ISSN 2249-5967

 

सुषमा शर्मा

सम्पादक
शार्दुला झा नोगजा
शार्दुला झा नोगजा
1 सितंबर 1968 को गांव बनकट्टा, बिहार में जन्म। कोटा, राजस्थान से अभियांत्रिकी में स्नातक तथा जर्मनी से कम्प्यूटेशनल अभियांत्रिकी में स्नातकोत्तर। कविताएं विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं तथा संकलनों में प्रकाशित। सिंगापुर हिंदी फाउंडेशन की सक्रिय सदस्य और सलाहकार। सम्प्रति - सिंगापुर में ऑयल, गैस एवं ऊर्जा विशेषज्ञ।

सुनो माँ! बात करनी थी!
सुनो माँ! बात करनी थी!तुम्हें वो याद हैमिट्टी की गुल्लक दो रूपये वालीउसे मैं भूल आई हूँ वहीं आले के कोने मेंवो पूरा भर गया होगा!अब बाबूजी नहीं हैं तोबड़े भैया ने हौले सेहरेक पहली सितम्बर कोरखे होंगे नए
सिंगापुर का आखिरी कम्पोंग
सिंगापुर में गांव को "कम्पोंग" कहा जाता है। यह मलय भाषा का शब्द है। सन् 1965 में मलेशिया से सिंगापुर की आज़ादी के बाद, तेज़ी से सुख सुविधा से लैस आवासीय परिसर बनने लगे। सरकारी बहुमंज़िली ईमारतों का निर्म
सिंगापुर की फ़िल्मी दुनिया
सिंगापुर में ये बात बहुत प्रियकर है कि यदि फ़िल्म अच्छी हो और सही तरहसे मार्केट की गई हो तो मलय, चीनी लोग भी हिंदी फ़िल्में देखने आते हैं।उदाहरण के लिए दंगल देखने वालों में बहुत-सी संख्या चीनी लोगों की
युद्ध की कालिख
भूरी धरती के स्याह माथे परतुमने देखी है युद्ध की कालिख?खून, बारूद में सने बच्चे!अपने हाथों में माँ का हाथ लिएएक आवाक बेजुबां बच्ची!तुमने देखा है अपने लालच कोबम धमाकों में यूँ बदलते हुए?ये जो चुप्पियाँ
QUICKENQUIRY
Related & Similar Links
Copyright © 2016 - All Rights Reserved - Garbhanal - Version 12.00 Yellow Loop SysNano Infotech Structured Data Test ^