ISSN 2249-5967

 

सुषमा शर्मा

सम्पादक
बिहारी शब्दकोष
बिहारी शब्दकोष आरकुट पर बिहारी कम्युनिटी पर एक पोस्ट में एक्सक्लुसिव बिहारी शब्द सुझाने को कहा गया था। मतलब ऐसे शब्द या वाक्य जो सिर्फ़ बिहार में बोली और समझी जाती है। कुछ शब्द वहीं से कंट्रोल सी कर लिया और कुछ को स्वयं अपने मेमोरी से जोड़ा। और तैयार हो गया यह मिनी डिक्शनरी। बिहार स्पेशल शब्दकोष में अधिकतर शब्द तद्भ
तुम्हारी हिंदी हमारी मैथिली
तुम्हारी हिंदी हमारी मैथिली मैथिलीभाषी समुदाय इन दिनों बहुत गुस्से में है। कुछ अरसा पहले बिहार में एक अख़बार ने मैथिली को बोली करार दिया। नतीजा यह हुआ कि उस अख़बार के कार्यक्रम के बहिष्कार की अपील की गई और जिन्होंने यह अपील नहीं मानी, उनके मुंह पर कालिख पोतने तक की कार्रवाई हुई। इस दौरान मैथिलीभाषियों ने हिंदी के साम्राज्यवाद की
बोली और भाषा
बोली और भाषा बोली और भाषा कैसे एक-दूसरे के विरोधी हैं और साहित्य इन्हें कैसे संयोजित करता है, उसे ही समझने की कोशिश यहाँ हुई है। इतना समझ लेना चाहिए कि बोली और भाषा परस्पर निर्भर हैं। मतलब कि एक-दूसरे के सह हैं। परंतु सहना दोनों का समान नहीं है। एक सहता है, तो दूसरा सहाता है। देखिए, बात किसी काम की बनी या नहीं।भ
सनक, सेल्फी और भेड़चाल
सनक, सेल्फी और भेड़चाल इंटरनेट आधारित मीडिया के असीमित विस्तार से मानवीय संचार को असीमित विस्तार मिला है। सोशल मीडिया ने वर्तमान में मुख्यधारा के मीडिया जितनी जगह बना ली है। हाल तो ये है कि जो भी कुछ हम सोशल मीडिया में देखते हैं, वही सब देर-सबेर समाचार के रूप में टेलीविजन, रेडियो और समाचार-पत्र पत्रिकाओं में देखने, सुनने
मैं भी
मैं भी ये सिर्फ मानव जाति पर लागू नहीं होता बल्कि संसार की हर वस्तु पर लागू होता है। ज़रा-सी हवायें अगर एक साथ मिलकर चलने लगें तो झंझावात पैदा कर दें। धरती के सीने से विनाशकारी लावा यूँ ही नहीं निकलता। सदियों से जमी आक्रोश की आग जब अपनी तीव्रता तक पहुँच जाती है तो "और नहीं, बस और नहीं" कहकर फूट पड़ती है। माँ
अकबर प्रयाग से बड़ा नहीं हो सकता
अकबर प्रयाग से बड़ा नहीं हो सकता प्रयाग का मूल शब्द है याग जो यज् अ घञ् के योग से बना है। यागः का अर्थ होता है उपहार, यज्ञ, वह अनुष्ठान जिसमें आहुति दी जाती है। याग से पहले प्र उपसर्ग लगा देने से प्रयाग बना है। प्रयाग अर्थात एक विशिष्ट प्रकार का यज्ञ।उत्तराखंड को देव भूमि कहा गया है। वहाँ पाँच प्रयाग है- पंच प्रयाग। धौली गंगा तथा अ
गाँधी, गुरुदेव और हिंदी
गाँधी, गुरुदेव और हिंदी पिछली शताब्दी में हिंदी प्रचार के लिए समर्पित लोगों की अगर सूची बनाई जाए तो निश्चित रूप से सबसे पहला नाम राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का होगा। प्रसिद्ध है कि उनके पास आकर जब कोई व्यक्ति यह कहता था कि मैं देशसेवा करना चाहता हूँ, मुझे काम बताइए; तो उनका पहला प्रश्न होता था, आपको हिंदी आती है? जिनका उत्तर
गाँधी : रोल मॉडल होने की संभावना
गाँधी : रोल मॉडल होने की संभावना गाँधीजी की 150वीं जयंती के अवसर पर सर्वाधिक प्रासंगिक प्रश्न है कि भारत सहित दुनिया की "युवा" आबादी के लिए बापू की विरासत के क्या निहितार्थ हैं? क्या वे किताबों, इण्टरनेट, सिनेमा और मौखिक आख्यानों में कैद ज्ञान हैं जिसकी सराहना की जाती है? या वे एक संदेश हैं, एक विचार हैं जो 21वीं सदी में प्रकाश स्त
जॉब सैटिस्फेक्शन
जॉब सैटिस्फेक्शन जॉब सैटिस्फेक्शन ढूँढनी है तोे उन्हें देखें जिनके पासनौकरी नहींउन्हें देखेंजिनके भाग्य में पढ़ाई नहींउन्हें देखें जिनके पासखाने का अन्न नहींउन्हें देखें जिनके पासघर-वस्त्र नहींउन्हें देखें, जो लाचार हैंजीवन की सुख-सुविधाओं से। उन्हें देखें जो तरसते हैंजूठे खाने कोउन्हें देखें जिनके पाँव में जूते नही
हिंसा ढ़ोती परम्परा मौनम् स्तुति
हिंसा ढ़ोती परम्परा मौनम् स्तुति हिंसा ढ़ोती परम्परा हिंसा ढ़ोती क्रूर, कुरुप परम्परालगता है यह अजीब बड़ा।"बलि" कहता "धर्म" पशुवध को,कालप्रश्न कौंधता, मेरे जेहन में है धर्म "पशु" कारण खतरे में? पशु घास, चारा चरता,निरीह, कुदरत बसर, बेचारा,अकाल पड़ जाय, किसी बरस, बेल खोल चौपाये की, स्वतंत्र, करता महसूस दोपाया। धर्मान्धता धकेलती, पशुवध
ट्रिनिडाड में प्राइमरी स्कूल शिक्षा प्रणाली
ट्रिनिडाड में प्राइमरी स्कूल शिक्षा प्रणाली ट्रिनिडाड में प्राइमरी स्कूल सात वर्ष का होता है। यहां पर शिक्षा ब्रिटिश सिस्टम के अनुसार होती है। पहले दो वर्ष को फस्र्ट ईयर और सेकंड ईयर बोलते हैं तथा उसके बाद स्टैंडर्ड वन (कक्षा 1) से लेकर स्टैंडर्ड 5 (कक्षा 5) तक होता है।एक बहुत ही महत्वपूर्ण विषय जो यहां की प्राइमरी पाठशाला में पढ़ाया जाता है,
इज़रायल में हिंदी क्यों
इज़रायल में हिंदी क्यों क्षेत्रफल और जनसंख्या की दृष्टि से इज़रायल एक छोटा-सा देश है। इज़रायलवासी स्वयं इसे "मानचित्र पर बिंदु" कहा करते हैं। पर यदि इस छोटे से देश की सड़कों पर घूमें, तो उतनी सारी भाषाएँ और बोलियाँ सुनने में आ जाएँगी, जितनी कि अमरीका, रूस या भारत सरीख़े बहुजातीय और बहुभाषीय देशों में ही गूँजती हैं। और ये भाषाए
अज्ञान-तिमिर से ज्ञान-वर्चस् की ओर
अज्ञान-तिमिर से ज्ञान-वर्चस् की ओर यह पवमान मन्त्र या पवमान अभ्यारोह है, जो वैदिक युग में ज्योतिष्टोम (ज्योतिस् स्तोम या ज्योति यज्ञ) के समय गाया जाता था। वैदिक संस्कृति में पवन और पावक को पवित्र (पूङ्, पवित्र करना) करने वाला माना गया। "पवमान" (पूङ्, पवित्र करना और शानच् प्रत्यय) में दोनों अर्थ निहित है। बाह्य पवित्रता अथवा शुचि के ल
कादम्बरी मेहरा की कहानियों में नारी
कादम्बरी मेहरा की कहानियों में नारी दूर के ढोल सुहावने लगते हैं। भारत में भी लोगों को यहाँ यूके की लाइफ के बारे में सोचकर ऐसा ही लगता है। शादी के बाद विदेश में पति के साथ बसने का सपना अधिकतर भारतीय लड़कियाँ देखा करती हैं और जो यह सपने नहीं भी देखती हैं तो उन्हें भी कई बार तकदीर विदेश के अन्न-पानी और हवा में ले आती है। 1960-1970 या उससे
घुटन सुबह का सूरज
घुटन सुबह का सूरज घुटन जब भी दिल की घुटन और हालात लिखना चाहूँ अलफाज़ साथ नहीं देते हर एक बात पर लगती टोक परखामोश रहती हूँ, लब साथ नही देते। वो उलझे-उलझे ताससुरातहर घड़ी एक क़िस्से की सी शकलमुझे अंदर ही, अंदर तोड़कर रख देते हैंकुछ कहना भी चाहूँ अगर हड़बड़ाहठ जिस्म को घेर लेती हैनाज़ुक हालात साथ नहीं देते। अनरुकी-सी धाराएँ
काश कि तुमसे मुलाकात कभी न हुई होती
काश कि तुमसे मुलाकात कभी न हुई होती दोपहर के समय होस्टल के सुनसान गलियारे में "चौधरी!" पुकार सुनाई दी। इसके बाद दरवाज़े का धड़ाके से बंद करने की आवाज़ और तेज़ कदमों की आहट सुनाई दी।अनिता का फ़ोन है या कोई उससे मिलने आया। ज़ोरा होस्टल के कमरे के एक ही आरामदेह फ़र्नीचर पलंग पर अधलेटी अधबैठी पढ़ रही थी। वह थोड़ी देर पहले ही यूनिवर्सिटी से आई थी।ह
हिज्ऱ की रातों में आया लुत्फ़ इक मुद्दत के बाद
हिज्ऱ की रातों में आया लुत्फ़ इक मुद्दत के बाद एक हिज्ऱ की रातों में आया लुत्फ़ इक मुद्दत के बाद,ज़ीस्त के लम्हों में आया लुत्फ़ इक मुद्दत के बाद। याद में तेरी बहाकर अश्क़ मैं जीता रहा,मुझको बरसातों में आया लुत्फ़ इक मुद्दत के बाद। बचपने में दिल मेरा माएल हुआ कब उस तरफ,रँग की बातों आया लुत्फ़ इक मुद्दत के बाद। दास्ताने इश्क़ लिख़ने में गवाँ दी ज़िन्
सात सामाजिक पाप
सात सामाजिक पाप दु निया में धर्मों का कुछ ऐसा सिलसिला चल निकला कि व्यक्ति पापी करार दिया गया। अगर वह यूरोप का है तो चर्च की खिड़की पर जाकर कन्फेस (स्वीकार) करता है। पर अगर भारतीय सभ्यता पर नजर दौड़ायें तो यहाँ व्यक्ति अपने पाप किसी धर्माचार्य के सामने स्वीकार नहीं करता। गंगाजी में सिरा देता है। और यह भूल ही जाता है क
कज़ाखस्तान में गाँधी जयंती
कज़ाखस्तान में गाँधी जयंती प्रतिवर्ष दो अक्टूबर को महात्मा गाँधीजी का जन्मदिन भारत में गाँधी जयंती के रूप में और विश्व भर में अन्तर्राष्ट्रीय अहिंसा दिवस के नाम से मनाया जाता है। हम लोग अल फ़राबी क़ज़ाक़ राष्ट्रीय विश्वविद्यालय के प्रतिनिधि भी महात्मा गाँधीजी की स्मृति का सम्मान करने के लिए कई समारोह आयोजित करते हैं। हमारे नगर अल
कागज़ के टुकड़े
कागज़ के टुकड़े आज अंजना सफाई करने के मूड में थी। इतने कागज़ जाने कैसे इकट्ठे हो जाते हैं। इनमें से ढेरों तो ऐसे थे, जिन्हें वर्षों से, कभी देखने की, कोई आवश्यकता ही नहीं पड़ी। यहाँ तक कि वह यह भी भूल गई थी कि यह सब उसने संभाल के रखे हैं। ज़्यादातर तो किसी अवसर विशेष की सोच और तैयारी से ही सम्बन्ध रखते थे। उनको रखने क
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