ISSN 2249-5967

 

सुषमा शर्मा

सम्पादक
2019 apr
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प्रमोशन और साहित्य का संकट
प्रमोशन और साहित्य का संकट सेमीनारों में वक्ताओं के भाषण साधारण पाठक की चेतना से भी निचले स्तर के होते हैं और सेमीनार के बाद सभी लोग एक-दूसरे की पीठ ठोंकते हैं, गैर शिक्षक श्रोता फ्रस्टेट होते हैं, वे मन ही मन धिक्कारते हैं और कहते हैं कि वे सुनने क्यों आए
साहित्य का कुल-गोत्र
साहित्य का कुल-गोत्र आज जब समानता और न्याय आधारित, सबकी स्वतंत्रता, अभिव्यक्ति, गरिमा और सम्मान की रक्षा करने की गारंटी देने वाले संविधान से संचालित देश को चलाने के लिए प्रतिनिधियों का चुनाव होने जा रहा है तो अचानक आस्थाओं, गोत्र, जाति और धर्म के परिचय पत्र माँगे जा र
परिवारवाद और भाषा
परिवारवाद और भाषा जब भी भाषाओं की बात आती है तो उनके जिक्र के साथ एक पदक्रम जैसा संबंध भी आता है। सेना के अधिकारियों/सिपाहियों की तरह भाषाओं का भी पदक्रम निर्मित किया जाता है। किसी भाषा विशेष के लिए देव भाषा, ईश्वरीय भाषा, खुदा की भाषा, गॉड की भाषा के साथ-साथ देवी
भारत और पाक़िस्तान के प्रति अणुशस्त्र
भारत और पाक़िस्तान के प्रति अणुशस्त्र भारत और पाक़िस्तान के प्रति समझो बन्दे पाक़िस्तान!समझो बन्दे हिन्दुस्तान!जागो, देखो, आँखें खोलोदुहराना न वही दास्तान! शरीर अलग है तुम दोनों का, अलग रहेगा, यह समझोमन तो फिर भी एक ही ठहरा, एक रहेग
ऐ कवि सूरज उदास है
ऐ कवि  सूरज उदास है ऐ कवि ऐ कवि तुम्हारी कविताओं मेंलड़कियां सिर्फ श्रृंगार में क्यों डूबी होती हैं तुम गुलाबी गाल नागन-सी जुल्फ और गोरे रंग पर लिखते हो क्यों तुम्हे कंडे पाथतीपपड़ी पड़े होठों और रूखे बालों वा
रोचक व्यंग्य संग्रह
रोचक व्यंग्य संग्रह हिंदी व्यंग्य लेखन में महिला लेखिकाओं की संख्या बहुत कम रही हैं। लेकिन अब इस विधा में कुछ महिलाएं अपनी सशक्त व्यंग्य रचनाओं के साथ आ रही हैं। इनमें समीक्षा तैलंग व्यंग्य के आकाश में एक चमकता सितारा बनकर उभर रही है। नयी पीढ़ी की होनहार लेखिका समीक्ष
योरोप के बदलते मूल्यों पर नज़र
योरोप के बदलते मूल्यों पर नज़र देसी चश्मे से लन्दन डायरी - योरोप के बदलते परिवेश, समाज और मूल्यों का विचारशील व रोचक लेखा-जोखा है। विविध शीर्षकों के तले लन्दन की संक्षिप्त लेकिन महत्वपूर्ण जानकारी, पाठक की जिज्ञासा बढ़ाती जाती है और अन्त तक उसे क़ायम रखती है। हमें भारत में बैठ कर
स्वदेश दीपक अन्याय देवशिशु के साथ
स्वदेश दीपक अन्याय देवशिशु के साथ सन् 1986 में या उसके बाद अम्बाला के लेखक स्वदेश दीपक ने पत्रिका "गंगा" और "कहानियाँ" में एक अपील छपवाई थी कि उनकी कहानी "बाल भगवान" चुरा कर उस पर फिल्म निर्देशक उत्पलेन्दु चक्रवर्ती ने "देवशिशु" नाम से फिल्म बनाई है। हक की लड़ाई लड़ने के लिए लेखक ने
लखनऊ स्टेशन से दूसरी किस्त
लखनऊ स्टेशन से दूसरी किस्त हमारी शादी तय होते ही मेरे ससुरजी ने गुरुवार के उपवास का व्रत लिया था कि मैं चुनी जाऊँ। यह श्रद्धा भी समाज में बड़ी ऊर्जा और संबल भरती है। इधर मेरी माँ ने भी शनिवार के उपवास का व्रत ले रखा था। सबके आशीर्वाद और मेरी मेहनत का फल, जू
क़ज़ाक़ और हिंदी समानता और अंतर
क़ज़ाक़ और हिंदी समानता और अंतर जैसा कि ज्ञात है, कजाकिस्तान और भारत के बीच लंबे समय से मित्रतापूर्ण संबंध हैं, जिसको कजाकिस्तान स्वतंत्र हो जाते ही विकास के लिए एक नया आवेग प्राप्त हुआ था। फरवरी 1992 में हमारे देशों के बीच राजनयिक और कांसुलर संबंध स्थापित किये गये थे। और वह तथ्
समकालीन कविता की संवेदनहीनता
समकालीन कविता की संवेदनहीनता जब समकालीन कविता के रूप-स्वरूप व कलेवर की बात आती है तो चारों तरफ संवेदनहीनता दिखाई देती है और बाजारवाद गर्म दिखाई देता है। मनुष्य के लिए उपस्थित इस संकटकाल में कविता जन आंदोलनों से प्रभावित होकर लोकतंत्रात्मकता की ओर झुकी हुई दिखाई देती है।
आषाढ़ का एक दिन तर्क और दीवानगी के बीच का संवाद
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चीनी कवि तियांहे की कविताएँ अनुवाद : साधना अग्रवाल तियांहेचीन के समकालीन कवियों में वे महत्वपूर्ण हस्ताक्षर माने जाते है। उनका जन्म हुबेई के ग्रामीण इलाके में हुआ। आपने 1982 से गांव को केन्द्र में रखकर कविता लिखना आरंभ किया। उनके 14 कविता संग्रह प्रकाशित हो चुके हैं, जिनमें
भाषा और देश
भाषा और देश भारतीय संस्कृति और साहित्य की लोक और शास्त्रीय परम्परा का प्रतिनिधित्व करने वाले आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी की याद आती है। उन्होंने अपने ललित निबंधों के अलावा भी भारत की भाषा, साहित्य, संस्कृति, समाज और जीवन से जुड़ी बहुआयामी ध्वनियों को अपने विच
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वाल्मीकि रामायण : आधुनिक विमर्श-26 दूत हनुमान : भाग-5 इस संसार में सफलता का मूल मंत्र परिश्रम है, पर "मंजिल" तक पहुँचना इतना सीधा कार्य नहीं है। ऐसा जरूरी नहीं है कि हमेशा मेहनत का पूर्णतयः फल प्राप्त हो, अनेक उद्यमियों को कभी कभी बड़ी विषम परिस्थितियों का सामान करना पड़ता है और दूसरी ओर कुछ लोगों को आ
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