ISSN 2249-5967

 

सुषमा शर्मा

सम्पादक
2018 feb
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भारतीय भाषाएं - एक विस्मृत विनाश
भारतीय भाषाएं - एक विस्मृत विनाश जो दिखता है वही ध्यान में आता है, रहता है। जो है लेकिन आँख से दिखता नहीं, सिर्फ सुना या महसूस किया जा सकता है, सूक्ष्म है, वह ध्यान में कम या देर से आता है। सारी दुनिया में, सारे मीडिया में, सारे राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय मंचों पर क्लाइमेट चेंज की अ
शिक्षा के नतीजों का सवाल
शिक्षा के नतीजों का सवाल मैं शायद पहली कक्षा में थी जब स्कूल से एक छोटे गमले में एक पौधा लगा कर लाने का कहा गया था। उस समय प्लास्टिक के गमले चलन में नहीं थे। बड़ा गमला ले जाना संभव नहीं था इसलिए दादी ने एक गिलास में मिटटी भरकर उसमें एक पौधा लगवा कर दिया था। अपने हाथ से लगा
इटली की शिक्षा प्रणाली
इटली की शिक्षा प्रणाली यह बात करीब पच्चीस वर्ष पहले की है। तब मेरा बेटा उत्तरी इटली के एक प्राथमिक विद्यालय में पढ़ता था। यहाँ बच्चे प्राथमिक विद्यालय में छः वर्ष पूरे करने के बाद जाते हैं। एक दिन मेरी पत्नी ने बताया कि बेटे के स्कूल के बच्चों के अभिभावकों की एसोसिएशन ने
प्रार्थना की भाषा का रंग
प्रार्थना की भाषा का रंग नीचे वह प्रार्थना दी गई है जिसे 1964 से सभी केंद्रीय विद्यालयों में गाया जा रहा है। इसे लेकर विनायक शाह नामक वकील ने याचिका दायर की है कि हिंदी और संस्कृत की इस प्रार्थना के माध्यम से एक ख़ास धर्म का प्रचार किया जा रहा है। मूल रूप से यह एक आर्य समा
पुस्तक मेला
पुस्तक मेला हम पुस्तक मेला देखि लीनकुछ पर्ची बांटति बुद्धिमानकुछ धरम धुरन्धर व्यापारीकल्लू-कबीर सब एक भावरचना मा तनिकौ नहीं तावअपनी ढपली पर अपनि बीनहम पुस्तक मेला देखि लीन।कुछ कुर्ता वाले देखि लीनकुछ टाई वाले दे
खयाली पुलाव
खयाली पुलाव कभी सोचती हूँ कि एक किताब लिख लूँ। कम से कम इतना तो लिख ही लिया अब तक कि एक-दो पुस्तकें आसानी से छाप जाएँ। यकीन मानिए बहुत ज्यादा अनुभव नहीं है अभी लिखने का फिर भी किताब लिखने की समझ आ गयी है, ऐसा मुझे लगता है। पर दूसरे ही पल सोचती हूँ कि क्या करू
बढ़ते उत्सव, सिकुड़ती किताबें
बढ़ते उत्सव, सिकुड़ती किताबें लो जी फिर आ गया पुस्तक मेला! पिछले तीन बरस वर्ष से हर साल जनवरी में। पिछले कई वर्ष के चित्र दिमाग में छितरा रहे हैं। सर्दियों की गुनगुनी धूप में सुबह ग्यारह-बारह बजे प्रगति मैदान में प्रवेश करती भीड़। ज्यादतर बच्चे, स्कूल, कॉलिज के छात्र नौजवान। छु
वर्णिकाओं, सुना
वर्णिकाओं, सुना वर्णिकाओं, सुनोतुम रात को बाहर ना निकलोतुम घर से बाहर ना निकलोतुम माँ के पेट से ना निकलोतभी तुम हम से बचोगी।हम हैं रावणऔर राम तोइस देश से विदा हो चुके हैंहम हैं द्यूत-सभा केदुःशासन और कर्ण
अगर ऐसा होता
अगर ऐसा होता अगर ऐसा होतापवन पे सवार हमगगन को चीरतेसरहदों के परे हमउस मिट्टी पे उतरते झिलमिल सितारों तलेप्यारा-सा आँगन होताइंद्रधनुष के रंगों में धुलेप्यार ही प्यार होता सूर्य की किरणें जहाँछूकर ह
मैं ऑरगेनिक नहीं हूँ
मैं ऑरगेनिक नहीं हूँ मैं ऑरगेनिक नहीं हूँमुझे फ़र्टिलाईज़र और पेस्टिसाईड देकरबड़ा किया गया हैरात-रात जागकरफिज़िक्स की प्रॉब्लम्सऔर गणित के समीकरणहल किए हैं मैंनेअंग्रेज़ी के कई कठिन शब्दयाद किए हैं मैंने देखो तो सही
देश-विदेश के दरम्यान
देश-विदेश के दरम्यान तरक़्क़ी की सीढ़ियाँ चढ़ते-चढ़ते हम अपने औ अपनों से कितनी दूर निकल जाते हैं, पता ही नहीं चलता। समय की बेलगाम उड़ान हमें कब, कहाँ से उड़ा के ले जाती है ये समय गुज़र जाने के बाद ही पता चलता है... इसी तरह की बहुत-सी पंक्तियाँ हम सभी ने कभी ना कभी अपने जीवन क
समय के आईने में भारतवंशी
समय के आईने में भारतवंशी सुदूर समय में भारत एक संस्कृति प्रधान देश रहा है। कभी वह अपने मूल्यों एवं आदर्शों के कारण विश्व गुरु भी रहा है। लेकिन आज दुनियाभर में अमेरिकी संस्कृति का बोलबाला है। अमेरिका आर्थिक एवं ज्ञान विज्ञान की दृष्टि से काफी आगे बढ़ चुका है। सम्पूर्ण विश्व
मसला तीन तलाक़ का
मसला तीन तलाक़ का इतना शोर-शराबा क्यों है भाई! ग़ौर कीजियेगा हमने शोले फिल्म का मशहूर जुमला "इतना सन्नाटा क्यों है" नहीं इस्तेमाल किया। इसलिये नहीं किया क्योंकि सन्नाटा तो "था" "है" नहीं। मसला दरअसल तलाक़ नहीं शादी है। शादी ना हो तो तलाक़ का सवाल ही नहीं उठता। मगर लोग
बेबी, खाना खा लिया?
बेबी, खाना खा लिया? जैसे हाउस वाइफ होती हैं, याने कि वो महिला जिसकी जिम्मेदारी घर संभालना रहती है। मसलन खाना बनाना, कपड़े धोना एवं घरेलू कार्य करना। वह कहीं काम पर नहीं जाती है। उस पर कमाने की जिम्मेदारी नहीं होती है। काम पर जाना और कमा कर लाना पति का काम होता है। समय
वाल्मीकि रामायण : आधुनिक विमर्श-20 लंका में सीता अनुवाद : संजीव त्रिपाठी
वाल्मीकि रामायण : आधुनिक विमर्श-20 लंका में सीता अनुवाद : संजीव त्रिपाठी रामायण की कहानी पात्र सीता के इर्द-गिर्द बुनी गई है। ऐसा संभव है कि कहानी में राम की महानता की ख्याति हो, पर वाल्मीकि जीवन में नारी की महत्ता को दर्शाना चाहते हों? जब उन्होंने "नारद" से उस पुरुष के बारे में बताने को कहा जिसमें अनेकानेक उत्कृष्ट पु
स्वभाव, सम्बन्ध, सभ्यता
स्वभाव, सम्बन्ध, सभ्यता हम एक बोधमय नित्यता में सदा रहते आये हैं। इसका अनुभव हमें अपने स्वभाव के अनुरूप हुआ करता है। हमारा यह स्वभाव हमें मिली जन्मजात प्रकृति के न्याय से स्वतः संचालित है। इसे हठपूर्वक बदला तो नहीं जा सकता पर बोधमय नित्यता के आइने में अपनी ही प्रतिपल मिट
"रीछ" के बहाने कुछ यादें
दूधनाथ सिंह की वे कहानियां पाठकों का खास ध्यान खींचती हैं जो दिलचस्प किन्तु प्रतीकात्मक होने के कारण उलझी हुई, जटिल और चमत्कारपूर्ण होती हैं। उनकी कहानी "रीछ" अपनी प्रतीकात्मकता, फन्तासी तथा यौन-चित्रों-संवादों के कारण पर्याप्त विवादग्रस्त और चर्च
हुनर की अभिव्यक्ति
हुनर की अभिव्यक्ति दुनिया के इतिहास में हुनर हमेशा परम्परा सम्मत ही रहे हैं। यह ज़रूर है कि समय के अनुरूप उपकरण गढ़ने वाली दुनिया में उनकी नयी-नयी अभिव्यक्तियाँ होती रही हैं। आदमी अदिकाल में भी घड़ा बनाता था और उसे आज भी अपना पानी भरने के लिये घड़े की ज़रूरत है। भले ही उ
हिन्दी साहित्य का जर्मन अनुवाद
हिन्दी साहित्य का जर्मन अनुवाद मनुष्यों की परिस्थितियों को आपस में समझने के लिये, उनके शांतिपूर्ण, अहिंसात्मक सहजीवन के लिये साहित्य के अनुवादों का बहुत बड़ा महत्व है, क्योंकि केवल एक-दूसरे को समझने में अपरिचित, अन्य प्रकार के तथ्यों का अस्वीकारण कम हो जाता है। पारस्परिक समझ के
आध्यात्म इस लोक का
आध्यात्म इस लोक का आमतौर पर जब भी आध्यात्म की बात चलती है तो उसे वैराग्य, धर्म और परलोक से जोड़कर देखा जाता है। अलग-अलग विद्वान इस शब्द का अपने-अपने सन्दर्भ के हिसाब से व्याख्यान करते है और वह आम लोगों की समझ से परे होता है। इस भौतिक जगत में रहते हुये अपनी जिम्मेदारि
कथा सम्राट प्रेमचन्द से अल्प असहमति
कथा सम्राट प्रेमचन्द से अल्प असहमति हिन्दी साहित्य से परिचित भला ऐसा कौन व्यक्ति होगा, जिसके मन में महान कथाकार प्रेमचन्द के प्रति असीम आदर न हो। मेरा भी है परन्तु उनकी कुछेक रचनाएं, कतिपय चरित्र-चित्रण खटकते रहे हैं लम्बे समय से...उनकी प्रसिद्ध कहानी "कफन" को लीजिए। प्रमुख पा
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