btn_subscribeCC_LG.gif
2018 mar
magazine-page magazine-page
क्यों और कैसी शिक्षा
क्यों और कैसी शिक्षा सृष्टि में जीव और उसके जीवन की एक निष्पक्ष और निरपेक्ष व्यवस्था आदिकाल से है। यह व्यवस्था सृष्टि के संतुलन को बनाए रखती है। उसमें किसी प्रजाति का बढ़ना, नष्ट होना, परिस्थितियों के अनुसार परिवर्तित होकर नया रूप धारण करना आदि सब स्वाभाविक हैं। वे किस
मातृभाषा की प्रतिष्ठा से होगा समर्थ समाज
मातृभाषा की प्रतिष्ठा से होगा समर्थ समाज भाषा के अभाव में हम कैसे जीवित रहेंगे और वह जीवन कैसा होगा इसकी कल्पना ही संभव नहीं है क्योंकि हमारे जाने-अनजाने उसने हमारी दुनिया ही नहीं बदल डाली है, बल्कि उसके साथ हमारे सम्बंध का अचूक माध्यम भी बन गई है। भाषा एक ही साथ आँख भी है, दृश्य भी और द
हिंदी की कठिनाई, भाषा की नहीं
हिंदी की कठिनाई, भाषा की नहीं कठिन हिंदी बनाम सरल हिंदी का प्रश्न कोई नया नहीं है। पिछले दशकों में यह सवाल सभा-संगोष्ठियों में बार-बार उठाया जाता रहा है। हिंदी की एक व्यावसायिक पत्रिका भी एक समय अपने पन्नों पर कठिन हिंदी-गद्य के नमूनों को "यह किस देश-प्रदेश की भाषा है" शीर्षक
ऑस्ट्रेलिया में हिंदी शिक्षा के तर्क
ऑस्ट्रेलिया में हिंदी शिक्षा के तर्क ऑस्ट्रेलिया सरकार की शिक्षा नीति के बारे में विमर्श करने वाली समिति एशियन सेंचुरी पर जारी श्वेत पत्र में हिंदी को एक बड़ी एशियाई भाषा के रूप में स्वीकार किया गया है। पर भाषा को सिखाने के लिए इसका क्या मतलब है?एशियन सेंचुरी पर नई हेनरी रिपोर्ट
ड्रिंक-कथा उर्फ सुरूर नॉन एंडिंग
ड्रिंक-कथा उर्फ सुरूर नॉन एंडिंग प ढ़ा-लिखा व्यक्ति यदि शराब पीता हो तो उसे लोग "बेवड़ा" या "दारूकुट्टा" नहीं कहते हैं। उसके लिये कहा जाता है कि फलां व्यक्ति थोड़ी-बहुत शराब पी लेता है। दुबेजी के साथ भी यही था। सुबह उठने से रात बिस्तर या फिर फर्श या ओटले पर कहीं भी लुढ़कन
मौके मिल ही जाते हैं
मौके मिल ही जाते हैं समय कब पंख लगाकर उड़ जाता है, पता भी नहीं चलता। धीरे-धीरे कब एक चुलबुली लड़की से प्रौढ़ा की ओर कदम बढ़ चले अहसास ही नहीं हुआ। आज अतीत में झाँकने पर कितनी बातें परत-दर-परत खुलती चली जाती हैं। एक भोली-सी उन्नीस साल की लड़की, जिसकी किसी बात में गहराई नहीं
गीता और अन्य गीताएँ
गीता और अन्य गीताएँ गीता शब्द सुनते ही हमें उस महान ग्रंथ की याद आती है जिसे अनेक लोग धर्मग्रंथ का सम्मान देते हैं, उसे "सर्वपापहरा" और "मोक्षदायिनी" मानते हैं, अतः उसे घर में रखना और पढ़ना अनिवार्य मानते हैं, (पर कैसी विडम्बना है कि जिस मूल ग्रंथ "महाभारत" का यह अंश
मैं तुइ पाए आपन जीऊ
मैं तुइ पाए आपन जीऊ उत्तर प्रदेश के अमेठी अंचल के पास एक छोटा-सा नगर जायस भी है। इसी नगर में अवधी बोली के महाकवि मलिक मुहम्मद जायसी हुए; जिनका "पद्मावत" महाकाव्य संसार में प्रसिद्ध हुआ है।सिंहलद्वीप की सुन्दरी पद्मावती को कौन नहीं जानता। उसकी कथा घर-घर में प्रच
रवि का सत्य
रवि का सत्य पता हैमुझमें लालिमा क्यूँ है?शायदमैंने अमावस भेदकरउनींदापन और आलस्य भगाकरजग को ज्योतिर्मयकरने का बीड़ा उठाया है। लेकिन कोई क्या जानेमैं रोजानारोटी, कपड़ा और मकानजुटाने की होड़ मेंइन्
आजादी
आजादी हर बार की तरह अनदेखा आसमान देखने के लिए लगाती हैं वे उम्मीदें फिर अपनों सेहाँ हाँ वे ही जो अपनी ही भावनाओं की गुलाम हैं। वे ही जो गुलामी और मुक्ति कीकशमकश में, स्वयं से स्वयं तकसंघर्षरत अपने घर संसार को
न हारने की ज़िद
न हारने की ज़िद परम्परागत ग़ज़ल का स्वरूप क्या है? हिन्दी की वर्तमान ग़ज़ल इससे कितनी भिन्न है? हिन्दी की वर्तमान ग़ज़ल की समीक्षा के लिये नया समीक्षाशास्त्र क्यों जरूरी है? ये और कुछ ऐसे ही अन्य प्रश्न, "वो अभी हारा नहीं है" ग़ज़ल संकलन के लेखक डॉ. राकेश जोशी ने इसमें उ
ख़ुद से पहले हो, ख़ुद के बाद भी हो
ख़ुद से पहले हो, ख़ुद के बाद भी हो जब आदमी पर संसार की द्वंद्वमयी विविधता का भार नहीं आया था और वह अत्यंत प्राचीनकाल में अपने आपको उस प्रकृति के बीच देखता था जो उसकी पहुँच से बाहर थी और जिसके रहस्यों में वह प्रवेश करना चाहता था - हम यह कह सकते हैं कि जब वह बिल्कुल शिक्षित नहीं था -
आकार
आकार आज अल्पना बहुत खुश थी। उसकी छोटी-सी बेटी आदिका आज स्कूल से निकल कॉलेज में प्रवेश करने वाली थी। वह छोटी फुदकती चिरैया-सी कब उसकी हथेलियों से निकलकर खुले आसमान में कोमल पंख पसारे उड़ने लगी, उसे पता ही न चला। गोदी से निकल इतनी बड़ी हो गई कि माता-पिता स
शान्ति और प्रकाश की तलाश
शान्ति और प्रकाश की तलाश प्रश्न : क्या आपको लगता है कि कभी विज्ञान ईश्वर की सत्ता को सिद्ध कर सकेगा?टिप्पणी : नहीं। विज्ञान कभी भी ईश्वर की सत्ता सिद्ध नहीं कर सकेगा।पर क्यों?क्योंकि ईश्वर विज्ञान के क्षेत्र के बाहर की चीज़ है।पर अभी तो समाचार मिला
महाशिवरात्रि : एक विवाह ऐसा भी
महाशिवरात्रि : एक विवाह ऐसा भी महाशिवरात्रि कल्याण की महारात्रि है। मंगल, शुभ और स्वस्ति की रात। एक ऐसे विवाह की रात जो बहुत पुनीत था और जिसे आदर्श के रूप में प्रचलित करने के लिए एक पर्व बना दिया गया। तुलसी ने कहा था : "एहि बिबाह सब विधि कल्याना।" यह शिवजी का विवाह भर नहीं है,
पीतल पे सोने का पानी
पीतल पे सोने का पानी कभी-कभी विपरीतार्थक शब्द भी बड़े सार्थक होते हैं, जैसे "झूठा सच" और कभी-कभी स्थितिपरक शब्द भी प्रयोग में लाये जाते हैं मुहावरे के तौर पर, जैसे "आँख के अंधे नाम नयनसुख"। ख़ैर नाम में क्या रखा है। नाम तो फिल्म वालों ने नामुमकिन की हद तक विचित्र किन्तु
क्या जनसंख्या समस्या है?
क्या जनसंख्या समस्या है? जनसंख्या नीति को बदलकर दो बच्चों तक सीमित करने के लिए एक संसद सदस्य ने लोकसभा में निजी विधेयक पेश किया है। दो से ज्यादा बच्चों के अभिभावकों पर चुनाव आदि सुविधाओं पर तुरंत प्रतिबन्ध लगाने की मांग भी की है। इसके समर्थन में उन्होंने पश्चिमी उत्तरप्रद
Download PDF
QUICKENQUIRY
Related & Similar Links
Copyright © 2016 - All Rights Reserved - Garbhanal - Version 19.09.26 Yellow Loop SysNano Infotech Structured Data Test ^