

सुषमा शर्मा

सम्पादक
मेरी कविता
CATEGORY : कविता 01-Feb-2017 12:52 AM 1042
मेरी कविता

गाय को गुड़
चिड़िया को दाना
भूखे की रोटी है कविता
सूरदास की आंख
जटायू पांख है कविता
कभी खेत की फसल
वीरों की नस्ल है कविता

पर आज उदास है मेरी कविता
बाजार के शोर में दबे
सन्नाटे की बातें सुनती
गरम तवे से तपते राजपथ पर
दु:खों की गठरी को ढ़ोए
नंगे पैर भटकते जन की
पगरखी है मेरी कविता

सत्ता की चौड़ी छाती में
दफ़्न वादों की कब्रगाह पर
मातम करती मेरी कविता

मर्यादा की पाग संभाले
जिन्ह आंखों मंे आंसू सूखे
उनमें आश के सपने बोती
मेरी कविता
    
अक्षर का संजीवन पीकर
विष-कंबल कांधे पर रख कर
नेह से सींचित नई धरा में
संस्कार के स्वप्न बीज से
नव युग का अंकुरण करती
मेरी कविता।

कभी भोर की किरण
चहक गौरेया सी
कभी हरश्रृंगार की
बिछी चादर है मेरी कविता

नवजात शिशु के होठों पे चमकता
मां की छाती का दूध है वह
बाबा का आशीष
प्रतीक्षा मां की
बिटिया की मुस्कान
सदा से मेरी कविता

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