ISSN 2249-5967

 

सुषमा शर्मा

सम्पादक
म्हारा उरलगिया घर आया जी
म्हारा उरलगिया घर आया जी कौन किस गर्भ से जन्म लेगा, नहीं जानता। बस जन्म होता रहता है। जन्म लेते ही सम्बन्ध भी जुड़ जाते हैं। कोई पुत्र हो जाता है, कोई माता और कोई पिता। यह तीनों सम्बन्ध फिर और भी कई सम्बन्धियों से जोड़ देते हैं।जन्म लेते ही और भी बहुत सारे नाते यूँ ही जुड़ जाते हैं, उन्हें अर्जित नहीं करना पड़ता। पर प्रेमी और प ...
सबके हित का काम
सबके हित का काम जे जनमे कलिकाल कराला। करतब बायस बेष मराला।। करतब (कर्तव्य) बायस (वायस) कौआ। अंग्रेज़ी बायस का अर्थ पक्षपात, (पूर्वग्रह) का और वेष मराल (हंस) का। यही कौवा कागभुसुंडि है, जो रामकथा का श्रोता होने के उपरांत वाचक भी है। वैसे ध्यान रहे कि कौआ प्रकृति को सुनता है और उड़-उड़ कर सारे जग को सुनाता है। लोक में य ...
कला और जीवन
कला और जीवन हम दिनचर्या का बड़ा हिस्सा जिस कार्य को देते हैं उसी को जीवन मान लेते हैं। इन कार्यों में प्रत्यक्ष संलग्नता और उसके बाद भी उसे ढोते रहते हैं। संस्थाओं में बंधी दिनचर्या व्यक्ति को संस्था का बना देती है लेकिन व्यक्ति कौन है? संस्था से परे उसका जीवन क्या है? वह समाज और खुद के संबंध को कैसे देखता है? क ...
भाषा की नाक पर रूमाल रखने का समय
भाषा की नाक पर रूमाल रखने का समय बेला महका रे महका आधी रात को यह पंक्ति एक फिल्म गीत की है, जो एक मीठी-गंध का स्मरण कराती है। कदाचित लगभग आधी शताब्दी पूर्व, आकाशवाणी की "विविध भारती" सेवा ने, देर रात को प्रसारित होने वाले, मधुर फिल्म गीतों के एक कार्यक्रम का नाम ही दिया था, "बेला के फूल"। लेकिन जब से भारत-सरकार के "पेयजल और स्वच्छत ...
धर्म का मूल भाव
धर्म का मूल भाव ऊँ सहनाववतु सहनौभुनक्तु सहवीर्यं करवावहै, तेजस्विना वधीतमस्तु मां विद्विषावहै। ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः।अर्थ : हम सभी एक-दूसरे की रक्षा करें। हम साथ-साथ भोजन करें। हम साथ-साथ काम करें। हम साथ-साथ उज्ज्वल और सफल भविष्य के लिए अध्यनन करें। हम कभी भी एक-दूसरे से द्वेष न करें।उपनिषदों से चयनित ये शब्द ...
"संत" शब्द की पुनव्र्याख्या का समय
अगर संत भी सांसारिक दुखों से त्रस्त होकर आत्म-हत्याएं करने लगें, भौतिक स्वार्थों में डूबकर और महाभोगी बनकर जेल यात्राएं करने लगें, अध्यात्म, लालच और लंपटता का पर्याय बनने लगें, संत भी "सीकरी" का कृपा पात्र बनने के लिए एडियां रगड़ने लगें और राजदंड को डिक्टेट करने का दुस्साहस करने लगें तो मान लीजिए कि ...
नुक़्ता-ए-नज़र बनाम तर्क-कुतर्क
नुक़्ता-ए-नज़र बनाम तर्क-कुतर्क ऊँचाई पर खड़े व्यक्ति को नीचे खड़े लोग बहुत छोटे (चींटियों जैसे) नज़र आते हैं। मज़े की बात ये है कि नीचे वालों को भी ऊँची इमारत, पहाड़ आदि यानि बुलंदी पर खड़ा आदमी उतना ही छोटा दिखाई देता है। यह कमाल है दृष्टिकोण का। जनाब! आईना भी कहने को सच बोलता है, लेकिन वह भी बायें को दायाँ और दायें को बायाँ दिखाता है ...
अनुवाद : संजीव त्रिपाठी वाल्मीकि रामायण : आधुनिक विमर्श-22 दूत हनुमान : भाग-1
अनुवाद : संजीव त्रिपाठी वाल्मीकि रामायण : आधुनिक विमर्श-22 दूत हनुमान : भाग-1 कवि वाल्मीकि के अनुसार सीता की खोज में गये दूत हनुमान को दो तरह की अनुभूतियाँ हुईं। एक आतंरिक अनुभूति, जो भूख, प्यास, प्यार और दुःख के रूप में हमारे शरीर महसूस करता है और हमारे लिये एक अनुभव पैदा करती है। और दूसरी बाहरी अनुभूति, जो वातावरण, विभिन्न वस्तुओं, मौसम और सामाजिक दृश्यों आदि के रूप में हमा ...
हँस के गले लगाऊँ चलो टहल आएं
हँस के गले लगाऊँ  चलो टहल आएं हँस के गले लगाऊँ इक लंबी रात दिल की पोटली खोली मैंनेमीठे-तीखे यादों के सिक्के गिरे फर्श पेभूलते-गिनते कशमकश में हीन बीत जाए ये उम्र सारीऐ जिन्दगी, तुझे हँस के ही गले लगाऊँ तो अच्छा है। अक्सर ही नापा है मैंनेचादर छोटी पड़ जाती है उम्मीदों को मेरीदिख ही जाते जख्म वो पुरानेउन जख्मों को फिर से ढक लूँ- ...
मूल्यबोध और जीवन
मूल्यबोध और जीवन क्या इस तरह भी विचार कर सकते हैं कि पुरानी पीढ़ी अब लगभग समाप्त हो रही है और कोई बिलकुल नयी तरह की संतति पूरी दुनिया में जन्म ले रही है जिसका मूल्यबोध पहले की पीढ़ी से कुछ अलग है। कभी-कभी ऐसा लगता होगा कि अब पुराने दादा-नानी नहीं रहे, वे पुराने शिक्षक भी नहीं रहे जो कभी होते थे। यहाँ तक कि वे पुलिसवाल ...
गुरु दर्शन
गुरु दर्शन गाड़ी तैयार है सर..., रामसिंह की आवाज़ थरथरा रही थी। यह गैरज़रूरी घोषणा रामसिंह ने आदत की मजबूरी से की। उसे पता था मुझे पता है। क्योंकि सारी गाड़ी की तैयारी मैंने अपनी आँखों से देखी थी : एक ए.के.-47 मशीनगन ड्राइवर की सीट के नीचे और एक छोटी पिस्तौल मेरे पिछले दरवाज़े में। "सर जी, बॉडी गार्ड साथ लेकर चलो", ...
सिद्धांतों को जीने वाले राजकिशोरजी
सिद्धांतों को जीने वाले राजकिशोरजी राजकिशोर के व्यक्तित्व की सबसे बड़ी बात यह थी कि जिन मूल्यों और आदर्शों को उन्होंने स्वीकारा था, उसे जीने की भरसक कोशिश करते। वे आजादी के बाद की उस पीढ़ी के व्यक्तित्व थे, जो अपने मूल्यों के लिए बहुत कुछ खोने को भी तैयार रहते थे। अवसरवाद ही मूल्य है, यह बीमारी उनको अपनी गिरफ्त में नहीं ले पाई थी। राजक ...
विश्व का एकमात्र अंक-काव्य सिरि भूवलय
विश्व का एकमात्र अंक-काव्य  सिरि भूवलय विचारों के आदान-प्रदान का सशक्त माध्यम है भाषा। मानव का मानव से संपर्क माध्यम है भाषा। किंतु भाषा क्या है? इसकी उत्पत्ति कैसे हुई? मानव ध्वनि संकेतों के सहारे अपने भावों और विचारों की अभिव्यक्ति करने के लिए जिस माध्यम को अपनाता है उसे भाषा की संज्ञा दी जाती है। भाषा शब्द संस्कृत के भाष् धातु से निषप ...
मिलकर काम करने का मिशन इंडियन पीपल्स फोरम यूएई के अध्यक्ष भूपेन्द्र कुमार से समीक्षा तैलंग की बातचीत
मिलकर काम करने का मिशन इंडियन पीपल्स फोरम यूएई के अध्यक्ष भूपेन्द्र कुमार से समीक्षा तैलंग की बातचीत पेशे से इंजीनियर भूपेन्द्र कुमार पिछले छः वर्षों से संयुक्त अरब अमीरात के दुबई शहर में कार्यरत हैं। वर्तमान में यूएई में सामाजिक सामुदायिक संगठन (इंडियन पीपल्स फोरम) के अध्यक्ष और राष्ट्रीय संयोजक हैं। गुरुकुल पद्धति को बढ़ावा देने के लिए अपने गृह नगर हनुमानगढ़, राजस्थान में हिन्दी, संस्कृत और अन्य भा ...
मनोहर श्याम जोशी कहानियों के नेपथ्य की कहानियाँ
मनोहर श्याम जोशी कहानियों के नेपथ्य की कहानियाँ लिखना (लेखन) वह जो सिर्फ पढ़ा न जाए, देखा- सुना भी जाए - वाह, मनोहर श्याम जोशी जी ने कितनी सुन्दर बात कही है। उनके इस विचार की व्याख्या मैंने ऐसे की कि लिखो तो बस जैसे चित्र खींच कर रख दो, जो पढ़ने वाले की आँखों के सामने चलचित्र की भाँति घूम जाए, शब्द ऐसे हों, ज्यों जलतरंग बजे कानों में। खुद जोशी जी क ...
वर्षा बहार : रस की फुहार
वर्षा बहार : रस की फुहार यह मॉनसून का समय है। भारतवर्ष के लिए मॉनसून मात्र हिन्द महासागर में उठने वाली व्यापारिक हवा नहीं है, बल्कि यह एक भव्य, जटिल और रहस्यमय घटना है। यह कविता है - हवा, दवाब, वर्षा और उससे प्रभावित भारतीय जन-गण-मन के जटिल निकाय की। मॉनसून का अरबी मूल है - मौसिम, जिसका अर्थ है - वर्ष का समय अथवा उपयुक्त ऋत ...
श्रेष्ठता सिद्ध करनी होती है
श्रेष्ठता सिद्ध करनी होती है कुत्ते की दुम को बारह वर्ष तक एक नली में रख तत्पश्चात सीधा हुआ देखने की लालसा रखने वाले गुमनाम वैज्ञानिक की शोध कुत्तों की अपेक्षा मनुष्यों पर अधिक प्रभावी सिद्ध हुई। अनपढ़ व सर्वोच्च शिक्षा प्राप्त करने के बाद भी नैसर्गिक स्वभाव किसी भी व्यक्ति का कभी नहीं बदला करता क्योंकि यह जेनेटिक कैरेक्टर होता ...
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