ISSN 2249-5967

 

सुषमा शर्मा

सम्पादक
2018 sep
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तकनीकी और भाषा
तकनीकी और भाषा भाषा की विशद् व्याख्या न कर भारतीय भाषाओं और मुख्यत: हिन्दी के संदर्भ में अपनी बात रखूँगा। भाषा की समझ के लिए लिपि, शब्द और व्याकरण को समझना आवश्यक है। लिपि भेद कई हैं - रैखिक, जटिल, बाएं से दाएं, दाएं से बाएं, ऊपर से नीचे, वर्णात्मक, चित्रात्मक,
उत्सव, उत्साह और गौरव के परे हिन्दी का सच
उत्सव, उत्साह और गौरव के परे हिन्दी का सच हिन्दी विश्व की सर्वाधिक बोली जाने वाले पहली, दूसरी, तीसरी भाषा है या जैसा भी उत्साही भक्तों को लिखने-बोलने के उस क्षण में उचित लगे। हिन्दी विश्व के कितने देशों में बोली और कितने विश्वविद्यालयों में पढ़ाई जाती है यह भी उत्साही सेवकों की गणना पर निर
हिन्दी और हिन्दुस्तानी का प्रश्न फिर क्यों
हिन्दी और हिन्दुस्तानी का प्रश्न फिर क्यों विगत दिनों सिनेमा पटकथा लेखक और उर्दू के कवि श्री जावेद अख्तर ने हिंदुस्तानी का सवाल उठा कर गढ़े मुर्दे उखाड़ने का प्रयास किया है। शायद जावेद जी भूल गए हैं या भूलने का बहाना कर रहे हैं या सुर्खियों में आने के लिए ऐसे ब्यान दे रहे हैं। उन्हें अगर ध्य
राष्ट्रभाषा हिन्दुस्तानी और महात्मा गाँधी
राष्ट्रभाषा हिन्दुस्तानी और महात्मा गाँधी आजादी के बहत्तर साल बीत गए। आज भी हमारे देश के पास न तो कोई राष्ट्रभाषा है और न कोई भाषा नीति। दर्जनों समृद्ध भाषाओं वाले इस देश में प्राथमिक से लेकर उच्च शिक्षा तक और न्याय व्यवस्था से लेकर प्रशासनिक व्यवस्था तक सबकुछ पराई भाषा में होता है फिर भी
हिन्दी भाषा
हिन्दी भाषा भा षा वह है, जो सुनाई भी दे और दिखाई भी दे। वह सुनाती हुई दिखाये और दिखाती हुई सुनाये। किसी भी भाषा का यही जीवन है और किसी भी जीवन की यही भाषा है। मनुष्य की कोशिश अपने आधार और लक्ष्य को एकने की रही है। इससे आधार और लक्ष्य एक होकर भी दो
प्रेम-कैदी
प्रेम-कैदी ऊँ ऊँ हूँ! छोड़ो न मुझे! खाना बनाना है? बच्चे भी आने वाले होंगे। क्या कहेंगे वे, मुझे तुम्हारे साथ इस तरह देखेंगे? चलो थोड़ी देर और सही, उसके बाद बिलकुल नहीं।तुम भी बड़े वो हो! छोड़ते ही नहीं मुझे एक पल को भी। चलो ठीक है, चलो किचन मे
जुगलबंदी सम्मलेन में कवि
जुगलबंदी सम्मलेन में कवि जुगाडू कवि दूर समुद्र पार जुगलबंदी भाषा सम्मेलन में पहुँच गए। हर सरकार में हलवा पूरी जीमने का उनका अधिकार है, वे हर सरकार में सत्ता के गलियारे में कूदते-फांदते रहते हैं और कोई न कोई जुगाड़ बिठा ही लेते हैं। जरूरत पड़ने पर विरोधियों का भी विरोध कर ले
भाषा का अप्रतिम योद्धा
भाषा का अप्रतिम योद्धा सिर्फ पांचवी कक्षा तक स्कूल गए हाल ही में दिवंगत तमिलनाडु के पांच बार मुख्यमंत्री रहे एम. करुणानिधि ने तमिल भाषा, साहित्य के जरिए राजनीति और समाज में वह स्थान हासिल कर लिया जो हिन्दी में कोई नहीं कर पाया। भाषा मनुष्य के जिंदा होने का प्रमाण है और
वाल्मीकि रामायण : आधुनिक विमर्श-23 दूत हनुमान : भाग-2
वाल्मीकि रामायण : आधुनिक विमर्श-23 दूत हनुमान : भाग-2 संयोग से कहानी बनती है। वाल्मीकि एक कुशल कहानीकार हैं। समस्या जटिल हो सकती है, लेकिन कुछ तो रास्ता निकलना ही चाहिये! कवियों के लिये दुनिया स्वाभाविक होती है। उलझनें आती हैं और जाती भी हैं। उलझन में अपनी बुद्धि को साहस से और मन को दृढता से तैयार रख
हिन्दी में काम
हिन्दी में काम हिन्दी में काम करती हूँ तो अक्सर अंग्रेज़ी से भी टकराना ही पड़ता है। लैपटॉप पर काम करने और 24 घंटे उपलब्ध इंटरनेट की सुविधा ने गूगल से भी ख़ासा परिचय करा दिया है। फिर भी गूगल पर पूरी तरह निर्भर नहीं रहने की सतर्कता बरतती हूँ। हाँ, राह दिखाने के लिए ग
दास्ताने-ज़ीस्त ज़िंदगी
दास्ताने-ज़ीस्त  ज़िंदगी ज़िंदगीहासिल हुई न जन्नत, न दोज़ख़ मुझकोबे-मौत मैं मारा गया, दिल दे के तुझको। कभी ख़ुशहाल किया तो कभी बेज़ार मुझेगो कि हर रंग में तूने सताया मुझको। शुक्रिया, जो आईना दिखाया मुझकोसोया था मैं, तूने जगाया मुझको।रो
भाषा, समाज और राज्य
भाषा, समाज और राज्य यह एक तथ्य है कि भाषा पहले आती है और तरह-तरह के रूपाकारों में बहते हुए स्वरों में और पक्षियों के कलरव में बस जाती है। सदियों तक उसके निराकार शब्द वृक्षों पर लगी पत्तियों की तरह हवा में डोलते रहते हैं क्योंकि उन्हें कोई बोलने वाला नहीं होता। आदमी ब
दक्षिण कोरिया में हिन्दी
दक्षिण कोरिया में हिन्दी कोरिया और भारत का संबंध लगभग दो हजार साल पुराना है। पहली शताब्दी में भारत के उत्तर प्रदेश के अयोध्या नगरी की राजकुमारी का विवाह कोरिया के राजकुमार के साथ हुआ था। उनके दस पुत्र थे। जिसमें से अंतिम दो पुत्रों का उपनाम राजकुमारी के उपनाम के आधार पर र
11वाँ विश्व हिन्दी सम्मेलन, मॉरीशस "ग्यारह" दिन चले अढ़ाई कोस
11वाँ विश्व हिन्दी सम्मेलन, मॉरीशस ग्यारहवें विश्व हिन्दी सम्मेलन में शामिल होने के लिये पुणे-दिल्ली विमान प्रवास में अचानक ये पंक्तियाँ मन में उदित हुईं। भारत सरकार के प्रतिनिधिमंडल के साथ 16 अगस्त को देर रात दिल्ली से मॉरीशस के लिये रवाना हुए और अगली सुबह वहाँ पहुँचे।हवाई अ
स्वतन्त्र वातावरण में घुटन
स्वतन्त्र वातावरण में घुटन नीता तेज कदमों से चलकर पार्क में पहुँची। उसे डर था कि कहीं सुजाता उसकी प्रतीक्षा करके चली न जाये। रात उसने मुझे फोन करके जरूर ही आने को कहा था, शायद अपने मन की कोई बात मुझसे करना चाहती थी। तुषार आज जल्दी उठ गये और उन्होंने मुझे चाय के लिए रोक लिया
उर्दू ज़ुबान का हिन्दी लेखक
उर्दू ज़ुबान का हिन्दी लेखक शानी, जिनका असली नाम गुलशेर खां शानी था, उन कुछ चुनिंदा मुस्लिम लेखकों में से एक थे, जिन्होंने उर्दू की बजाय हिन्दी भाषा को अपने लेखन का माध्यम बनाया। वे अपने समकालीन साहित्यकारों में आदर के साथ जाने जाते थे। वे कई वर्ष मध्यप्रदेश साहित्य परिषद, भ
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